Loading... Please wait...

सुविधा से तय होता है भ्रष्टाचार!

बिहार में चल रहे राजनीतिक प्रहसन से एक बार फिर यह साबित होता दिख रहा है कि भारत में किस तरह नेता अपनी सुविधा के हिसाब से भ्रष्टाचार के मुद्दे का इस्तेमाल करते हैं। राज्य के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के खिलाफ सीबीआई के मुकदमे के बाद जैसी राजनीति हुई है उससे सुविधा का सिद्धांत और पुष्ट हुआ है। अगर रेल मंत्री रहते लालू प्रसाद ने होटल लीज पर देने के मामले में गड़बड़ी की तो उस समय 18 साल से भी कम उम्र के रहे तेजस्वी यादव उसके लिए कैसे जिम्मेदार हो सकते हैं? लेकिन इस तर्क से नीतीश कुमार या उनकी पार्टी को कोई मतलब नहीं है। उनका सुविधा का सिद्धांत यह कहता है कि इस मसले पर राजनीति करो और तेजस्वी का इस्तीफा मांगो। 

यह आम लोगों की आंख में सरेआम धूल झोंकने का मामला है। लालू प्रसाद, जिन्होंने कथित तौर पर घोटाला किया वे नीतीश कुमार को कबूल हैं। उनकी पार्टी नीतीश कुमार को कबूल है। वे उसके साथ चुनाव लड़ेंगे और उसके समर्थन से सरकार चलाएंगे। लेकिन तेजस्वी यादव कबूल नहीं हैं। उनकी पार्टी साफ सुथरी छवि की बात कर रही है, लेकिन जब चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में सजा पा चुके लालू प्रसाद की पार्टी से आपने तालमेल कर लिया तो छवि का सवाल कहां से उठता है?

बहरहाल, नीतीश कुमार इसके अपवाद नहीं हैं। बरसों पहले भाजपा की सुषमा स्वराज ने सुविधा के इस सिद्धांत को बहुत कायदे से स्थापित किया था। उन्होंने पहले संचार घोटाले के आरोपी सुखराम को भाजपा से जोड़ने पर कहा था कि वे अब सूखाराम हो गए हैं। नरसिंह राव की सरकार में संचार मंत्री रहे सुखराम पर छापा पड़ा था, तब भाजपा ने भ्रष्टाचार का बड़ा मुद्दा बनाया था। लेकिन बाद में सुखराम की पार्टी ने हिमाचल प्रदेश में सरकार बनाने में भाजपा की मदद की। उस समय सुषमा ने कहा – कांग्रेस में रहते वे सुखराम थे और अब सूखाराम हो गए हैं। 

कहने का मतलब है कि सारी पार्टियां अपनी सुविधा के हिसाब से भ्रष्टाचार की परिभाषा तय करती हैं और उनका इस्तेमाल करती हैं। पिछले चुनाव में महाराष्ट्र में नरेंद्र मोदी ने शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार पर लूट का आरोप लगाया था और जरूरत पड़ी तो उनकी और देख लिया। यहीं कहानी जम्मू कश्मीर में दोहराई गई। वहां भी मोदी ने कहा था कि बारी बारी से बाप बेटे और बाप बेटी की जोड़ी प्रदेश को लूटती है। लेकिन बाद में बाप बेटी की कथित लूटेरी जोड़ी के साथ भाजपा ने सरकार बनाई, जो अभी तक चल रही है। आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस के नेता जगन मोहन भ्रष्टाचार के आरोप में कई साल जेल में रहे, लेकिन आज केंद्र की भाजपा सरकार के साथ उनका अच्छा सद्भाव बना हुआ है। ऐसे ही तमिलनाडु की दोनों पार्टियां अन्ना डीएमके और डीएमके के नेता किसी न किसी घोटाले में फंसे हैं, लेकिन दोनों पार्टियां बारी बारी से कांग्रेस या भाजपा के साथ जुड़ी रहती हैं। 

ऐसे ही यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में सरकार चला रही मायावती बड़ी भ्रष्ट थीं और उनके कई मंत्रियों के खिलाफ छापेमारी हुई। बाबू सिंह कुशवाहा सहित कई नेता, मंत्री पकड़े गए। लेकिन बाद में कुशवाहा को भाजपा ने थोड़े समय के लिए अपने साथ जोड़ा और अब मायावती तो कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा बन गई दिख रही हैं। मुलायम सिंह से लेकर लालू प्रसाद और शरद पवार तक सबकी पार्टी इस विपक्षी गठबंधन का हिस्सा है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी अपनी ईमानदारी और सादगी के लिए मशहूर हैं। उनकी पार्टी के एक दर्जन सांसद और विधायक सारदा चिटफंड घोटाले में या रोजवैली चिटफंड घोटाले में फंसे हुए हैं। लेकिन ममता बनर्जी ने भ्रष्टाचार के आरोपी किसी नेता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, उलटे उनका बचाव किया। उनके एक मंत्री मदन मित्रा तो जेल चले गए, तब भी ममता ने उनको मंत्री बनाए रखा। 

Tags: , , , , , , , , , , , ,

169 Views

आगे यह भी पढ़े

सर्वाधिक पढ़ी जा रही हालिया पोस्ट

बेटी को लेकर यमुना में कूदा पिता

उत्तर प्रदेश में हमीरपुर शहर के पत्नी और पढ़ें...

पाक सेना प्रमुख करेंगे जाधव पर फैसला!

पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय और पढ़ें...

© 2016 nayaindia digital pvt.ltd.
Maintained by Netleon Technologies Pvt Ltd