जाफराबाद मुस्लिम-दलित गठजोड़ का खतरा

शाहीन बाग़ में हो रहे धरने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सही कहा था , यह प्रदर्शन एक संयोग नहीं , एक प्रयोग है। कर्नाटक , महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश में हू-ब-हू शाहीन बाग़ दोहराया गया और रविवार को दिल्ली में ही जाफराबाद और चाँद बाग़ दोहराया गया। असदुद्दीन ओवेसी ने कहा था कि अगर पुलिस ने जबरदस्ती की तो शाहीन बाग़ जलियांवाला बाग़ बनेगा। औरतों और बच्चों को आगे कर के मुस्लिम कट्टरपंथियों की रणनीति शाहीन बाग़ को जलियांवाला बाग़ बनवाने की थी। शाहीन बाग़ की तरह अब चाँद बाग़ को चुना गया है , जाफराबाद भी दिल्ली का मुस्लिम बहुल इलाका है। शाहीन बाग़ का यह प्रयोग इस लिए आगे बढ़ रहा है क्योंकि सुप्रीमकोर्ट कोई साफ़ निर्देश नहीं दे रही।कोर्ट ने संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन को उन्हें जगह बदलने के लिए मनाने का जिम्मा सौंपा था , लेकिन वे धरने पर जा कर उन की होंसला अफजाई कर आए।

अपने आप मध्यस्थता के लिए तैनात वजाहद हबीबुल्लाह ने तो कोर्ट को कह ही दिया कि धरना देने वालों ने रास्ता नहीं रोका , रास्ता पुलिस ने रोका हुआ है। वह खुद पश्चिमी उतर प्रदेश में दलित नेता चन्द्र शेखर आज़ाद के साथ याचिकाकर्ता हैं। भीम आर्मी के चन्द्र शेखर साम्प्रदायिक और जातीय नफरत फैलाने के आरोप में कई बार गिरफ्तार हो चुके हैं। वामपंथी दल पिछले चार साल से रोहित वैमूला और भीमा कोरेगांव के माध्यम से दलितों को स्वर्ण हिन्दुओं के खिलाफ भडका कर जातीय वैमनस्य फैलाने की कोशिश में जुटे हुए थे। हिन्दुओं की जातीय एकता तोड़ने के लिए वामपंथियों का जेएनयू यूनिट 2013 से महिषासुर शहादत दिवस मना रहा है , जिस में देवी दुर्गा का अपमान किया जाता है। वामपंथियों की कोशिशों को आगे बढाते हुए चन्द्र शेखर आज़ाद देश भर में घूम घूम कर दलितों को स्वर्ण हिन्दुओं के खिलाफ भडकाने वाले भाषण दे रहे हैं। वह वामपंथियों के दलित-मुस्लिम एकता के एजेंडे को भी आगे बढा रहे हैं। उस की अंतिम गिरफ्तारी नागरिकता संशोधन क़ानून के खिलाफ जामा मस्जिद के बाहर दिए गए भाषण पर ही हुई थी। जामा मस्जिद में चन्द्र शेखर आजाद का भाषण मुस्लिम-दलित एकता की शुरुआत थी।

रविवार के भारत बंद का आह्वान चन्द्र शेखर ने ही किया था , जिसे सफल बनाने के लिए मुस्लिमों ने जी-जान लगा दी, नतीजतन शनिवार रात से ही जाफराबाद का मेट्रो स्टेशन बंद कर दिया गया। रविवार शाम तक मौजपुर का मेट्रो स्टेशन भी बंद करना पड़ा, पथराव कर रही भीड़ को काबू करने के लिए सीआरपीऍफ़ बुलानी पड़ी। दिल्ली का यह प्रयोग शाम होते अलीगढ़ और कई अन्य स्थानों पर दोहराया गया। इस तरह देश में अराजकता फैलाने और पुलिस को कार्रवाही के लिए आमन्त्रण दिया जा रहा है , ताकि भगदड़ मचे और कुछ मासूम मारे जाएं। इस प्रयोग के पीछे वामपंथी विचारधारा के सभी नेताओ , कलाकारों  , छात्र संगठनों और एनजीओ का दिमाग और कार्य योजना काम कर रही है। कर्नाटक में पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने वाली लडकी अमूल्या लियोनी के अब अनेक वीडियो सामने आ चुके हैं, जिन में वह हू-ब-हू कन्हैया की नकल करती देखी जा सकती है, वह उसी तरह आज़ादी के नारे लगवाती है। नागरिकता संशोधन क़ानून के खिलाफ मुस्लिम रैलियों में वामपंथी उसे पूरे कर्नाटक में घूमा चुके हैं। एक बातचीत में वह यह कहती हुई दिखाई देती है कि वह तो सिर्फ चेहरा है , उसे क्या बोलना है, यह एक टीम तय करती है , जिस में बहुत सारे लोग लगे हुए हैं। आप ने देखा होगा जब ओवेसी उसे पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने से रोकते हैं , तो कुछ लडके तुरंत उसे बचाने के लिए सामने आते हैं, तभी वह हिन्दुस्तान जिंदाबाद का नारा लगाती है, जिस पर उसे बचाने वाले युवक जिंदाबाद के नारे लगाने लगते हैं।

भीम आर्मी के कर्ताधर्ता चन्द्र शेखर को दलित आरक्षण के नाम पर भारत बंद का आह्वान करने का मौक़ा खुद भाजपा ने दिया है , पदोन्नति में आरक्षण नहीं देने का फैसला भले ही उतराखंड की कांग्रेस सरकार का था, जिसे उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी ठीक ठहराया था। लेकिन जब उसे सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी गई तो उत्तराखंड की मौजूदा भाजपा सरकार भी पार्टी बनी , वह पार्टी बनने से बच सकती थी। आरक्षण सम्बन्धी सुप्रीमकोर्ट के फैसले ने मुस्लिम-दलित एकता की भूमिका तैयार कर दी है। जामिया मिल्लिया की आयशा और लदीदा ने कहा था कि अयोध्या पर फैसले के बाद मुसलमानों का भारत की न्यायपालिका पर से भी विशवास उठ गया है। जाफराबाद में भीम आर्मी के भारत बंद का समर्थन करने आई मुस्लिम भीड़ नए बन रहे दलित-मुस्लिम गठजोड़ की गवाह हैं।

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