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राफेल और सफाई में ही बोलना 

साल के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 95 मिनट का इंटरव्यू दिया। इंटरव्यू वीडियो न्यूज एजेंसी को इसलिए दिया ताकि एक साथ सारे चैनलों को उसके प्रसारण का मौका मिले। सारे चैनलों के अलावा खुद प्रधानमंत्री मोदी ने अलग-अलग मुद्दों पर अपनी टिप्पणियों के लिंक ट्विट किए। यानी बहुत कायदे से हर मीडियम के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचने का प्रयास हुआ। प्रधानमंत्री ने इसमें कई मामलों मंस सफाई दी। कांग्रेस मुक्त भारत के अपने नारे पर भी सफाई देते हुए कहा कि वे कांग्रेस संस्कृति से मुक्ति की बात कर रहे थे। 

बहरहाल, इसके तीन दिन बाद चार जनवरी को लोकसभा में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ढाई घंटे बोलीं। राफेल पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने संसद में सबसे लंबा भाषण देने का रिकार्ड बनाया। इससे पहले राहुल गांधी ने राफेल पर चर्चा की शुरुआत करते हुए सरकार से कुछ सवाल किए थे। उनके भाषण के तुरंत बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए राफेल पर सरकार का पक्ष रखा। भाजपा के और भी सांसदों ने राफेल पर सरकार का पक्ष रखा। इसके बाद भी रक्षा मंत्री को ढाई घंटे सफाई देनी पड़ी। बावजूद इसके राहुल गांधी कह रहे हैं कि उनके उठाए चार सवालों का जवाब नहीं मिला। 

राहुल अपने चार सवाल पकड़ कर बैठे हैं। तीन जनवरी को प्रधानमंत्री पंजाब गए और वहां एक निजी यूनिवर्सिटी के छात्रों को संबोधित किया तब भी राहुल गांधी ने ट्विट करके छात्रों से कहा कि वे सम्मान के साथ ये चार सवाल प्रधानमंत्री से पूछें। राहुल का पहला सवाल है, वायु सेना की जरूरत 125 विमानों की थी तो उसे कम करके 36 कैसे किया? इसके लिए किसने कहा था क्या वायु सेना ने अपनी जरूरत कम की थी या खुद प्रधानमंत्री ने सौदा बदल दिया?

राहुल गांधी का दूसरा सवाल है, यूपीए के शासन में एक विमान की कीमत 560 करोड़ रुपए थी, जो बढ़ कर 16 सौ करोड़ हो गई है, यह कैसे हुआ? इसमें एक दिलचस्प बात यह है कि अरुण जेटली ने चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए पूछा कि यह 16 सौ करोड़ का आंकड़ा कहां से आया, जबकि कीमत गोपनीय रखी गई है। इसका जवाब देते हुए राहुल गांधी ने कहा – कीमत आपने बताई। असल में सरकार ने खुद ही बताया कि सौदा 58 हजार करोड़ रुपए का है। अगर 36 विमान 58 हजार करोड़ रुपए में खरीदने हैं तो एक विमान करीब 16 सौ करोड़ रुपए का ही तो होगा! 

कांग्रेस अध्यक्ष का तीसरा सवाल है, राफेल की फाइल पर्रिकर जी के बेडरूम में क्यों है? इस सवाल का एक संदर्भ है। असल में पिछले दिनों कांग्रेस ने एक ऑडियो क्लिप जारी की, जिसमें गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे की एक अज्ञात व्यक्ति से बातचीत है। इस कथित बातचीत में राणे उस व्यक्ति को बता रहे हैं कि मनोहर पर्रिकर ने कैबिनेट की बैठक में कहा कि उनके बेडरूम में राफेल की फाइल पड़ी है और इसलिए कोई उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकता है। इस खुलासे को लेकर कई सवाल हैं। पहला सवाल तो यह है कि क्या पर्रिकर जैसा ईमानदार, कर्मठ और योग्य नेता गोवा का मुख्यमंत्री बने रहने के लिए राफेल पर अपनी पार्टी को ब्लैकमैल कर सकता है? पहली नजर में यह आरोप गले के नीचे नहीं उतरता है। तभी यह सवाल है कि पर्रिकर जैसे नेता के ऊपर इस तरह के आरोप लगे हैं और भाजपा या केंद्र व राज्य की सरकार टेप की जांच को लेकर बहुत गंभीर क्यों नहीं है? पर्रिकर और राणे दोनों ने कहा है कि टेप छेड़छाड़ वाली है। फिर भी जांच नहीं कराई जा रही है। अगर किसी टेप के सहारे इतना बड़ा आरोप लगाया जा रहा है और भाजपा व केंद्र सरकार को लग रहा है कि यह फर्जी है तो तत्काल फारेंसिक जांच करा कर कार्रवाई करनी चाहिए। सरकार वह नहीं करा रही है तभी संदेह पैदा हो रहा है। 

बहरहाल, राहुल गांधी का चौथा सवाल है, कि आखिर हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड, एचएएल से लेकर ऑफसेट करार अनिल अंबानी की कंपनी को क्यों दिया गया, जिसको विमान बनाने का कोई अनुभव नहीं था और वह कंपनी सौदा हासिल करने के कुछ दिन पहले ही बनी थी। राहुल गांधी ने अपने भाषण में दो और बातें कहीं। उन्होंने भारत के साथ सौदा करने वाले फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बयान का जिक्र किया, जिसमे उन्होंने कहा था कि भारत सरकार के कहने पर अनिल अंबानी की कंपनी को ऑफसेट ठेका दिया गया। दूसरी बात राहुल ने फ्रांस के मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के हवाले कही कि मैक्रों ने उनसे निजी बातचीत में कहा कि सौदे में विमान की कीमत गोपनीय रखने की शर्त नहीं है। इसे लेकर पहले अरुण जेटली ने और बाद में निर्मला सीतारमण ने कहा कि राहुल गांधी झूठ बोल रहे हैं और फ्रांस की सरकार ने ऐसी निजी बातचीत का खंडन किया है। अगर राहुल गांधी लोकसभा में झूठ बोल रहे हैं विशेषाधिकार का मामला बना कर उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? 

कुल मिला कर राफेल पर दो दिन हुई बहस का लब्बोलुआब यह है कि सरकार को जितनी बात कहनी है उतनी वह कह रही है और विपक्ष को जो सवाल करना है वह वो कर रही है। विपक्ष सरकार की ओर से दी जाने वाली किसी सफाई से संतुष्ट नहीं होने वाला है। उसकी मांग संयुक्त संसदीय समिति, जेपीसी से जांच कराने की है। भाजपा की सहयोगी शिव सेना ने भी कह दिया है कि अगर सरकार ने कोई गलत काम नहीं किया है तो उसे जेपीसी की जांच करानी चाहिए। सरकार जेपीसी बनाएगी नहीं तो वह जो भी सफाई दे, विवाद चलता रहेगा।  

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