लॉकडाउन है एक जरूरी उपाय

डॉ रामेश्वर मिश्र: वर्तमान समय में लॉक डाउन का प्रसंग कोविड-19 जो एक प्रकार का कोरोना वायरस है के चलते फैली वैश्विक महामारी को देखते हुए बहुत ही मत्वपूर्ण है। लॉक डाउन हमारे जीवन को सुरक्षित करने एवं सम्मूर्ण समाज को सुरक्षित करने का सरल माध्यम है। लॉक डाउन क्या है और वर्तमान समय में इसकी प्रयोज्यता एवं प्रयोजन क्या है जैसे अनेक विचार प्रतिस्फुटित होना स्वाभाविक है। सीधे शब्दों में लॉकडाउन का अर्थ है तालाबंदी। जिस तरह किसी संस्थान या फैक्ट्री को बंद किया जाता है और वहां तालाबंदी हो जाती है उसी तरह लॉक डाउन का अर्थ है कि आप अनावश्यक कार्य के लिए घर से बाहर सड़कों पर ना निकलें। दु

निया में सबसे पहला लॉक डाउन अमेरिका में 9/11 हमले के बाद किया गया था, यह एक एमरजेंसी व्यवस्था है। कोरोना वायरस के  चलते लॉक डाउन के सही समय पर और सफल कार्यान्वन के आभाव में पश्चिमी देशों का जो वीभत्स रूप दिखा वह काफी डरावना रहा है और पूरा विश्व आज इस समस्या के प्रति विवस है क्योंकि कोरोना वायरस की अभी तक कोई वैक्सीन सामने नही आई है।

ऐसे में प्रधानमंत्री द्वारा लॉक डाउन से पहले जनता कर्फ्यू का आवाहन भारतीय जनमानस के लिए भारतीय जनमानस द्वारा किया गया सफलतम सहयोग था। 22 मार्च की वीरान सड़कें, बाजार, रेलवे स्टेशन और हर स्थानों पर पसरा सन्नाटा देखकर यह विश्वास हो गया था कि हम अपने नैतिक दायित्यों के प्रति कितने सजग हैं तथा अपने परिवार की सुरक्षा के साथ-साथ समाज की सुरक्षा के प्रति कितने दृढ संकल्प हैं लेकिन उसी दिन शाम को 05 बजकर 05 मिनट पर कर्मवीर योद्धाओं डॉक्टर, प्रशासन, सफाई कर्मियों, सैनिकों और मीडिया साथियों के प्रति अपना आभार व्यक्त करने के दौरान कई स्थानों पर लोगों के समूह सड़कों पर उतर आए और एक दूसरे से गले मिलने लगे जिससे कई स्थानों पर यह एक जुलूस का रूप हो गया।

पीलीभीत के डीएम वैभव श्रीवास्त और एसपी अभिषेक दीक्षित खुद भीड़ का नेतृत्व करते दिखे। इन सब घटनाओं का तथ्यात्मक अवलोकन करने पर स्पष्ट होता है कि हम अभी भी लॉक डाउन की उपयोगिता और गंभीरता को नही समझ रहे हैं न ही वैश्विक महामारी के प्रति सचेत हैं।

इन सब कार्यों और हमारे व्यवहारों से 23 मार्च को गुलजार सड़कें, बाजारों में बढ़ी हुई भीड़ ने यह प्रदर्शित कर दिया कि हम न तो इस समस्या के प्रति गंभीर हैं और न ही अपने प्रधानमंत्री के सम्मान के प्रति, न ही इस समस्या से लड़ने वाले कर्मवीरों के प्रति। उन कर्तव्यनिष्ठ सेवकों के लगातार निवेदन और मार्गदर्शन के बाद भी हम अपने वर्ताव से संक्रमण के प्रति लापरवाह बने हुए हैं, जहाँ डॉक्टर नरेश त्रेहान, डॉक्टर राजेश पारिख जैसे कई चिकित्साविदों द्वारा मीडिया के माध्यम से यह सलाह दी जा रही है कि प्रत्येक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से लगभग 2 फीट की दूरी बनाकर रखे जिसको नजर अंदाज करते हुए कहीं कहीं तो 2 फीट की ही जगह में ही एक साथ 10 से 12 लोग यात्रा करते देखे गए।

यही हाल सब्जी बाजारों का भी रहा जहाँ भारी संख्या में लोग भीड़ का हिस्सा बनकर खरीदारी करते रहे। इन सब कार्यों से आहत होकर प्रधानमंत्री जी ने पुनः देश की जनता से ट्वीट के माध्यम से अपील की कि “आप अपने परिवार की एवं अपनी सुरक्षा स्वयं करें तथा कुछ लोग अभी भी लॉक डाउन की गंभीरता को नही समझ रहे हैं। यदि आप को लगता है कि आप को कुछ नही होगा और आप यूं ही घूमते-फिरते रहेंगे तो यह आपकी भूल है, कोई भी इस वायरस से संक्रमित हो सकता है तथा राज्य सरकारें नियमों और निर्देशों का कड़ाई से पालन करवाना सुनिश्चित करें”। यह हमारी लापरवाही का ही फल है कि पूरे देश को पूर्णतया लॉक डाउन कर दिया गया जो एक तरह से कर्फ्यू ही है।

कई राज्यों ने अपनी सीमाएं सील कर ली और इसके साथ ही साथ कई राज्यों में धारा 144 लागू कर दिया गया। इस समय विशेष में लॉक डाउन हमारे जीवन को बचाने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है जिसका पालन करके हम अपने परिवार के साथ-साथ अपने समाज और देश को सुरक्षित कर सकते हैं। यह हमारा कर्तव्य भी है कि पूर्णतया जागरूक बने और किसी में भी इससे जुड़े लक्षण दिखे तो मेडिकल हेल्प लाइन नंबर पर फोन कर स्वास्थ्य सेवकों के दिशा निर्देशों के अनुरूप कार्य करें। इससे हम अपने समाज को सुरक्षित कर सकते हैं।

हमारे देश में इस बीमारी को फैलने से रोकने हेतु लॉक डाउन का प्रयोजन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि भारत विश्व में जनसंख्या की दृष्टि से दूसरा बड़ा देश है जबकि इस बीमारी का फैलाव लोगों के संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से हो रहा है। ऐसे में हम लॉक डाउन के माध्यम से अपने समाज को इस महामारी के संक्रमण से बचा सकते हैं। कोरोना वायरस की गंभीरता हम इस तथ्य से समझ सकते हैं कि आज अमेरिका, रूस, चीन, इटली, ईरान जैसे देश इस वायरस से उत्त्पन्न वैश्विक महामारी से अपने नागरिकों की रक्षा करने में असमर्थ हैं। भारत अभी जिस स्टेज पर है उसे लॉक डाउन के माध्यम से नियंत्रित कर सकता है लेकिन यदि हम सब इसकी गंभीरता को नजर अंदाज करते रहे तो हमें भी अन्य देशों की भांति लाचार होकर आंकड़े गिनने पडेंगे।

लॉक डाउन इस वायरस का कोई उपचार नही है लेकिन लॉक डाउन के माध्यम से हम इस गम्भीर महामारी को नियंत्रित कर सकते हैं जो वर्तमान समय की  सबसे बड़ी आवश्यकता है जो हमारी देश और जनमानस के प्रति पूर्ण निष्ठा और समर्पण से ही संभव है। लॉक डाउन के माध्यम से संक्रमण के फैलाव को नियंत्रित कर सकते हैं जिसके उपरांत संक्रमित व्यक्तियों को ठीक किया जा सकता है।

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