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मध्य प्रदेश की दावेदारी में भी है दम

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भोपाल। कल से कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। जैसे-जैसे तारीख नजदीक आ रही है वैसे-वैसे दावेदारों की संख्या बढ़ती जा रही है। राजस्थान के अशोक गहलोत, केरल के शशि  थरूर, पंजाब के मनीष तिवारी के बाद मध्यप्रदेश से भी दिग्विजय सिंह, सुरेश पचौरी और यदि सहमत हुए कमलनाथ भी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हो सकते हैं। अन्य राज्यों की बजाय अब मध्यप्रदेश की दावेदारी मैं दम मानी जा रही है।

दरअसल राजनीति में अभी एेसा दौर चल रहा है जिसमें किसी पद के लिए जिस नाम की चर्चा ज्यादा हो जाती है वह पीछे रह जाता है और कोई नया नाम आगे आ जाता है। सत्तारूढ़ दल भाजपा के तमाम पदों पर पिछले कुछ वर्षों में हुए निर्णय इसी तरह के हैं लेकिन इस समय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर रोज नए नाम सामने आने लगे हैं। खासकर राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने से मना करने के बाद दावेदारों की संख्या बढ़ गई है। शुरुआत में ऐसा लग रहा था कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाएंगे लेकिन जब से राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ेगा यह बात आई है। गहलोत का उत्साह कम हुआ है अन्य दावेदार आगे बढ़ रहे हैं इनमें केरल से शशि थरूर का चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है। इसी तरह g-23 के नेताओं में से पंजाब के मनीष तिवारी ने भी दावेदारी ठोक दी है। तिवारी 24 सितंबर को दिल्ली पहुंच रहे हैं और अपने समर्थकों से चर्चा करने के बाद चुनाव लड़ने के बारे में  फैसला लेंगे।

पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया कल 24 सितंबर से 30 सितंबर तक चलेगी। 1 अक्टूबर को नॉमिनेशन की जांच की जाएगी और उसी दिन बैलिड कैंडिडेट की लिस्ट भी जारी कर दी जाएगी जबकि 8 अक्टूबर तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकते हैं और यदि एक से अधिक दावेदार मैदान में रहे तो 17 अक्टूबर को मतदान होगा। 19 अक्टूबर को मतगणना के बाद पता चल जाएगा कि पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा।

बहरहाल, कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए राजस्थान से अशोक गहलोत, केरल से शशि थरूर, पंजाब से मनीष तिवारी के बाद अब मध्यप्रदेश से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की दावेदारी सामने आ गई है। हालांकि दिग्विजय सिंह, राहुल गांधी को अध्यक्ष पद संभालने के लिए मनाते आ रहे हैं लेकिन एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मैं खुद को भी खारिज नहीं कर रहा हूं। आप मुझे बाहर क्यों रखना चाहते हो। हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है। 30 तारीख की शाम तक जवाब पता चल जाएगा उनसे पूछा गया था कि राहुल के अलावा अशोक गहलोत या शशि थरूर के नेतृत्व की भूमिका पसंद करेंगे। वैसे अशोक गहलोत, दिग्विजय सिंह की ही पसंद माने जाते हैं लेकिन जिस तरह से दिग्विजय सिंह ने बयान दिया है और दिल्ली पहुंच कर सोनिया गांधी से मुलाकात की है उसके बाद राजनीतिक हलकों में दिग्विजय सिंह का नाम भी मजबूत दावेदारों में माना जा रहा है। वैसे तो सबसे पहले मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम सामने आया था और यदि कमलनाथ समय सहमति दे देते तो शायद अब तक उनका नाम फाइनल हो जाता लेकिन कमलनाथ ने तब मध्य प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहने की बात कही थी लेकिन अब जिस तरह से दावेदार बढ़ रहे हैं उसमें एक बार फिर कमलनाथ के नाम की चर्चा होने लगी है। इसी तरह पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी कि सोनिया गांधी से मुलाकात होने के बाद यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि वफादारी के मापदंड पर गांधी परिवार में सुरेश पचौरी हमेशा कसौटी पर खरे उतरे हैं और हो सकता है पार्टी सुरेश पचौरी के नाम पर मोहर लगा दे।

कुल मिलाकर कांग्रेस की राजनीति में मध्य प्रदेश के नेताओं की हमेशा से दमदार उपस्थिति रही है। शंकर दयाल शर्मा, विद्याचरण शुक्ल, अर्जुन सिंह, मोतीलाल वोरा, श्यामाचरण शुक्ला, माधवराव सिंधिया तक एक से बढ़कर एक नाम थे। अभी वर्तमान में भी कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और सुरेश पचौरी ऐसे नाम है जो न केवल पार्टी हाईकमान के निकट माने जाते हैं वरन पूरे देश में भी पहचाने जाते हैं। यही कारण है कि एक बार फिर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए मध्य प्रदेश की दावेदारी दमदार मानी जा रहे हैं।

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