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उपचुनाव की मथनी, मंत्रिमंडल का विष और ‘शिव’

बुधवार को मध्यप्रदेश में बतौर प्रभारी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के पदभार संभालने के साथ ही एक बार फिर सियासत के पारे ने उछाल मारा.इस बार उपचुनाव को केंद्र में रखकर हो रही सियासत के मंथन से एक और जहां लंबे अंतराल के बाद भाजपा सरकार जिस अमृत रूपी मंत्रिमंडल का विस्तार गुरुवार को करने जा रही उस अमृत का उपयोग भाजपा आगामी 24 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में सरकार को स्थायित्व दिलाने के लिए करेगी तो इस मंत्रिमंडल विस्तार से भाजपा के अंदरखाने जो विष यानी विस्फोट उत्पन्न होगा उसका पान शिवराज सिंह चौहान के हिस्से आएगा।

इसका आशय स्पष्ठ है कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जो मंत्री पद के दावेदार नेताओं के द्वारा दबाव,तनाव और टकराव के हालात बन रहे थे उस डैमेज को कहीं न कहीं वरिष्ठ नेतृत्व और मुख्यमंत्री ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ और चपलता से काफी हद तक कंट्रोल कर लिया है तभी उन्होंने गुरुवार को समुद्र मंथन से जोड़कर मंत्रिमंडल विस्तार की बात कहते हुए इशारों इशारों में कहा कि मंथन से निकलने वाले विष को ‘शिव’ पी जाते हैं.मुख्यमंत्री के सीमित शब्दों में उनके और भाजपा के उन विरोधियों(जो मंत्रीमंडल विस्तार से भाजपा की फूट का इंतजार कर रहे थे) को साफ सन्देश है कि जब तक भाजपा और शिवराज है तब तक सब मुमकिन है और गुरुवार को होने जा रहे विस्तार में ऐसा कोई शॉट नहीं खेला जाएगा जिससे विरोधियों को कैच लेने का भी मौका मिले।

वैसे प्रदेश सहित देश के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा हो रहा होगा कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सरकार से ज्यादा विपक्ष उत्साहित है और किसी सरकार को बने 100 दिन होने के बाद सरकार के मंत्रीमंडल का विस्तार होगा और अन्य विधायक मंत्री बनेंगे.पहले कोरोना के कारण और फिर राज्यसभा चुनाव की उठापटक के बीच मंत्रिमंडल विस्तार को तारीख पर तारीख के बाद आखिर वो तारीख भी मिल ही गई जब इसे अमलीजामा पहनाया जाना है.भाजपा के 100 दिन पूरे होने पर कांग्रेस ने भाजपा सरकार घेरने काला दिवस मनाकर सोशल मीडिया पर जिन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था उनमें मंत्रिमंडल विस्तार भी एक था.कांग्रेस इसलिए बार बार मंत्रीमंडल के विस्तार को लेकर उत्साह दिखा रही है क्योंकि उसे ये उम्मीद है कि शायद विस्तार से भाजपा के भीतर कलह हो और उसे बागी कुछ बागी भाजपाई अस्त्र शस्त्र रूप में मिल जायें जिनके सहारे उपचुनाव में कांग्रेस की डूबती नैया पार लग जाए।

गुंजाइश बहुत पर किस किसको मौका..
बुधवार को यूपी की राज्यपाल और मध्यप्रदेश की प्रभारी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भोपाल ने पहुंचकर अपना विधिवत कामकाज संभाल लिया तो अब साफ है कि गुरुवार को मंत्रिमंडल विस्तार होगा.इस विस्तार को लेकर भाजपा के भीतर चल रही उठापटक को पूर्णविराम देने प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे भी दिल्ली से चिंतन मंथन कर भोपाल पहुंच चुके हैं और विस्तार को लेकर सभी प्रमुख नेताओं से उनकी चर्चा हो रही है.पिछले तीन दिन से दिल्ली दरबार में डेरा जमाकर मुख्यमंत्री जब मंगलवार को वापस लौटे तो सियासी चर्चाओं का बाज़ार इस बात को लेकर गर्म रहा कि अब मंत्रिमंडल विस्तार फिर ज्यादा दिनों तक टाल दिया जाएगा पर केंद्रीय नेतृत्व की हरी झंडी मिलते ही दो दिन में ही इस विस्तार को अंतिम रूप मिल गया और गुरुवार को पांच मंत्रियों सहित 6 लोगों की सरकार में कितने नाम और जोड़े जाते हैं ये फिलहाल बंद लिफाफे में हैं और वो लिफाफा प्रदेश प्रभारी के हाथों में है.यहां बताते चलें कि 230 सदस्यीय विधानसभा में 15 फीसदी सदस्य मंत्रिमंडल का हिस्सा बनाए जा सकते हैं मुख्यमंत्री सहित 6 सदस्य फिलहाल पदासीन हैं तो लगभग 28 नए सदस्यों को मंत्री बनाया जा सकता है.अब देखना ये है कि गुरुवार को होने वाले विस्तार में सिंधिया गुट के कौन कौन निवर्तमान विधायकों को उनकी शहादत का पारितोषक मिलता है और भाजपा के किन कद्दावर नेताओं को उनके कद के अनुसार जगह।

-जातीय,क्षेत्रीय,वरिष्ठता अहम या उपचुनाव
लंबी उठापटक के बाद कोरोना संक्रमण के समय मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार बनी.मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद शुरुआती दौर में शिवराज सिंह चौहान ही वन मैन आर्मी ऑफ मध्यप्रदेश रहे पर बाद में विपक्ष के तानों के चलते जिम्मेदारियों का विभाजन करने 5 सदस्यों का मंत्रिमंडल विस्तार किया गया और पांचों मंत्रियों में विभागों का बंटवारा न कर प्रदेश के संभागों का प्रभारी बना दिया गया.इस समय भाजपा ने पांच सदस्यीय मंत्रीमंडल में जातीय, क्षेत्रीय और सिंधिया समर्थित बागियों में सटीक संतुलन बैठाने का काम किया. ग्वालियर चंबल अंचल से दिग्गज नेता डॉ नरोत्तम मिश्रा और सिंधिया गुट से जहां बुन्देखण्ड अंचल से गोविंद सिंह राजपूत (सामान्य), मालवा से तुलसीराम सिलावट (अजा), भाजपा के कमल पटेल (ओबीसी) और मीना सिंह (एसटी) को मंत्री बनाया हालांकि यहां वरिष्ठता को ज्यादा महत्व नहीं दिया गया. तो क्या गुरुवार को होने वाले विस्तार में भी कुछ ऐसा ही संतुलन देखने मिलेगा या फिर इससे उलट कुछ नया नज़ारा होगा.मंत्रिमंडल विस्तार में सरकार अधिकतम कितने चेहरों को मंत्री पद से नवाज़ने जा रही उनके नामों को लेकर सिर्फ कयास ही लगाए जा सकते हैं पर मंत्रिमंडल विस्तार में जहां भाजपा के लिए जातीय,क्षेत्रीय और वरिष्ठता के आधार पर उसके दल के दिग्गज नेताओं को शामिल करना जरूरी होगा तो सिंधिया समर्थकों को उनकी पूर्व शर्तानुसार स्थान देने की मजबूरी की झलक भी दिखाई देगी।

शिवराज की सूची को केंद्रीय नेतृत्व ने एक दिन अपने पास रखकर उसमें जो भी फेरबदल किया हो पर मंत्रीमंडल विस्तार से ठीक पहले शिवराज का एक दर्द भरी शायरी वाला ट्वीट और बाद में बिष शिव पी जाते हैं वाला बयान कई ऐसे सवाल छोड़ता है जिनके जवाब स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के पास हैं.यहां बस इतना ही कहा जा सकता है कि सिंधिया की एंट्री और उपचुनाव की दूरदर्शिता के चलते शायद इस बार अपने चहेतों के लिए शिवराज वो नहीं कर पा रहे हैं जो पूर्व में मुख्यमंत्री रहते कर गए. वरिष्ठता और जातीय गणित की बात करें तो भाजपा में पूर्व मंत्रियों की लंबी फेहरिस्त है उसमें नेता प्रतिपक्ष रह चुके पंडित गोपाल भार्गव,सीतासरण शर्मा,स्पीकर पद के लिए भाजपा के उम्मीदवार रह चुके कुंवर विजय शाह,भूपेंद्र सिंह,यशोधरा राजे सिंधिया,गौरीशंकर बिसेन,राजेन्द्र शुक्ला,पारस जैन,अजय विश्नोई, संजय पाठक प्रमुख हैं।

इसके अलावा जिनकी चर्चा सुर्खियों में है उनमें सुरेंद्र पटवा,करण सिंह बर्मा,जगदीश देवड़ा,हरिशंकर खटीक,प्रेमसिंह पटेल, अरविंद भदौरिया, रामेश्वर शर्मा, उषा ठाकुर, देवी सिंह सैय्याम, नंदनी मरावी, रामकिशोर कांवरे के नाम शामिल हैं. इधर दो बसपा विधायक रमाबाई, संजीव सिंह कुशवाहा और सपा विधायक राजेश शुक्ला, निर्दलीय विधायक जायसवाल का भी नाम चर्चाओं में हैं. इधर अभी सिंधिया गुट के 20 बागियों में से एंदल सिंह कंसाना, बिसाहुलाल सिंह, प्रदुम्न सिंह तोमर, इमरती देवी, महेंद्र सिंह सिसोदिया, प्रभुराम चौधरी, राज्यवर्धन सिंह, हरदीपसिंह डंग प्रमुख नाम हैं जिन पर भाजपा भविष्य के दांव लगाने वाली है तो क्या उपचुनाव को फोकस कर इन सभी को मंत्री पद दिया जाएगा या फिर कुछ खास नाम पर ही मुहर लगेगी. इनके अलावा कुछ और नाम भी सामने आ रहें हैं जिनमें गिरीश गौतम, रामखिलावन पटेल,यशपाल सिसौदिया, रामकिशोर कांवरे, विष्णु खत्री,रणवीर जाटव शामिल हैं. विधानसभा अध्यक्ष को लेकर भी भाजपा में रार है।

कोई असंतुष्ट नहीं,सूची कल बताई जाएगी
भाजपा प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे दिल्ली से जैसे ही भोपाल पहुंचे तो उम्मीदों का सेहरा बांधे नेताओं को सूची जारी होने की आस रही पर प्रदेश प्रभारी ने साफ कर दिया कि सूची कल ही जारी की जाएगी.उन्होंने मुख्यमंत्री के विषपान वाले बयान पर भी खुलकर चर्चा की और कहा कि कहीं कोई असंतुष्ट नहीं है सबको एडजस्ट किया जाएगा कोई कठिनाई नहीं,सब ठीक होगा.अब प्रदेश प्रभारी के बयान से इतना तो साफ हो गया कि सी भाजपा के नेता जितने आत्मविश्वास से डैमेज कंट्रोल करने की बात कर रहे उसका सीधा और सपाट मतलब है कि अब भाजपा सिंधिया खेमे और पुराने भजपाइयों में तालमेल बैठाने में सफल होती दिखाई दे रही है।

हालांकि सूची कल जारी की जाएगी और प्रदेश प्रभारी असंतुष्ट विधायकों,नाराज नेताओं,संभावित मंत्रियों से वन टू वन चर्चा कर रहे हैं.कल ही मंत्रियों की शपथ होगी.भाजपा सरकार बनने के बाद जो बड़े मसले रहे उनमें राज्यसभा चुनाव पहले ही संम्पन्न हो गया और मंत्रिमंडल की बहस पर गुरुवार को विराम लग जाएगा अब जिसके लिए विपक्ष और सत्तासीन दल जद्दोजहद कर रहे हैं वो है 24 सीटों का उपचुनाव उसमें अभी कई गिरह बाकी हैं.इधर मंत्रिमंडल मंथन में खुद के लिए अमृत खोज रही कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शिवराज के बयान पर चुटकी लेकर कहा कि मंथन करते करते ज्यादा समय हो गया और अब विष ही विष निकलेगा अमृत निकलने की संभावना नहीं है. कमलनाथ ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भाजपा की रार साफ दिखाई देगी।

दो डिप्टी सीएम या फिर और कुछ…
भाजपा के अंदरखाने से जो खबरें निकलकर सामने आ रहीं हैं उसमें सबसे पहले प्रदेश में इस बार मुख्यमंत्री के अलावा दो उपमुख्यमंत्री बैठाने का भाजपा का प्लान है.जिन दो चेहरों को डिप्टी सीएम बनाने की सरगर्मियां जोरों पर हैं उनमें भाजपा के संकटमोचक डॉ नरोत्तम मिश्रा और सिंधिया खेमे के तुलसी सिलावट का नाम सामने है.इसके बाद दूसरी जो बड़ी बात सामने है उसमें भाजपा ने असंतुष्ट विधायकों को निगम मण्डलों में एडजस्ट करने की बात कह उनको मनाने में फिलहाल सफलता पा ली है और इसीलिए मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भाजपा का हर नेता संतुष्ट नज़र आ रहा और पार्टी एकजुटता की बात बार बार दोहरा रहा है।

इस तरह मध्यप्रदेश के इतिहास में गुरुवार का दिन सियासी तौर पर बहुत ही खास होने वाला है क्योंकि जहां मूल समर्पित,संकल्पित भाजपा के नेता मंत्री बनेंगे वहीं उन बागियों को भी मंत्री बनाया जाएगा जिन्हें आगामी दिनों में फिर चुनाव लड़ने जनता के बीच जाकर अपना मंत्री पद सुरक्षित रखने चुनाव जीतना जरूरी होगा नहीं तो उनका हाल भी वैसा ही होगा जैसे कांग्रेस की सरकार का.गुरुवार को सुबह करीब 11 बजे मंत्रीमंडल शपथ ग्रहण के दौरान राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित भाजपा के अनेक दिग्गज मौजूद रहेंगे।

शपथ से पहले लगे बधाई पोस्टर..इधर जब मंत्रिमंडल को लेकर भाजपा के प्रदेश प्रभारी गोपनीयता बरत रहे हैं वहीं ग्वालियर अंचल के सिंधिया समर्थक प्रदुम्न सिंह तोमर के कैबिनेट मंत्री बनने की बधाई वाले पोस्टरों ने भाजपा की लाइन पर ही सवाल खड़ा कर दिया.एक दिन पूर्व ही बुधवार शाम शहर के चौराहों पर मंत्री बनने के बधाई पोस्टर प्रदुम्न के भाई ने ही लगाकर उन्हें बधाई दे डाली.इन पोस्टर ने एक नई बहस छेड़ दी है।

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