nayaindia Kamal Nath shift to Delhi 2023 के बाद ‘कमलनाथ’ दिल्ली शिफ्ट हो जाएंगे..
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2023 के बाद ‘कमलनाथ’ दिल्ली शिफ्ट हो जाएंगे..

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भोपालI प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का नया धमाका.. बोले हमारे नेताओं ने कहा कि आप दिल्ली शिफ्ट हो जाइए….मैंने कहा  मैं नहीं शिफ्ट होउंगा…2023 के बाद मैं शिफ्ट होउंगा…उससे पहले मैं शिफ्ट होने नहीं वाला…और मैंने ये तय किया कि मैं हर कांग्रेस परिवार के सदस्य से जुड़ा रहूंगा… एक न्यूज़ चैनल के इंटरव्यू के दौरान कमलनाथ का यह बयान सोशल मीडिया की सुर्खियां बन चुका है.. जबकि मध्य प्रदेश के सारे क्षत्रप कमलनाथ को एक बार फिर सीएम इन वेटिंग मान चुके  और राष्ट्रीय नेतृत्व उन्हें प्रदेश की राजनीति में फ्री हैंड दे चुका है..

एक बार फिर कांग्रेस के नाथ ने बहुत कुछ बोला लेकिन चर्चा इस ताजा बयान की तो आकलन के साथ बहस और नए सवाल भी खड़े किए जा रहे हैं.. भाजपा नेताओं ने इस बयान को लपक कर कमलनाथ से ज्यादा कांग्रेस की रणनीति पर सवालों की झड़ी लगा दी है.. अपनी साफगोई के लिए पहचाने जाने वाले कमलनाथ इससे पहले भी मध्य प्रदेश की राजनीति में किंग मेकर से किंग की भूमिका पर समय-समय पर दृढ़ता के साथ अपनी बात रखते रहे हैं.. तो उनके कई बयान उनकी बदलती रणनीति  पॉलिटिक्स में समय के साथ बदल जाने और एडजस्टमेंट को दर्शाती रही है ..चाहे फिर राष्ट्रीय नेतृत्व से कभी  कोई पद नहीं मांगने और मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपने से जुड़ा मामला हो.. या फिर यह साबित करना कि कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें बहुत सोच समझकर चुनौती पूर्ण दायित्व के साथ मध्यप्रदेश भेजा था ..

पार्टी नेतृत्व के लिए जरूरी ही नहीं वह खुद को मजबूरी भी साबित करते रहे .. कभी संदेश गया कि वह मन मर्जी के मुताबिक राष्ट्रीय नेतृत्व को अपने फैसलों के लिए  बाध्य करने की क्षमता रखते हैं ..यह सभी बातें पुरानी हो चुकी है लेकिन अब ताजा बयान कमलनाथ का कुछ हद तक कांग्रेस के राज से पर्दा हटा ता हुआ नजर आ रहा.. जो यह बड़ा संदेश भी दे रहा है कि राजनीति में अपनी भूमिका वह खुद सुनिश्चित करते हैं.. कब उन्हें मध्यप्रदेश आना कब तक उन्हें मध्यप्रदेश में रहना और कब उन्हें दिल्ली लौटना यह कोई और तय नहीं कर सकता.. इसके पीछे वह कोई बड़ा लक्ष्य लेकर चलते हैं तो कभी इसमें समय के साथ मजबूरी ही नहीं समझौते भी नजर आते हैं.. कमलनाथ ने जो कहा उसका मतलब साफ है दो हजार अट्ठारह के बाद सरकार बनाने और तख्तापलट के बाद उनके दिल्ली शिफ्ट होने की अटकलें बेबुनियाद नहीं थी,.. बात में दम थी लेकिन  सियासत में नई संभावनाओं को तलाशते रहे नाथ का जोश ,जुनून और जज्बा ही नजर आया जो वह भाजपा से हिसाब किताब बराबर करने को लेकर संजीदा बने रहे.. उन्होंने काफी हद तक स्पष्ट किया पार्टी सहयोगियों और राष्ट्रीय नेतृत्व की मंशा के विपरीत उन्होंने मध्यप्रदेश में संघर्ष के अपने इरादे को अंजाम तक पहुंचाने की पहले ही ठान ली थी..

सवाल यही पर खड़ा होता है क्या 2023 के बाद दिल्ली शिफ्ट हो जाने का   ऐलान नाथ की सोची-समझी  नई रणनीति का हिस्सा है.. या फिर आने वाले समय में कोई पटकथा लिखी जा चुकी है.. सवाल क्या कमलनाथ 15 महीने की सरकार गवार देने का दर्द अपने साथ नहीं ले जाना चाहते हैं ..और एक बार फिर कांग्रेस की सरकार में वापसी सुनिश्चित करवा कर वह दिल्ली लौट जाना चाहते हैं ..तो क्या सरकार नहीं संभाल पाने की उनकी अपनी जवाब देयी की कसक उन्हें  रह रह कर सोचने को मजबूर करती है .. गलती सुधार की कोशिश न सिर्फ झकझोर रही है बल्कि  अपने लंबे राजनीतिक सफर का बेहतर अंजाम भी चाहते हैं.. बात 2023 यानि मिशन विधानसभा चुनाव क्या यह कमलनाथ की जिद है.. तो सवाल 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करा कर कमलनाथ खुद मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहेंगे .. आखिर इसके पीछे उनकी मंशा क्या है.. क्या कमलनाथ तय कर चुके हैं चुनाव हारे या जीते मुख्यमंत्री अब वह खुद नहीं बनेंगे..

यह सवाल इसलिए क्योंकि उन्होंने समय सीमा का निर्धारण कर दिल्ली शिफ्ट होने का ऐलान कर दिया है.. क्या एक बार फिर वह किंग मेकर की भूमिका में यह साबित करना चाहते हैं.. कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं चाहे फिर वह मुख्यमंत्री के पद पर वापसी ही क्यों ना हो उनके लिए कोई मायने नहीं रखती है.. या फिर यह माना जाए कि 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए जीत की संभावनाएं लगातार कम होती जा रही ..  क्या यह कांग्रेस की जमीनी हकीकत है.. क्योंकि सिंधिया की बगावत के बाद भी विधायकों का कांग्रेस से मोहभंग होने का सिलसिला थमा नहीं है.. कांग्रेस छोड़ भाजपा के पाले में बैठ चुके सचिन बिरला के मामले में तो यह कहने वाले मिल जाएंगे कि कांग्रेस नहीं चाहती कि उपचुनाव हो.. उपचुनाव में कांग्रेस के  प्रदर्शन पर लगातार सवाल खड़े हो रहे.. तो ऐसे में क्या  प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर कमलनाथ अपनी भूमिका से क्या संतुष्ट होंगे.. या फिर कमलनाथ को वक्त है बदलाव का नारा देने वाली कांग्रेस के भविष्य की आहट मिल गई है.. जिसमें पार्टी का नेतृत्व कोई बड़ी चूक  या उलटफेर नहीं होता है तो कमान राहुल गांधी के हाथ में ही नजर आने लगी है,..

और ऐसे में बदलती कांग्रेस में कमलनाथ जैसे अनुभवी नेता के लिए लंबे समय तक राज्य की राजनीति में संघर्ष क्या संभव नहीं होगा.. खासतौर से जब राहुल गांधी 2024 की तैयारी में जुटते हुए देखे जा सकते हैं.. कहीं कमलनाथ को भाजपा के संगठन उसके कैडर की ताकत से बड़ा खतरा पैदा तो नहीं हो गया क्योंकि कमलनाथ यह .. वो कहते रहे कि उनका मुकाबला मजबूत संगठन वाली बीजेपी से है .. सवाल 2023 यदि कांग्रेस चुनाव नहीं जीत पाई तो  कमलनाथ के पास विकल्प क्या रहेगा.. क्या वह प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बने रहेंगे या फिर दिल्ली शिफ्ट होने के साथ छिंदवाड़ा से लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी करेंगे.. वह बात और है कि 2023 में प्रदेश अध्यक्ष रहते उन्हें अभी फिर एक बार फिर विधानसभा का चुनाव लड़ना ही होगा.. तो क्या कमलनाथ की दिलचस्पी प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका में 2023 विधानसभा चुनाव से ज्यादा 2024 लोकसभा चुनाव में अभी से होने लगी है, कमलनाथ कांग्रेस के ना सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष रहते ,पूर्व मुख्यमंत्री बल्कि लंबे समय तक नेता प्रतिपक्ष भी रहे, हाल ही में नेता प्रतिपक्ष का पद उन्होंने छोड़ दिया था ..

इसके पहले भी कमलनाथ के बयान विवादों को हवा देते रहे.. चाहे फिर अपने पुराने संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा से उनका वह बयान जिसमें संदेश गया कि राजनीति से वह ऊब चुके हैं.. या फिर नगरीय निकाय चुनाव के निर्णायक दौर में उनका यह कहना है कि महापौर के चुनाव में उनका कोई इंटरेस्ट नहीं.. या फिर भाजपा संगठन मजबूती की तारीफ और कहीं ना कहीं कांग्रेस के कमजोर संगठन को दुरुस्त नहीं कर पाने की कसक.. यह सच है कि सरकार के तख्तापलट के बाद उन्होंने मध्य प्रदेश में ही जमे रहने का निर्णय लिया और काफी हद तक कांग्रेस की राजनीति के वह  धुरी बनी रहे,.. कमलनाथ अपने पुत्र नकुलनाथ की राजनीति में लांचिंग सुनिश्चित करवा कर उसे लोकसभा चुनाव जिता कर दिल्ली पहुंचा चुके.. कांग्रेस ही नहीं देश की राजनीति का एक बड़ा चेहरा कमल नाथ अपने अनुभव और प्रबंधन के साथ सियासत में एक लंबी पारी खेल चुके हैं.. जिनका अपना स्टाइल भी खूब चर्चा में रहा.. चाहे फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बराबरी से बैठे नजर आते समय उनकी बॉडी लैंग्वेज की चर्चा रही हो.. या फिर सोनिया गांधी से उनकी मजबूत केमिस्ट्री..

राहुल गांधी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते जब लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस का मध्य प्रदेश में भी प्रदर्शन खराब रहा.. तब राहुल के इस्तीफे की पेशकश के बीच कमलनाथ ने अपनी ओर से जिम्मेदारी नहीं मानी थी.. यही नहीं मध्यप्रदेश में दिग्विजय सिंह जैसे राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी को अपने साथ कदमताल करने को मजबूर करना.. कांग्रेस के किंग मेकर से किंग बन मुख्यमंत्री की शपथ ले  चुके कमलनाथ ने दो हजार अट्ठारह का चुनाव ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस में रहते जीता था ..लेकिन उसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में कमलनाथ की सरकार रहते 29 लोकसभा क्षेत्रों में से सिर्फ एक छिंदवाड़ा में कांग्रेस जीत हासिल कर पाई थी ..यही नहीं सिंधिया की बगावत के बाद 28 उपचुनाव हो या उसके बाद हुए उपचुनाव कांग्रेस वापसी की संभावनाएं सुनिश्चित नहीं करवा पाई ..

नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा की कुछ सीटों पर अप्रत्याशित हार को कांग्रेस अपनी बड़ी जीत के तौर पर प्रचारित कर माहौल जरूर बनाने की कोशिश कर रही है.. ऐसे मैं जब कांग्रेस को अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन संविधानिक मोहर के साथ करना है ,.. इस बीच सोनिया ,राहुल प्रियंका काले कपड़ों के साथ सड़क पर संघर्ष करने को मजबूर हुए तब कमलनाथ का दिल्ली से लेकर भोपाल विरोध प्रदर्शन में नजर नहीं आना खूब चर्चा का विषय बना ..सोशल मीडिया के जरिए जरूर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की अभिव्यक्ति सामने आती रही है.. नगर निगम और नगर पालिका के साथ कुछ पंचायत चुनाव के परिणाम ने जब कांग्रेस को 2023 के लिए संजीवनी दी है ..तब कमलनाथ ने विधानसभा चुनाव के बाद खुद को दिल्ली  सिफ्ट कर देने का एलान कर फिर सभी को चौंकाया है.. सवाल कांग्रेस के किंग मेकर से किंग बन चुके 15 महीने के पूर्व मुख्यमंत्री आखिर कमलनाथ   किसे,  क्यों, क्या , संकेत  देना चाहते हैं.. भाजपा उनके इस बयान का सियासी लाभ उठाने में जुट गई है.. तो कांग्रेस में भी अंदर खाने इस बयान पर खुसर पुसर शुरू हो गई है..

क्या वाकई में कमलनाथ 2023 के बाद दिल्ली जाने के अपने फैसले पर अटल रहेंगे ..कुछ उसी तरह जैसा 2018 में बनी सरकार गवा देने के बाद उन्होंने मध्यप्रदेश में पैर जमाए रखने का ऐलान कर साबित भी किया  ..या फिर कमलनाथ ने राष्ट्रीय राजनीति में कांग्रेस की खस्ताहाल हालात को ध्यान में रखते हुए मोदी विरोधी गठबंधन की सियासत में सक्रिय होने का मन अभी से बना लिया है.. क्या अनुभवी कमलनाथ जिनका यूपीए और एनडीए के गैर कांग्रेस बीजेपी राजनीतिक दल और उनके नेताओं से व्यक्तिगत तौर पर भी बहुत अच्छे संबंध है.. क्या गठबंधन राजनीति के नए दौर में यूपीए के नेतृत्व की चाहत कमलनाथ को दिल्ली ले जाना चाहती है ..क्योंकि कमलनाथ पहले भी मायावती से लेकर ममता बनर्जी से अपने संपर्क को समय-समय पर उजागर करते रहे हैं ..तो हाल ही में महाराष्ट्र सरकार के संकट के समय उद्धव ठाकरे  के  भी  वह संपर्क में आ चुके थे..

यदि कमलनाथ 2024 लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए दिल्ली में अपनी कोई नई भूमिका नए सिरे से देखने को मजबूर हुए हैं.. तो क्या उसकी वजह है 2023 मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए सत्ता वापसी की संभावनाएं नजर नहीं आती.. या फिर आत्मविश्वास से लबरेज कमलनाथ ने हर हाल में 2023 में सत्ता वापसी कर कांग्रेस का नेतृत्व नई पीढ़ी को सौंपने का मन बना लिया है.. पहले कमलनाथ का प्रदेश अध्यक्ष पद पर रहते मध्यप्रदेश का मैदान नहीं छोड़ने का फैसला पर अब 2023 के बाद दिल्ली जाने के स्पष्ट संकेत.. कांग्रेस के अंदर एक नई बहस   छिड़ना है.. देखना दिलचस्प होगा राहुल गांधी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने  की संवैधानिक प्रक्रिया के दौरान कमलनाथ मध्य प्रदेश से लेकर दिल्ली में अपने मोहरे फिट कर अपनी  बिसात कैसे और किस तरह बिछाते हैं..

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