भाजपा की प्रीमेच्योर डिलेवरी

मध्यप्रदेश में पिछले 48 घंटों में चले राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह के अनुमान लगाए जा रहे लेकिन माना यही जा रहा है कि भाजपा की यह प्रीमेच्योर डिलीवरी हो गई है और क्या कर्नाटक की तर्ज पर चला गया ऑपरेशन लोटस फेल हो गया है।

अब आगे परिणाम जो भी निकले, लेकिन इस घटनाक्रम से मध्यप्रदेश की राजनीति भी अब कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र जैसे राज्यों की तरफ बढ़ चुकी है।

दरअसल प्रदेश में जब से कांग्रेस की सरकार बनी है तब से ही भाजपा इस सरकार को अब गिरी की कब गिरी सरकार निरूपित करती आ रही है लेकिन भाजपा हाईकमान इस तरह की बयानबाजी की पक्ष में नहीं था और कम से कम 1 साल तो वह मध्य प्रदेश सरकार को पूरा मौका देना चाह रही थी। इस बीच मध्य प्रदेश के नेता बार-बार पार्टी हाईकमान को यह संदेश दे रहे थे कि मध्यप्रदेश में विधायक भाजपा की सरकार बनाना चाहते हैं।

सरकार के लिए जरूरी विधायकों की संख्या दिल्ली में जुटा भी ली लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पूरे घटनाक्रम का भंडाफोड़ कर दिया। ऐसे कुछ लोग दिग्विजय की राज्यसभा में जाने के मुद्दे से भी जुड़ रहे हैं क्योंकि सरकार के मुखिया को जो बात पता नहीं चली वह दिग्विजय सिंह को पता चल गई। कुछ लोगों का कहना है कि दिल्ली पहुंचे विधायकों में दिग्विजय समर्थक भी तीन विधायक थे जिन्होंने ही यह बात दिग्विजय सिंह को बता दी होगी।

बहरहाल जिन 10 विधायकों के दिल्ली होने की खबर थी जिनके मोबाइल बंद थे और जिनके बारे में कहा जा रहा था कि भाजपा ने इन्हें होटल में अपने कब्जे में रखा है उनमें से अधिकांश विधायक अब वापस आ चुके हैं और संपर्क में हैं। पार्टी के परिवार के सबसे पहले 6 विधायकों एदल सिंह कंसाना, संजीव कुशवाहा, राजेश शुक्ला, कमलेश जाटव, रणवीर जाटव और रामबाई को एयरपोर्ट से सीधे मुख्यमंत्री निवास ले जाया गया।

बाद में एक-एक करके और विधायकों के भी मिलने की खबरें आ गई लेकिन इस समूचे घटनाक्रम से कई प्रश्न खड़े हो रहे हैं जिसमें इस सियासी ड्रामे के पीछे कौन है, किसे फायदा हुआ और किसे नुकसान हुआ और अभी आगे क्या-क्या होना है क्योंकि तमाम प्रकार का महत्त्व देने के बाद भी जिस तरह से विधायक भाजपा नेताओं के संपर्क में आए और दिल्ली तक पहुंच गए उससे सरकार के लिए अब हमेशा संकट की स्थिति बनी रहेगी क्योंकि ऐसा आगे भी हो सकता है। हालांकि सत्ताधारी दल कांग्रेस भी यह दावा कर रहा है कि भाजपा के लगभग 15 विधायक उसके संपर्क में हैं।

विधानसभा सत्र के दौरान जिन दो विधायकों ने कांग्रेस का साथ दिया था वह अभी भी भाजपा से दूरी बनाए हुए हैं और बैठकों में नहीं आए। नेताओं के जिस तरह से बयान आ रहे हैं उससे अभी गुत्थी पूरी तरह सुलझी हुई दिखाई नहीं दे रही मसलन नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि होली कब है भाई। मतलब अभी आगे होली तक कुछ और होने वाला है। सरकार में मंत्री प्रदीप जायसवाल ने कहा कि जब तक कमलनाथ मुख्यमंत्री हैं अब तक वह सरकार में हैं।

भविष्य में यदि भाजपा की सरकार बनती है तो वे अपने क्षेत्र जिले के समर्थकों-कार्यकर्ताओं से चर्चा करके विकास के लिए आगे के लिए निर्णय ले सकते हैं। भाजपा के सभी बड़े नेता इस घटनाक्रम के बारे में इंकार कर चुके हैं और इसे कांग्रेस का अंदरूनी मामला बता रहे जबकि कांग्रेस नेता भाजपा नेताओं पर साजिश का और विधायकों को खरीद-फरोख्त का आरोप लगा रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव का कहना था कि सियासी घटनाक्रम की हमें जानकारी नहीं है। भाजपा खरीद-फरोख्त नहीं करती है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का कहना था कि कांग्रेस के विधायक खुद परेशान हैं। मामला उनके घर का है और आरोप हम पर लगा रहे हैं। कांग्रेस में इतने कोठे की मारामारी खुद में मची है और आरोप हम पर लगा रहे हैं। कैलाश विजयवर्गीय का कहना है कि कांग्रेस के अंदरूनी खींचतान का परिणाम कांग्रेस के विधायक कोई भी काम नहीं होने पर कारण खुद परेशान हैं।

मुख्यमंत्री कमलनाथ का कहना है कि मध्यप्रदेश में हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है। भाजपा नेता डर रहे हैं कि कहीं उनके घोटालों की जांच ना हो जाए इसलिए वह विधायकों की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि शिवराज सिंह चौहान 9 विधायकों को बेंगलुरु लेकर जाना चाहते थे लेकिन हम अपने विधायकों को ले आए हैं इसलिए अब शिवराज के स्टाफ में पदस्थ नीरज वशिष्ठ बेंगलुरु से वापस आ रहे हैं।

कुल मिलाकर नेताओं के बयान कुछ भी हों लेकिन जिस तरह की सियासी ड्रामा हुआ है उससे मध्यप्रदेश की राजनीति किस दिशा की ओर बढ़ चुकी है यह कहां तक जाएगी और इसका अंजाम क्या होगा यह आने वाला समय बताएगा। फिलहाल तो यह भाजपा की प्रीमेच्योर डिलेवरी मानी जा रही है और आगे पता चलेगा कर्नाटक की तरह मध्यप्रदेश में शुरू हुआ ऑपरेशन लोटस फेल होता है या फिर सफल।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares