BJP leaders leaving the party यूपी: भाजपा में भागदौड़: अभी तो यह ‘ट्रेलर’ है... पूरी फिल्म बाकी है... मेरे दोस्त...
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यूपी: भाजपा में भागदौड़: अभी तो यह ‘ट्रेलर’ है… पूरी फिल्म बाकी है… मेरे दोस्त…

funds Gujarat CAG Report

भोपाल। भारतीय राजनीति के मार्गदर्शक उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनाव के पहले सत्तारूढ़ दल भाजपा में भागदौड़ का खेल शुरू हो गया है, मोदी-योगी की कथित ‘दादागिरी’ से उत्पीड़ित भाजपाजन अब दल को छोड़कर प्रमुख प्रतिपक्षी दल समाजवादी पार्टी का द्वार खटखटाने लगे है… और यह स्थिति सिर्फ उत्तरप्रदेश के सत्तारूढ़ दल के साथ ही नहीं बल्कि दूसरे अहम् चुनावी राज्य पंजाब की भी है, जहां कांग्रेसजन भाजपा का द्वार खटखटा रहे हैं। 

वैसे भारतीय प्रजातंत्र में दल बदल का यह चलन कोई नया नही है, यह तो कई सालों से चला आ रहा है, सत्तारूढ़ दल के नेता में जब अहम् की मात्रा बढ़ जाती है तो फिर हर राजनीतिक दल के साथ यही होता आया है, जिसकी किरदार स्वयं इंदिरा गांधी भी रही है, किंतु इस बार केवल इतिहास ही नहीं दोहराया जा रहा है, बल्कि इतिहास में नए आयाम जोड़े जा रहे है, जो स्पष्ट करते है कि देश-प्रदेश के नेता कितने अहंकारी हो गए है? वैसे इस दल-बदल के दौर को हवा देने में सदा से उत्तरप्रदेश ही अग्रणी रहा है जिसका साथ अन्य कई राज्यों ने दिया है। 

यदि हम ताजे दौर की बात करें तो उत्तरप्रदेश के एकमंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने मंत्री पद से इस्तीफे के साथ भाजपा से इस्तीफे का एलान किया है, श्री मौर्य उत्तरप्रदेश पिछड़ा वर्ग के वरिष्ठ नेता है और 2016 में बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे, उनकी बेटी अभी भी भाजपा से सांसद है उत्तरप्रदेश पिछड़ा वर्ग में उनका काफी प्रभाव है तथा मौर्य के इस्तीफे को भाजपा के लिए काफी बड़ा झटका बताया जा रहा है, श्री मौैर्य के साथ फिलहाल तीन भाजपा विधायकों ने भी इस्तीफें की पेशकश की है तथा राज्य के सभी कौनों ने उनके समर्थक भाजपा छोड़ सपा में जाने का एलान कर रहे है। 

नेशनल कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार ने करीब बीस विधायकों के भाजपा छोड़ने की भविष्यवाणी की है, यहां यह उल्लेखनीय है कि नेशनल कांग्रेस पार्टी ने उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की घोषणा की है, जबकि गोवा विधानसभा चुनाव में वह कांग्रेस के साथ गठबंधन करने जा रही है। यद्यपि भाजपा छोड़ने वाले पिछड़े वर्ग के वरिष्ठ नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने फिलहाल यह औपचारिक घोषणा नहीं की है कि वे किस पार्टी का दामन थामने जा रहे है, किंतु मंत्री पद तथा पार्टी छोड़ने के तत्काल बाद उनकी सपा प्रमुख अखिलेश यादव से हुई भेंट ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया कि उनका अगला राजनीतिक कदम सपा में ही होगा, पिछड़े वर्ग के इस वरिष्ठ नेता के सपा में प्रवेश को समाजवादी पार्टी नेता पार्टी के सुखद व शुभ बता रहे है तथा मान रहे है कि राज्य में अगली सरकार समाजवादी पार्टी की ही बनेगी तथा अखिलेश फिर एक बार मुख्यमंत्री बनेगें? 

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देश की राजनीतिक दिशा दिखाने वाले उत्तरप्रदेश के इस नए राजनीतिक घटनाक्रम ने जहां यह एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि उत्तरप्रदेश के साथ ही देश के आम वोटरों का भी भाजपा से मोहभंग होने लगा है, वहीं प्रतिपक्षी दलों को भी अब यह एहसास होने लगा है कि देश की सत्ता के सिंहासन से भाजपा को हटाना है तो मजबूत प्रतिपक्ष का होना जरूरी है और इसी बात को लेकर प्रतिपक्षी दलों में खुसर-फुसर शुरू हो गई है, कोई आश्चर्य नही होगा कि उत्तरप्रदेश चुनाव के पूर्व ही प्रतिपक्षी दलों की एकता की नई रणनीति सबके सामने आ जाये?

 इसीलिए इन घटनाक्रमों से ऐसा लगता है कि देश में नए राजनीतिक तूफान की शुरूआत भी उत्तरप्रदेश से ही होगी और सब के सामने योगी जी का चेहरा होगा, जबकि निशान सीधे मोदी जी पर होगा। अब ऐसे कयास लगाए जा रहे है कि उत्तरप्रदेश के करीब एक सौ भाजपा विधायक एक जोरदार धमाके के माध्यम से मोदी को यह विस्फोटक संदेश देने वाले है। जहां तक मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ का सवाल है उन्हें भाजपा में मोदी-शाह-नड्डा के बाद चौथे क्रम का सबसे बड़ा नेता माना जा रहा था, साथ ही जिन पांच राज्यों में अगले महीनें विधानसभा चुनाव होने जा रहे है, उनमें से चार राज्यों में वर्तमान में भाजपा की सरकारें है, सिर्फ पंजाब में ही कांग्रेस की सरकार है, भाजपा को यह आशंका है कि यदि उत्तरप्रदेश के राजनीतिक ग्रहण की काली छाया अन्य चुनावी राज्यों पर भी पड़ गई तो फिर पार्टी का क्या होगा? पार्टी ही नहीं संसद और विशेषकर राज्यसभा का क्या होगा? जहां आगामी छः महीनें बाद सतर से अधिक सीटों के चुनाव होने वाले है? इन्हीं सब तथ्यों को लेकर भाजपा की चिंताएं बढ़ गई है। 

प्रतिपक्षी कह रहे है कि अभी तो यह देश की भावी राजनीतिक फिल्म का ट्रेलर मात्र है, पूरी फिल्म तो किसी ‘टैरर’ फिल्म से कम नहीं होगी?

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