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शाह की सनसनी

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भोपाल। भाजपा के सबसे सफल रणनीतिकार माने जाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भोपाल दौरे को लेकर भाजपा ही नहीं पूरे राजनीतिक क्षेत्र में सनसनी है क्योंकि शाह किसी भी विपरीत परिस्थिति को अनुकूल बनाने में माहिर माने जाते हैं। प्रदेश में 2023 की विधानसभा आम चुनाव की क्या रणनीति होगी इसका रोड में भी आज बन सकता है।

दरअसल, राजनीति में नेतृत्व की विभिन्न स्वरूप देश की राजनीति में देखने को मिले हैं। सत्तारूढ़ दल भाजपा की बात करें तो जब पार्टी में शुरुआत की थी तब बेहद अभाव वोटों का भी था और नोटों का भी था और तब नेतृत्व बहुत सीधा-साधा सहज – सरल था। अटल बिहारी वाजपेई जब प्रदेश के दौरे पर आते थे तो ना तो किसी प्रकार का तामझाम होता था और ना किसी भी प्रकार की धमक लेकिन वर्तमान दौर में भाजपा के पास ना नोटों की कमी है ना वोटो की कमी है और नेतृत्व ऐसा कि उनके दौरे की खबर के बाद ही नेताओं की नींद उड़ जाए। पता नहीं अब क्या होगा, क्या फैसला लेंगे क्या रणनीति बनाएंगे और ऐसे में सभी स्वागत की तैयारियों की होड़ में शामिल हो जाते हैं।

बहरहाल, राजधानी भोपाल को झंडा, बैनर और फ्लेक्स से पाट दिया गया है क्योंकि पार्टी के रणनीतिकार और देश के गृहमंत्री अमित शाह भोपाल आ रहे हैं। सत्ता और संगठन ने स्वागत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। जंबूरी मैदान में जहां अमित शाह तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस वितरण करेंगे और तेंदूपत्ता समितियों के सदस्यों को संबोधित करेंगे। इसी जंबूरी मैदान पर 15 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनजाति सम्मेलन में आए थे। जाहिर है प्रदेश में 2023 में सरकार बनाने के लिए पार्टी की नजर आदिवासी मतदाताओं को पूरी तरह अपने पक्ष में करने की है क्योंकि चुनावी इतिहास भी प्रदेश का यही कहता है कि जिधर आदिवासी समाज रहता है उसकी सरकार बनती है।

2018 के विधानसभा चुनाव में आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित अधिकांश सीटें भाजपा हार गई थी और सत्ता से बाहर हो गई थी। यही कारण है कि अब अमित शाह एक बार फिर इस वर्ग के बीच आ रहे हैं। इसके पहले जबलपुर में भी 18 सितंबर को राजा शंकर शाह और वर रघुनाथ शाह की प्रतिमाओं का अनावरण करने के लिए आए थे और तब भारी संख्या में यह समाज वहां एकत्रित हुआ था।

जंबूरी मैदान के कार्यक्रम के अलावा अमित शाह का महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रदेश भाजपा कार्यालय में 2 घंटे रहने का है जिसमें बीजेपी के तमाम महत्वपूर्ण नेताओं को बुलाया गया है और इस दौरान शाह प्रदेश की राजनीति की स्थिति साझा करेंगे। साथ ही 2023 की चुनावी तैयारियों का आगाज भी पार्टी के आगे का रोड मैप सत्ता और संगठन के कार्यक्रम तो तय होंगे ही चुनावी दृष्टि से जिम्मेदारियों का भी बटवारा होगा। कुल मिलाकर अमित शाह के दौरे को लेकर भाजपा सत्ता और संगठन दिन रात तैयारियों में जुटा है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ रहे वही भाजपा ही नहीं कांग्रेस ssमें भी शाह के दौरे पर निगाहें हैं क्योंकि शाह जिस प्रदेश में भी जाते हैं वहां कुछ दिन बाद ही उठापटक तेज हो जाती है और यही शाह के दौरे की सनसनी बनाती है।

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