गुड़ खा गुलगुले से परहेज!

क्या‍ ही अजब चर्चा जो आदित्य ठाकरे ने दिल्ली आ कर राहुल गांधी से मुलाकात की लेकिन राहुल गांधी ने शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे के साथ फोटो नहीं खींचने दी। मुलाकात को सोशल मीडिया पर शेयर नहीं किया। यदि यह बात सही है तो सोचंे कि कांग्रेस और सोनिया-राहुल-प्रियंका की किस मनोदशा का प्रमाण है? कोई माने या न माने अपना मानना है कि सन् 2014 के बाद कांग्रेस की सबसे बड़ी सफलता महाराष्ट्र में भाजपा को सत्ता से बाहर करवाना है। मुबंई देश की वित्तिय राजधानी है और गैर-भाजपा सरकार से मुंबई में पूरा माहौल बदल गया है। उद्धव ठाकरे और शरद पवार ने फिल्मकारों, सेठों, बिल्डरों, कॉआपरेटिव, स्थानिय मीडिया आदि तमाम लॉबी को अपने प्रभाव में ले लिया है। अटकल है कि यदि मोदी-शाह एंड पार्टी ने प्रफुल्ल पटेल, एनसीपी नेताओं के मामले में सुलह नहीं की तो जस्टीस लोया मामला खुलेगा तो देवेंद्र फड़नवीस आदि भाजपा नेताओं के बैंकिग, फिल्मी तार भी जाहिर होंगे। ठाकरे-पवार बहुत कुछ जान चुके है और प्रदेश के तमाम बड़बोले भाजपा नेता ठंडे पड गए है।

यह सब कैसे हुआ? क्योंकि उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस से नाता बनाया और कांग्रेस ने शिवसेना से अपने को जोड हिंदूवादी राजनीति को तोड़ा और हिंदुओं में पोजिटिव मैसेज बनाया। मुंबई और महाराष्ट्र के कांग्रेसी जान रहे है कि शिवसेना-कांग्रेस के एलायंस से मुसलमान खुश है तो हिंदू भी कांग्रेस में भगवा रंग देखने लगे है। यह भी तथ्य है कि उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और शिव सैनिक मोदी-शाह सरकार के खिलाफ वह तल्ख रवैया लिए हुए है जिसकी हिम्मत प्रदेश कांग्रेस नेताओं में भी नहीं है। बावजूद इसके सोनिया गांधी और राहुल गांधी पहले उद्धव ठाकरे के शपथ समारोह में नहीं गए तो अब खबर है कि आदित्य ठाकरे से मुलाकात में राहुल गांधी ने फोटों खिंचाने में परहेज किया।

इससे कांग्रेस की क्या दशा-दिशा जाहिर होती है? क्या यह चिंता नहीं कि मुसलमान के बीच ठाकरे-राहुल, कांग्रेस-सेना के मंच शेयर और साझेपन की फोटो न चले? सत्ता साथ होते हुए भी ठाकरे और शिवसेना से दूरी दिखाना और सावरकर पर अनावश्यक टीका टिप्पणी या नागरिकता विरोधी आंदोलन में, जेएनयू के आंदोलन में कांग्रेस नेताओं की बढ़-चढ़ कर भागीदारी अंततः मोदी-शाह-भाजपा के उस नैरेटिव का औजार है कि गांधी परिवार को हिंदू राजनीति से चिढ़ है। शिवसेना के साथ वे सरकार बना लेंगे लेकिन उद्धव ठाकरे के साथ सोनिया गांधी और राहुल गांधी अपने को खड़ा नहीं दिखलाएंगे।

One thought on “गुड़ खा गुलगुले से परहेज!

  1. हरिशंकरजी व्यास

    कोई माने या न माने ये है आजादी के बाद से अबतक देश में सर्वाधिक राज करने वाली कांग्रेस पार्टी की नकाब वाली राजनीति का चरित्र, जिसका चित्रण कर कल आपने अपने नकाब वाले लेख में “हिन्दुओं छोड़ो नकाब, बनो सत्यवादी” में हिन्दुओं पर थोप उन्हें सत्यवादी बनने का उपदेश दिया था।

    उफ! कितना शर्मनाक! है ये कि हिन्दू हित में सदा मुखर हो दहाड़ने वाली सेना भी सत्ता की लोलुपता में कांग्रेसी सेकुलरी नकाब की राजनीति के परदे में रहने को विवश होने लगी है। और…

    मोदी -शाह-भाजपा के नैरेटिव औजार पर अपनी अकुलाहट छुपाने वाले व गांधी परिवार की बहुसंख्यक हिन्दू दमन छ्द्म सेकुलरी सोच पर आंख मूँदने वाले चाटूकार पत्रकार; कांग्रेस की 2014 के बाद महाराष्ट्र में भाजपा को सत्ता से बाहर करवाने को सबसे बड़ी सफलता मानने लगे। आखिरकार जयचन्दी सोच से ग्रसित चाटूकारिता करने वाले लोग जाने अनजाने अपनी समर्पित रहने वाली दशा-दिशा जाहिर कर ही देते है।

    कैलाश माहेश्वरी
    भीलवाड़ा राजस्थान
    मोबाइल 9414114108

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