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मुश्किल दौर में कांग्रेस का अनुभवी नेतृत्व पर भरोसा

भोपाल। इस समय कांग्रेस सबसे मुश्किल दौर में गुजर रही है और इस दौर से बाहर निकलने के लिए पार्टी का अनुभवी नेतृत्व पर भरोसा है 80 वर्षीय मलिकार्जुन खडगे ने राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद ग्रहण कर लिया है। प्रदेश प्रभारी जे.पी. अग्रवाल भी 80 वर्ष से ज्यादा के हैं और प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ एवं उनके सहयोगी पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी 75 पार के हैं प्रदेश में मिशन 2023 फतेह करने के लिए यह अनुभवी नेतृत्व कांग्रेस की कसौटी पर भी है।

इस समय कांग्रेस सबसे मुश्किल दौर में गुजर रही है और इस दौर से बाहर निकलने के लिए पार्टी का अनुभवी नेतृत्व पर भरोसा है। 80 वर्षीय मलिकार्जुन खडगे ने राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद ग्रहण कर लिया है। प्रदेश प्रभारी जेपी अग्रवाल भी 80 वर्ष से ज्यादा के हैं और प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ एवं उनके सहयोगी पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी 75 के हैं। प्रदेश में मिशन 2023 फतेह करने के लिए यह अनुभवी नेतृत्व कांग्रेस की कसौटी पर भी है।

दरअसल, राजनीति में अनुभव का अपना महत्व है। कई बार सामान्य जीवन में भी जब अति उत्साह में युवा वर्ग लड़खड़ा जाता है तब बुजुर्ग सही रास्ता बताता है लेकिन वक्त के साथ बहुत कुछ परिवर्तित हुआ है और राजनीति में युवा नेतृत्व को आगे लाने की प्रक्रिया चल रही है। खासकर सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी में लगातार युवा नेतृत्व को आगे करने की बातें की जा रही है लेकिन अनेक अवसरों पर अनुभवी नेतृत्व पार्टी के काम आ रहा है। प्रदेश में ही चार बार से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुभव का लाभ पार्टी पिछले 18 वर्षों से ले रही है।

बहरहाल, प्रदेश में कांग्रेस का अनुभव यही रहा है कि उसने 2018 के विधानसभा चुनाव के पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया की बजाय कमलनाथ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया और सरकार बनने की स्थिति में फिर कमलनाथ को ही मुख्यमंत्री बनाया क्योंकि कमलनाथ में अपने अनुभव से सभी पार्टी नेताओं को ना केवल जोड़ा वरन 15 वर्षों की भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर भी किया। शायद एक बार फिर कांग्रेस पार्टी का भरोसा कमलनाथ पर है। यही नहीं युवा प्रदेश प्रभारी मुकुल वासनिक की जगह लगभग 80 वर्षीय जयप्रकाश अग्रवाल को प्रदेश प्रभारी बनाया गया है। और जिस तरह से अग्रवाल सक्रिय हैं और स्थानीय स्तर पर फीडबैक ले रहे हैं। उससे कांग्रेस की यह अनुभवी टीम भाजपा के संसाधनों और भारी-भरकम दमखम वाली टीम से ना केवल मुकाबला कर रही है वरन 2023 में एक बार फिर सरकार बनाने का दावा कर रही है।

प्रदेश में काग्रेस की सरकार कब और कैसे बनी उसके अनुभव के आधार पर तैयारी चल रही है। मसलन 24 साल पहले 1998 मैं दिग्विजय सरकार दूसरी बार कैसी बनी है। इसमें एक महत्वपूर्ण बात वर्तमान अनुभवी टीम ने पकड़ी है, वह है पंचायती राज के जनप्रतिनिधियों को सक्रिय करके उनमें से जो बेहतर प्रदर्शन करेगा उसे विधानसभा का चुनाव लड़ाया जाएगा। उसके लिए पार्टी शीघ्र ही जनपद सदस्य जिला पंचायत सदस्य जनपद अध्यक्ष जिला पंचायत अध्यक्ष का सम्मेलन बनाने जा रही है। पंचायत प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष डीपी धाकड़ को इसका प्रभारी बनाया गया है। इस सम्मेलन इस सम्मेलन में पंचायत जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया जाएगा कि वह किस तरह से विधानसभा स्तर पर तैयारी करें। बताते चलें कि प्रदेश में 10 जिला पंचायत 65 जनपद पंचायतों में कांग्रेस के अध्यक्ष काबिल है और लगभग 285 सदस्य कांग्रेसी समर्थक जीते हैं 1998 में भी इस तरह का प्रयोग पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने किया था और उस में बहुत कुछ सफलता भी मिली थी। हालांकि जिस तरह से भाजपा के विधायक और मंत्री पावरफुल हो गए हैं और 2018 से सबक लेते हुए भाजपा सतर्क और सावधान है उसके चलते कांग्रेश का यह प्रयोग आसानी से सफल नहीं हो सकता इसके लिए बूथ की मजबूती और साधनों का होना भी जरूरी है।

कुल मिलाकर भाजपा की राजनीति में भले ही युवा नेतृत्व को उभारने का दौर चल रहा हो लेकिन मुश्किल दौर में भी कांग्रेस का भरोसा बुजुर्ग अनुभवी नेतृत्व पर है और 2023 के विधानसभा चुनाव में यह नेतृत्व कसौटी पर रहेगा।

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