उप चुनावों का पॉलीटिकल एजेंडा सेट करेगा ‘चंबल प्रोग्रेस वे’ - Naya India
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उप चुनावों का पॉलीटिकल एजेंडा सेट करेगा ‘चंबल प्रोग्रेस वे’

मुख्यमंत्री शिवराज ने रविवार को दो ट्वीट कर ग्वालियर-चंबल की “प्रोग्रेस”लाइन बढ़ाने का काम किया तो उपचुनाव में भाजपा का आसान “वे” बनाने का खाका खींच दिया। शिवराज और महाराज की जुगलबंदी और चंबल क्षेत्र की 16 सीटों पर होने वाले उपचुनाव की गर्माहट के बीच एक बार फिर कांग्रेस पर नाकामी का दाग लगाकर भाजपा सरकार ने ‘चंबल एक्सप्रेस वे’ का जिन्न ‘चंबल प्रोग्रेस वे’ नाम से उस समय बाहर निकाला जब इस अंचल में दोनों दलों के बीच उपचुनाव की रस्साकशी चरम पर है।

कांग्रेस सरकार की लापरवाही के चलते इस ‘एक्सप्रेस वे’ जिन्न का चिराग अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास ही है.मुख्यमंत्री ने अपने ट्वीट में कहा कि इस प्रोजेक्ट का नाम ‘चंबल एक्सप्रेस वे’ की जगह ‘चंबल प्रोग्रेस वे’ होगा और इसके निर्माण से पूरे चंबल क्षेत्र के लोगों का आर्थिक विकास,क्षेत्रीय विकास और औधौगिक विकास होगा.कार्य जल्द शुरू किया जाएगा।

ग्वालियर अंचल की बदौलत चौथी पारी की शपथ लेते ही मुख्यमंत्री चौहान ने इस प्रोजेक्ट को रीओपन कर साफ कर दिया कि अब उनकी नज़र उनका विपरीत समय मे साथ निभाने वाले ग्वालियर-चंबल अंचल के विकास पर केंद्रित है और वे महाराज यानी ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ और सलाह से उस क्षेत्र के हर वो विकासोन्मुखी कार्य करेंगे जिनको कांग्रेस ने सत्ता में रहते नजरअंदाज किया है। महाराज का साथ निभाने का पहला संदेश इस प्रोजेक्ट की रीलॉन्चिंग से मुख्यमंत्री ने दिया.दूसरा संदेश ये भी दिया कि अब ग्वालियर चंबल अंचल में विकास की बात महाराज के विज़न को ध्यान में रखकर ही कि जाएगी. इस एक्सप्रेस वे के जल्द निर्माण की बात करते हुए मुख्यमंत्री चौहान ने कांग्रेस पर इस प्रोजेक्ट को लटकाने के भी आरोप लगाए और कहा कि शीघ्र राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी इसका भूमिपूजन करेंगे.
अटका रहा इस प्रोजेक्ट का काम तीन साल पहले 3 हज़ार 970 करोड़ की लागत से तैयार होने वाला ये राष्ट्रीय राजमार्ग भाजपा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल था।

भारत माला प्रोजेक्ट के तहत एनएचएआई को इसका निर्माण कराना है.इस महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी योजना”चंबल एक्सप्रेस वे”यानी वर्तमान “चंबल प्रोग्रेस वे”की बुनियाद राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने उस समय रखी थी जब वे फरवरी 2017 में व्यावरा में 61किमी टू-लेन मार्ग का लोकार्पण करने पहुंचे थे। इस राजमार्ग का विस्तार मुरैना से चंबल नदी के किनारे होते हुए श्योपुर तक और फिर राजस्थान सीमा में ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर में जोड़ा जाएगा.मुरैना से कोटा राजस्थान तक प्रस्तावित हाईवे की कुल लंबाई 283 किमी और 10 मीटर चौड़ाई होगी.पहले इसका प्रारूप भिंड जिले के अटेर से होते हुए तैयार किया गया था लेकिन बाद में करीब 62 किमी लंबाई घटाकर इसे मध्यप्रदेश मुरैना से राजस्थान कोटा तक किया गया और जमीन अधिग्रहण का कार्य मध्यप्रदेश सरकार को सौंपा गया.उस समय शुरुआत में तो सरकार ने तेजी दिखाई और फिर मामले ने थोड़ी शांति पकड़ ली।

प्रदेश में चुनाव हुए तो कांग्रेस की सरकार सत्तासीन हुई तो ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी इस प्रोजेक्ट को धरातल पर लाने भरसक प्रयास किये वे इसी मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से भी मिले वावजूद इसके घर के कुनबे में ही आपसी खींचतान में उलझी कांग्रेस और कमलनाथ ने इस दिशा में कोई सकारात्मक प्रयास नहीं किए। नवंबर 2019 में एक बार फिर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इस मामले को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष रखा और एक्सप्रेस वे का काम शुरू करने का आग्रह किया पर कांग्रेस की सरकार ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। समय बदला और भाजपा की सरकार बनाने ग्वालियर चंबल की महत्वपूर्ण भूमिका रही.शिवराज मुख्यमंत्री बने और ग्वालियर चंबल अंचल में उपचुनाव की बिसात बिछाई जाने लगी.चौथी बार मुख्यमंत्री बने शिवराज ने क्षेत्र और जनता की नब्ज समझी और सही समय पर ‘चंबल प्रोग्रेस वे’ का काम अटकाने का ठीकरा कांग्रेस की कमलनाथ पर फोड़ा और नए सिरे से ‘चंबल प्रोग्रेस वे’ का रास्ता ख़ोल जनता के मन की बात कर दी।

मुरैना-श्योपुर के साथ भिंड भी जोड़ा जाए  इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की माने तो जब इस ‘चंबल प्रोग्रेस वे”की डीपीआर बनी थी तो भिंड जिले का 62 किमी एरिया इस प्रोजेक्ट के हिस्सा था लेकिन बाद में इसे डीपीआर से हटा दिया गया.इससे अब इस हाइवे के लाभ से भिंड क्षेत्र की जनता अछूती रह जाएगी.डीपीआर से भिंड जिले का भाग नहीं हटाया जाता तो एक्सप्रेस-वे बनने से अटेर क्षेत्र विकास की मुख्य धारा में आ जाता और स्थानीय लोगों को रोजगार,पर्यटन के साथ लघु उद्योग भी मिलने की संभावनायें थीं। इस राजमार्ग का निर्माण होने के बाद राजस्थान के सवाई माधौपुर से चलने वाला हैवी ट्रैफिक श्योपुर, सबलगढ़, कैलारस,जौरा होते हुए मुरैना पहुंचेगा.हाइवे बनने के बाद ग्वालियर-चंबल अंचल में उद्योग लगाने वाले इन्वेस्टर्स आसानी से पहुंचेगे और इसका लाभ यहां की जनता को मिलेगा.इस राजमार्ग किनारे सैकड़ा भर गांव भी आएंगे जिनको विकास की मुख्य धारा से जोड़ा जा सकेगा। चंबल एक्सप्रेस-वे बनने के बाद निवेशकों को कोटा से लेकर मुरैना तक बेहतर सड़क मार्ग उपलब्ध होगा.इस हाइवे निर्माण में 195 किमी मध्यप्रदेश सीमा क्षेत्र होगा बाकी 95 किमी राजस्थान सीमा क्षेत्र होगा.हालांकि भिंड क्षेत्र की जनता को अभी भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से उम्मीद है कि जो हिस्सा डीपीआर से काटा गया उसे जोड़ दिया जाए।

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