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कांग्रेस को चाहिए यथास्थिति

कांग्रेस कमाल की राजनीति कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के दांवपेंच से वह इतनी घबराई है कि हर स्थिति में यथास्थिति बनाए रखना चाहती है। ऐसे लग रहा है कि जैसे यथास्थिति बनी रही तो वह जीत जाएगी और भाजपा हार जाएगी! तभी कांग्रेस के नेता दूसरी विपक्षी पार्टियों के साथ मिल कर बैलेट पेपर से चुनाव की मांग कर रहे हैं। 17 पार्टियों के नेता इसकी मांग कर रहे हैं। 

ध्यान रहे इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन, ईवीएम को लेकर विपक्षी पार्टियां धांधली के आरोप लगाती हैं। हर हार के लिए विपक्षी पार्टियां ईवीएम को जिम्मेदार ठहराती हैं और जीत पर कहती हैं कि भाजपा की उलटी गिनती शुरू हो गई। बहरहाल, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ईवीएम में कई बदलाव किए हैं। अब हर जगह वीवीपैट यानी मतदाता पर्ची निकालने वाली मशीन के साथ ही ईवीएम के इस्तेमाल की घोषणा कर दी गई है। वीवीपैट मशीन के कारण धांधली की जो थोड़ी बहुत संभावना थी वह खत्म हो गई है या कम हो गई है। 

इसके अलावा चुनाव आयोग ने बताया है कि नई मशीनों में सुरक्षा के कुछ नए फीचर जोड़े गए हैं। अगर किसी भी माध्यम से वोटिंग मशीन को हैक करने या उसके साथ छेड़छाड़ का प्रयास किया जाएगा तो मशीन बंद हो जाएगी। उसके बाद मशीन जब दोबारा चालू होगी तो उसमें एरर मैसेज दिखाई देगा और यह भी मैसेज आएगा कि इसके साथ छेड़छाड़ की कोशिश की गई है। यानी उसके साथ छेड़छाड़ का प्रयास मशीन में दर्ज हो जाएगा, जिसे कभी भी देखा जा सकता है। इसके बावजूद विपक्षी पार्टियों को इस पर भरोसा नहीं हो रहा है। कांग्रेस भी उनके साथ इस काम में लग गई है।

इसी तरह कांग्रेस एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव का भी विरोध कर रही है। साथ ही वह कुछ राज्यों के चुनाव टालने के विचार का भी विरोध कर रही है। कांग्रेस ने विधि आयोग के सामने अपना पक्ष रख दिया है। पार्टी ने कहा है कि एक साथ पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव कराने का प्रस्ताव असंवैधानिक है। कांग्रेस ने इससे पहले विधि आयोग की बैठक में हिस्सा नहीं लिया था। उस समय जिन पार्टियों ने हिस्सा लिया उसमें से भी ज्यादातर ने इसका विरोध किया था। असल में सभी पार्टियां मान रही हैं कि अगर एक साथ चुनाव हुआ तो उसका फायदा भाजपा को होगा और उसका एकमात्र कारण नेतृत्व है। भाजपा के पास नरेंद्र मोदी का चेहरा है, जबकि विपक्ष बिना चेहरे के है। बहरहाल, विधि आयोग की बैठक के करीब एक महीने के बाद कांग्रेस ने अपनी राय भेजी है और एक साथ चुनाव का विरोध किया है। 

कांग्रेस इस साल के अंत में होने वाले चुनावों का अगले साल लोकसभा के साथ कराने का भी विरोध कर रही है। हालांकि अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं हुआ है पर एक चर्चा थी कि इन राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगा कर चुनाव अगले साल कराए जाएं। पर कांग्रेस उसका भी विरोध कर रही है। 

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