उपचुनाव चूक का नतीजा जानते हैं दोनों दल

दरअसल, जब बहुमत का आंकड़ा किसी भी सरकार के लिए तलवार की धार पर चलने जैसा हो और विधायकों को दलबदल का चस्का लग गया हो तब मजबूत बहुमत की दरकार सरकार को हमेशा रहती है और भाजपा सरकार इन 24 सीटों में से अधिकांश सीटें जीतकर सरकार स्थायित्व देना चाहती है।

इसके लिए मंत्रिमंडल गठन को भी इतना लंबा समय दिया गया जितना आज तक ही शायद किसी सरकार ने दिया हो। एक-एक विधायक पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा और संगठन महामंत्री सुहास भगत के साथ कई दौर की चर्चा कर चुके हैं। संघ पदाधिकारियों से भी विचार विमर्श हो चुका है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर के साथ भी चर्चा हो चुकी है लेकिन इसके बाद भी अभी तक मंत्रिमंडल गठन की तारीख नहीं हो पा रही, क्योंकि मंत्रिमंडल गठन पार्टी किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लेना चाहती है।

बहरहाल, गुरुवार को सिंधिया समर्थक पूर्व विधायकों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की और इस मुलाकात के माध्यम से क्षेत्र की समस्याओं से किसानों की समस्याओं से अवगत कराया एवं मंत्रिमंडल के गठन को लेकर भी चर्चा हुई। सिंधिया समर्थक पूर्व विधायक जिनका मंत्री बनाया जाना पार्टी में शामिल होने के पूर्व ही तय हो गया था उनमें से केवल गोविंद राजपूत और तुलसी सिलावट ही मंत्री बन पाए हैं। बागी अभी इंतजार कर रहे हैं जबकि अब चुनाव की घोषणा कभी भी हो सकती है। ऐसे में यह पूर्व विधायक बेसब्र नजर आने लगे हैं। वैसे तो सभी 22 पूर्व विधायकों का एक साथ मिलना तय था लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग और एक-एक करके समस्याओं को सुनाने और उनका निदान करने के कारण अलग-अलग मिलना तय हुआ।

कुछ विधायकों ने मुलाकात कर ली है। बाकी विधायक एक-दो दिन में मिलेंगे। अन्य नेताओं का भी मुख्यमंत्री से मिलना हो रहा है। खासकर उन सीटों के नेता जहां पर उपचुनाव होना है। पूर्व मंत्री गौरीशंकर शेजवार की मुलाकात सांची विधानसभा के उपचुनाव से जोड़कर देखी जा रही है। 2018 के विधानसभा चुनाव में शेजवार के बेटे मुदित शेजवार से प्रभु राम चौधरी का मुकाबला हुआ था। अब प्रभु राम चौधरी भाजपा प्रत्याशी होंगे। ऐसे में शेजवार की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रभु राम चौधरी ने पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटवा से भी मुलाकात की।

उधर गुरुवार की सुबह सुबह दिग्विजय सिंह की फेसबुक पर की गई अपील चर्चा का विषय रही जिसमें उन्होंने 22 सीटों पर उप चुनाव के दौरान पहले बागियों को हराने की अपील की बाद में कांग्रेस से बदला लेने को कहा। उनका कहना था कि 22 विधायकों को हराना देश के लोकतंत्र के लिए जरूरी है क्योंकि अगर यह जीत गए तो यह परंपरा हर पार्टी में चल पड़ेगी।

कुल मिलाकर प्रदेश के दोनों ही प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस में 24 सीटों के उपचुनाव को लेकर हर हाल में जीतने की रणनीति बनाई जा रही है। भाजपा जहां बूथ स्तर पर जमावट और कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं को लेकर सहमति बनाने पर जोर दे रही है। वहीं कांग्रेस पार्टी का पूरा जोर बेहतर प्रत्याशियों की तलाश में है। इसके लिए वह ऐसे प्रत्याशियों की तलाश कर रही है जिनके मैदान में उतरने से ना केवल कांग्रेसियों को एकता के सूत्र में पिरोया जा सके। वरन पार्टी की छवि आम जनता के बीच साफ-सुथरे ढंग से प्रस्तुत भी हो। इसके लिए समाजसेवियों स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों पर भी विचार हो रहा है।

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