क्या मोदी का राहुल पर बोलना हिट?

लगता है मानों जुमलों को गढ़ने की मशीन बनी है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण अब सिर्फ राहुल गांधी को केंद्रीत करके जुमलो में कसा होता है। शुक्रवार को असम के सिल्चर में उन्होंने नामदार, कामदार के साथ राजदार का नया जुमला उछाला। उन्होने जनसभा में कहा कि देखों नामदार का चेहरा जो हेलिकॉप्टर सौदे वाले राजदार के आते ही चिंता में डुबा दिखता है। नामदार परेशान और चिंता में है कि कहीं राजदार (मिशेल) बोल नहीं दे। यही कारण है जिससे नामदार चाहे जो बोल दे रहा है।  

जाहिर है नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी, गांधी परिवार और कांग्रेस के भ्रष्टाचार को नंबर एक मुद्दा बना रहे है। इसी सोच में लोकसभा में राफेल पर बहस कराई। अरुण जेटली और निर्मला सीतारमण दोनों ने राहुल गांधी को घेरते हुए हेलिकॉप्टर के अगस्ता सौदे और बोफोर्स के हवाले राफेल बनाम बोफोर्स की तुलना बनवानी चाही। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने तो यह तक कह दिया है कि कांग्रेस को बोफोर्स ने हराया जबकि राफेल से मोदी सरकार वापिस सत्ता में आएगी।  

अपना मानना है यह पूरी एप्रोच विनाश काले विपरित बुद्धी है। इसलिए कि जनता का न राफेल से मतलब है और न राहुल गांधी से या भ्रष्टाचार के मुद्दे से। विधानसभा चुनावों में मध्यप्रदेश, राजस्थान और छतीसगढ तीनों राज्यों में किसी मतदाता या आम आदमी की फीडबैक में यह सुनाई नहीं दिया कि राफेल नाम के सौदे से लोग खुश या खुन्नस में है। मगर हां, इस जुमले ने राहुल गांधी को जरूर हिट बनाया, उन्हंे लगातार बोलने का विषय दिया है कि चौकीदार चोर है।   

सो राहुल गांधी ने क्या किया या राहुल गांधी पप्पू है या राजदार के चलते नामदार परेशान है जैसी बातों का नरेंद्र मोदी का कथ्य क्या उनके भाषणों को हिट बनवा सकता है?  अपना मानना है मोदी, शाह, जेटली कुल मिला कर राहुल गांधी के बनाएं  जाल में उलझे हैं। राहुल गांधी ने चौकीदार चोर है का हल्ला, नैरेटिव बना कर नरेंद्र मोदी को मजबूर किया है कि वे हर भाषण में राहुल गांधी के खिलाफ बोले। 

सोचे यह राहुल गांधी की लोकप्रियता बढ़वाने वाली बात है या नहीं? भाजपा का भटकना है या नहीं? सवाल इसलिए है क्योंकि राहुल गांधी न तो पूरे देश में मोदी के खिलाफ चुनौती लिए हुए है और न राहुल गांधी भ्रष्टाचार का वैसा कोई निजी कीचड लिए हुए है जैसा राफेल सौदे में अनिल अंबानी की कंपनी के चलते नरेंद्र मोदी पर उछला है। 

बावजूद इसके भारत के प्रधानमंत्री के पद पर बैठे नेता ने सिल्चर में यह भाषण दिया कि देखों नामदार (राहुल) के चेहरे को! चिंता में दिखता है या नहीं?  राजदार से परेशान है! 

इस एप्रोच से लोकसभा मुकाबले को मोदी बनाम राहुल के बीच बनाना है। इसी पर फिर सवाल है इससे राहुल गांधी को फायदा होगा या नुकसान? दूसरी बात जनता में उसकी रोजमर्रा की हकीकत, अनुभव, बदहाली की क्या मोदी और उनकी टीम अनदेखी नहीं कर रही है? 

हैरानी की बात है कि नरेंद्र मोदी अपना मुकाबला राहुल गांधी और कांग्रेस से मान रहे है या ऐसा मुकाबला कराना चाहते है जबकि असलियत में लोकसभा का चुनाव मोदी बनाम जनता के बीच है और होगा? नरेंद्र मोदी ने जनता पर, जनता के जीने पर जो हथौड़े चलाए है और जनता ने उसी के चलते छतीसगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान में भाजपा को हराया है तो वैसे ही आगे लोकसभा चुनाव का अखाड़ा भी सजना है। मगर मोदी-शाह-जेटली सोचते है कि राहुल गांधी को बीच में ला कर जनता का ध्यान उसकी तकलीफों से हटवाया जा सकता है। इस पर आप क्या सोचंेगे?  

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