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बनना ठाकुर नेता और फूट!

हरि शंकर व्यास
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योगी आदित्यनाथ की एक हिंदू योगी की बजाय ठाकुर नेता की इमेज बनने में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का मामला बहुत अंहम है। ध्यान रहे भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर उन्नाव इलाके के सबसे बड़े और संभवतः इकलौते ठाकुर नेता हैं। वे उत्तर प्रदेश की सभी पार्टियों से विधायक रह चुके हैं। पिछले साल उनके घर के सामने रहने वाली एक युवती ने, उनके ऊपर बलात्कार का आरोप लगाया था। तभी से राज्य की सरकार और प्रशासन इस मामले पर लीपापोती में लगी रही। पुलिस और योगी प्रशासन पर अपनी पकड़ दिखाते हुए विधायक कुलदीप सेंगर ने युवती के पिता को आर्म्स एक्ट में जेल भिजवाया। जेल जाने से पहले विधायक के भाई और कुछ दूसरे लोगों ने पुलिस के सामने युवती के पिता की इतनी पिटाई कर दी कि उसने जेल में दम तोड़ा।

जो हुआ, उसकी गूंज लखनऊ में बलात्कार पीडिता के मीडिया के आगे रोने से पहुंची तब भी योगी प्रशासन ने बलात्कार के आरोप को दबवाने की हर तरह से कोशिश की। इस पूरे घटनाक्रम में राज्य की पुलिस कहती रही कि विधायक के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं। पुलिस ने उनको गिरफ्तार नहीं किया।

नतीजतन हिंदू योगी की जगह अब मुख्यमंत्री ठाकुर नेता की इमेज लिए हुए है। तभी कांग्रेस की हिम्मत हुई जो वह कहे कि आगे से वह मुख्यमंत्री को योगी नहीं सिर्फ आदित्यनाथ कहेगी। तभी बीबीसी में इस हैंडिग से  एक लेख प्रकाशित हुआ कि ‘क्या होता अगर कुलदीप सेंगर का नाम कुलदीप तिवारी होता’?

कुल मिला कर लब्बोलुआब यह है कि कुलदीप सेंगर चूंकि ठाकुर हैं इसलिए पुलिस उनको बचाती रही। यह पहला मौका नहीं है, जब राज्य की सरकार के ऊपर जातीय नजरिए से भेदभाव करने का आरोप लगा है। इस बार फर्क यह रहा है कि उन्नाव की घटना के बहाने पार्टी के अनेक नेताओं ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के विधायकों और प्रवक्ताओं ने सार्वजनिक रूप से उनके ऊपर सवाल उठाए हैं। पहली बार ऐसा हुआ कि पार्टी का विभाजन खुल कर सामने आया।

बुधवार को प्रदेश भाजपा की प्रवक्ता दीप्ति भारद्वाज ने सीधे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को टैग करके ट्विट किया और लिखा – अमित शाहजी यूपी को बचा लीजिए, सरकार के निर्णय शर्मसार कर रहे हैं। इसके एक दिन बाद प्रदेश भाजपा के दूसरे प्रवक्ता आईपी सिंह ने योगी का बचाव किया पर दूसरे नेताओं पर ठीकरा फोड़ा। उन्होंने ट्विट किया – पूजनीय योगीजी ने विधायक कुलदीप सेंगर को गिरफ्तार करने और उन्नाव के एसपी को सस्पेंड करने का फैसला कर लिया था पर एक बड़े व्यक्ति ने दखल दिया और अब पार्टी उसकी कीमत चुका रही है। मतलब प्रवक्ताओं में ठाकुर बनाम ब्राह्यण का खेल। 

उन्नाव के अलावा दलित मामले में भी योगी घिरे है। कम से कम पांच दलित नेताओं ने मुख्यमंत्री की शिकायत की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के दलित प्रेम के खुले प्रदर्शन के बावजूद सावित्री बाई फुले, छोटे लाल खरवार, अशोक दोहरे, यशवंत सिंह सहित पांच दलित विधायकों ने मुख्यमंत्री पर अपमानित करने और अनदेखी करने के आरोप लगाए हैं। इसके जवाब में फिर पांच दलित नेताओं को मुख्यमंत्री के समर्थन में उतरा गया। गैर-यादव पिछड़ी जाति के प्रतिनिधि नेता के तौर पर भाजपा गठबंधन में शामिल ओमप्रकाश राजभर ने भी मुख्यमंत्री की शिकायत पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से की थी। सो, ब्राह्मण हो, दलित हो या पिछड़ी जाति का कोई नेता हो सब जातीय भेदभाव के आरोप लगा रहे हैं।

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