कांग्रेस पर आक्रामक हो रही भाजपा सरकार

दरअसल राजनीतिक दलों का सरकार में आना जाना लगा रहता है और जो भी दल सरकार में रहता है उस दौरान कुछ ना कुछ ऐसी गलतियां हो जाती है जिस पर यदि विपक्षी दल सरकार में आने पर कार्रवाई करें तो फिर लेने के देने पड़ सकते हैं लेकिन नेताओं के बीच अघोषित रूप से एक ऐसा गठबंधन होता है जिसमें कितने ही बयान खिलाफ में दें।

कितने ही आरोप-प्रत्यारोप लगाएं, लेकिन सरकार में आने पर उन्हीं आरोपों पर कार्रवाई नहीं हो पाती है क्योंकि राजनीति से हटकर भी संबंध होते हैं और एक-दूसरे को बचाते हैं।

15 वर्षों की भाजपा सरकार पर तब कि विपक्षी दल कांग्रेस में लगभग डेढ़ सौ घोटालों के आरोप लगाए थे जिनमें कुछ तो ऐसे थे जिस पर मैदानी आंदोलन भी किए गिरफ्तारियां भी दी लेकिन 15 महीनों की सरकार में किसी भी भाजपा नेता पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। ऐसे में भाजपा सरकार द्वारा कांग्रेसी नेताओं पर जो आक्रमक का दिखाई जा रही है, उसको लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इसे डर्टी पॉलिटिक्स कहां है।

बहरहाल 15 वर्षों के बाद सरकार में आने के बाद कांग्रेस सरकार के मंत्रियों ने अपने बंगलों पर काफी काम करवाया। अधिकांश बंगलों की रंगत ही बदल गई लेकिन जब तक मंत्री ठीक से बंगला पर व्यवस्थित हो पाते तब तक सरकार ही गिर गई और नई सरकार के बनते के साथ ही कोरोना महामारी ने पैर पसारना शुरू कर दिया। लंबा लाकडाउन चला और अभी भी स्थिति सामान्य नहीं है जिसके कारण यह पूर्व मंत्री अपने नए ठिकाने नहीं बना पा रहे हैं। इसके बावजूद सरकार ने पूर्व मंत्रियों को नोटिस जारी कर शीघ्र मकान खाली करने की चेतावनी दी है और ऐसा न करने पर इनके सामान की नीलामी भी की जा सकती है।

पूर्व वित्त मंत्री तरुण भनोट का बंगला सील कर दिया गया है और एक सप्ताह के अंदर उन्होंने अभी मकान खाली नहीं किया तो फिर उनके सामान की नीलामी की जाएगी जबकि 15 महीनों के कांग्रेस शासनकाल काल में भाजपा के किसी पूर्व मंत्री के लिए बंगला खाली कराने के लिए ऐसा दबाव नहीं डाला गया। यही नहीं सोशल मीडिया पर दोनों ही दलों के नेताओं के कई बार वीडियो एडिट कर करके डाले जाते रहे हैं लेकिन कोई भी दल सत्ता में रहा हो एफआईआर जैसी नौबत नहीं आई लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर ऐसे मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। इन सब मामलों पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा है कि सरकारें आती-जाती रहती हैं। प्रदेश में एक गलत परंपरा को जन्म दिया जा रहा है।

भाजपा से जुड़े लोग कांग्रेस नेताओं के खिलाफ निरंतर डर्टी पॉलिटिक्स कर रहे हैं। भाजपा सरकार प्रदेश में निरंतर कांग्रेसी नेताओं पर दमनकारी कार्रवाई कर रही है। भाजपा प्रदेश में दुर्भावना वाली सोच को प्रदर्शित कर रही है। भाजपा के लोग कांग्रेस नेताओं की छवि बिगाड़ने का काम कर रहे हैं। दिग्विजय सिंह के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज की गई है। इसकी निंदा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई वीडियो एडिटेड है तो कार्रवाई एडिटेड वीडियो बनाने वालों के खिलाफ होनी चाहिए। दिग्विजय सिंह पर कार्रवाई समझ से परे है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी कहा है कि वीडियो को एडिट किसने किया। भाजपा के लोग राहुल गांधी की भी वीडियो एडिट कर वायरल करते रहे हैं। इनकी भी जांच होना चाहिए।

कुल मिलाकर प्रदेश में अब तक भले ही मिली जुली सियासत चलती रही हो लेकिन भाजपा जिस तरह से कांग्रेस नेताओं का आक्रमक रुख अपना रही है उससे प्रदेश की सियासत में टकरा हट बढ़ सकती है। दोनों ही दल 24 सीटों के विधानसभा के उपचुनाव को लेकर तैयारियों में जुटे हैं। इस कारण भी एक-दूसरे पर दबाव बनाने में कसर नहीं छोड़ेंगे क्योंकि इन सीटों से सरकार का भविष्य जो तय होना है।

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