उपचुनाव दम दारो पर दांव लगाएगी कांग्रेस

प्रदेश में 24 विधानसभा क्षेत्रों में जो उपचुनाव होना है उसमें जीत हासिल करने के लिए दोनों ही दल जमावट करने लगे हैं क्योंकि इन सीटों की जीत भविष्य की सरकार तय करेगी। यदि भाजपा 10 सीटें भी जीत लेती है तो वह स्थाई सरकार की ओर बढ़ेगी और यदि कांग्रेस 15 सीटें जीती है तो फिर वह निर्दलीय बसपा और सपा के सहयोग से सरकार बनाने का दावा ठोकेगी।

दरअसल उपचुनाव सत्ताधारी दल के लिए जीतना आसान हो जाता है जब तक कि सत्ता विरोधी माहौल ना बन जाए।जैसा कि पिछले 15 वर्षों में अधिकांश उपचुनाव तत्कालीन सत्ताधारी दल भाजपा ने जीते लेकिन आखरी वर्ष में हुए उपचुनाव कांग्रेस में जीते क्योंकि तब तक प्रदेश में एंटी इनकबेंसी पनपने लगी थी। यही कारण था अटेर, चित्रकूट, मुंगावली और कोलारस विधानसभा के उपचुनाव कांग्रेस ने जीते और इसी जीत की खुशी में कार्यकर्ताओं में उत्साह आया और 2018 में प्रदेश में कांग्रेसी सरकार बनाने में सफल हो गई। क्योंकि भाजपा की सरकार को बने अभी कुछ ही दिन हुए हैं इसलिए चुनाव जिताने लायक एंटी इनकंबेंसी की उम्मीद नहीं की जा सकती।

लेकिन सत्ताधारी दल के मुकाबले के लिए कांग्रेस दमदार उम्मीदवारों की तलाश कर रही है जिससे कार्यकर्ताओं में उत्साह आ जाए। धनबल और बाहुबल में भी कांग्रेस कार्यकर्ता कमजोर न पड़े। इसी रणनीति के तहत कांग्रेस ने लगभग एक दर्जन सीटों पर दमदार उम्मीदवारों की तलाश तेज कर दी है। अभी तक प्रदेश कांग्रेस 5 दिग्गज नेताओं के नाम उपचुनाव के लिए छांट चुकी है और यदि पार्टी हाईकमान ने सहमति दे दी तो फिर अजय सिंह, अरुण यादव, मीनाक्षी नटराजन, प्रेमचंद गुड्डू प्रमुख रूप से शामिल हैं। कुछ सीटों पर भाजपा नेताओं को टिकट देकर भी पार्टी मैदान में उतार सकती है।

बहरहाल प्रतिशोध की ज्वाला में जल रही कांग्रेस उपचुनाव को लेकर पहली बार गंभीरता से तैयारियां कर रही है। कांग्रेस के निशाने पर पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक विधायक हैं। गुना, शिवपुरी लोकसभा सीट यादव बाहुल्य सीटें और यादवों की एकजुटता के. पी. यादव को सिंधिया के मुकाबले लोकसभा चुनाव जितवा दिया। इसी रणनीति के तहत अब पार्टी कांग्रेस में बड़े यादव चेहरे के रूप में पहचाने जाने वाले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव को क्षेत्र की मुंगावली या किसी अन्य सीट से चुनाव मैदान में उतार सकती है क्योंकि अब सिंधिया और के. पी. यादव भाजपा में है। इसलिए इस क्षेत्र में भाजपा की मजबूत स्थिति मानी जा रही है।

इसी कारण अरुण यादव पर दांव लगाया जा सकता है। पिछले विधानसभा चुनाव में अरुण यादव बुधनी विधानसभा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के खिलाफ मैदान में उतारा था। इसी तरह पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह को सुर्खी या बदनावर विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया जा सकता है। इन इलाकों में अजय सिंह समर्थक अच्छी खासी संख्या में पाए जाते हैं। अजय सिंह भी कहीं से भी चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं।

एक समय में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय सुंदरलाल पटवा के खिलाफ भोजपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं। इसी तरह सुवासरा सीट पर पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को उतारा जा सकता है जो कि कभी अपने ही समर्थक रहे अब भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने जा रहे हरदीप सिंह डंग को चुनौती देंगी। मीनाक्षी नटराजन राहुल गांधी की कोर टीम की सदस्य मानी जाती हंै। इसी तरह सांवेर विधानसभा सीट से पूर्व सांसद वर्तमान के भाजपा नेता प्रेमचंद गुड्डू को कांग्रेस में वापसी कराकर तुलसी सिलावट के खिलाफ प्रत्याशी बनाया जा सकता है जिस तरह से प्रेमचंद गुड्डू के बेटे अजीत बोरासी सिंधिया के खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणी कर रहे हैं उसको लेकर भाजपा ने प्रेमचंद गुड्डू को कारण बताओ नोटिस दे दिया है सूत्रों की माने तो प्रेमचंद गुड्डू ने सांवेर में चुनावी जमावट ही शुरू कर दी है हालांकि उन्होंने कहा है कि अभी तक मुझे भाजपा से कोई नोटिस नहीं मिला है जब नोटिस मिलेगा तब उसका जवाब दूंगा और मीडिया को भी अवगत कराऊंगा।

कुल मिलाकर सत्ताधारी दल भाजपा से कड़ा मुकाबला करने के लिए विपक्षी दल कांग्रेस दमदार प्रत्याशियों पर दांव लगाने की रणनीति बनाई है और पार्टी हाईकमान ने यदि अनुमति दे दी तो फिर 24 सीटों पर रोचक मुकाबले देखने को मिलेंगे। कांग्रेस की तैयारियों से भाजपा भी सतर्क है और संगठन स्तर पर तैयारियां चल रही हैं अधिकांश सीटों पर भाजपा बागी कांग्रेस विधायकों को ही मैदान में उतारेगी।

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