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आंतकी खतरे का नैरिटिव हुआ शुरू!

संयोग मामूली नहीं कि इधर मोदी-शाह की लोकसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हुई उधर आंतकियों के सिर उठाने की खबरें आने लगी। यों भारत जब पूरा ही आतंकी खतरे का मारा है तो प्रधानमंत्री कोई रहा हो वह भी हमेशा आतंकी निशाने में रहा है। फिर नरेंद्र मोदी तो मुख्यमंत्री के वक्त से ही निशाने में रहे हंै। बावजूद इसके तथ्य है कि चार साल शांति से गुजरे। अपने को ध्यान नहीं पड़ रहा है कि इन चार सालों में  पहले कब पाकिस्तान के लश्करे तैयबा जैसे आतंकी संगठन ने उत्तरप्रदेश में श्रीकृष्ण जन्मभूमि याकि हिंदू तीर्थस्थल पर हमले की धमकी दी। पर अभी इस छह जून को यह खबर पूरे देश में, टीवी चैनलों की राष्ट्रीय बहस की फोकस में थी कि उत्तर रेलवे के एक अफसर को पाकिस्तानी आंतकवादी का धमकी भरा पत्र मिला। रेलवे स्टेशन और धार्मिक स्थलों पर हमले होने की धमकी का। इसलिए उत्तरप्रदेश में हाई एलर्ट घोषित हुआ और मथुरा व आगरा में चौकसी बढ़ा दी गई। 

इसके दो दिन बाद आठ जून को एक टीवी चैनल ने ऐसी एक साजिश का रहस्योदघाटन किया जो मोदी राज को खत्म करने के लिए राजीव गांधी टाईप हादसे की सोच( साजिश) लिए बतलाती है। पूणे के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता और कथित माओवादी के लैपटॉप की सूचना में परोक्ष तौर पर मोदी राज के खतरे की जो बाते उल्लेखित है वह उनकी हत्या की साजिश का शक पैदा करने वाली है!

तभी 8 जून की शाम टीवी चैनलों पर मोदी की जान को खतरे की चिंता पर बहस बनी। उस पर लालू यादव की पार्टी के शिवानंद तिवारी, कांग्रेस के संजय निरूपम ने खबर को प्लांटेड बता  कर कहा यह मतदाताओं में सहानुभूति बनाने की पेंतरेबाजी है तो उससे अलग क्रिया, प्रतिक्रिया का बवाल बना। 

यह आगे बहुत होगा। अगले दस महीने देश की बहस में यह भी मुद्दा छाया रहेगा कि आंतकवादियों से देश को कितना खतरा है, हिंदू मंदिरों को कितना खतरा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जान को कितना खतरा है और पाकिस्तान की भारत के चुनावों को ले कर कैसी-कितनी तरह की दिलचस्पी है।

8 जून की खबर पर बाबा रामेदव का यह कहा बहुत गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी देश की विरासत हंै। हमारा यह अहोभाग्य कि ऐसा व्यक्ति राजनीति में है। मुझे धक्का लगा यह जान कर कि उनको खत्म करने के लिए राजीव गांधी जैसी साजिश है। सरकार को एक उच्च स्तरीय जांच का आदेश दे मामले की जांच करवानी चाहिए। 

दूसरी तरफ राजद उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कहा- प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से गिर रहा है इसलिए उनको माओवादियों से खतरे की खबर प्लांटेड है सहानुभूति वोट बंटोरने के लिए। कांग्रेस के संजय निरूपम ने कहा यह मोदी की पुरानी टेक्टीक्स है। जब वे मुख्यमंत्री थे और लोकप्रियता घटने लगती थी तो उनकी हत्या की साजिश की खबरे आने लगती। इसलिए यह जांच होनी चाहिए कि इस दफा इसमें कितना सत्य है? 

भाजपा ने तब तड़ाक जवाब दिया। गृह राज्यमंत्री किरीन रिजीजू ने कहा- यह तो बहुत सदमें वाली बात। ऐसी बात कैसे कह दी। कांग्रेस ने सिविलिटी, पोलिटी के तमाम कायदे तोड़ डाले। जब हम इंसान है तो इंसान की तरह ही रहे। 

इस बहस पर कितनी तू-तू, मैं-मैं हो सकती है और यदि ऐसी तू-तू, मैं-मैं अगले दस महीने लगातार महीने में दो-चार खबरों के साथ चलती रही तो कैसा माहौल बनेगा, चुनाव किधर घूमेगा, इसका अनुमान लगाया जा सकता है। 

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