‘कोरोना’ सरकार के लिए आपदा तो किसके लिए अवसर..!

कोविड सेंटरों में इलाज के नाम पर बसों की तरह भर दिए गए मरीजों का हाल क्या है ये प्रशासन भले न बताये पर कुछ जागरूक पीड़ित मरीजों द्वारा अपने मोबाइल से लाइव वीडियो बना उन्हें वायरल कर इन कोविड सेंटरों की जो हक़ीक़त बताई है वो शायद ही किसी से छुपी हो.रोज़ाना प्रदेशभर में सैकड़ों की तादाद में निकल रहे कोरोना संक्रमितों को बेहतर इलाज की दरकार से इनकार नहीं किया जा सकता.जिन डॉ और मेडिकल स्टाफ की ड्यूटी कोविड सेंटरों पर सरकार ने लगाई है

उनसे बातचीत के बाद यही कहा जा सकता है कि प्रदेश में कोरोना को डेडिकेटेड कोविड 19 सेंटरों में सुविधाओं के नाम पर आम संक्रमित व्यक्ति को महज चार दीवारी में बंद कर देना और इलाज के नाम पर कुछ विशेष दवा न देकर इमयूनिटी सिस्टम को इम्प्रूव करने और सर्दी खांसी बुखार वाला ट्रीटमेंट देना भले ही सिस्टम का पार्ट हो पर खाने की डाइट और मरीजों की देखभाल के तरीकों पर जनता अब सवाल उठाने लगी है जिसे कम से कम सरकार के बनाए दोहरे मापदंडों की खुली मुखालफत ही माना जाएगा. कोविड के शुरुआती लक्षणों का इलाज बहुत सरलता से होने की संभावनाओं की बात वही डॉ कर रहे हैं जो सरकारी कोविड सेंटरों में तैनात हैं।

लापरवाही के साथ भ्रस्टाचार के आरोप..
शुरुआत से ही कोरोना को लेकर किये जा रहे सरकारी प्रयासों पर विपक्ष और जनता सवाल खड़े करती आ रही है फिर चाहे वो कोरोना किट खरीदी का मामला हो,कोरोना वारियर्स को जरूरी सुविधाओं का उपलब्ध न होने की बात हो या कोविड के मरीजों को भोजन,सफाई,खाना और उनके इलाज में लापरवाही बरतने के मामले हों सभी बातें सरकार की नीति और अधीनस्थ अमले की नीयत पर बड़ा प्रश्रचिन्ह खड़ा करती दिखाई पड़तीं हैं.यानि सरकारी व्यवस्थाओं पर हाथी के दांत खाने के अलग और दिखाने के अलग वाली बात यहां जरूर धरातल पर दिखाई पड़ रही है.प्रदेश भर के कोविड सेंटरों से रोजाना मरीजों के परेशान होने वाली खबरों के वायरल वीडियो का ये असर हुआ कि जनता के जेहन में अब कोरोना से बचाव का आखिरी रास्ता प्राइवेट अस्पताल ही बचे हैं और उन्हें बड़े शहर छोड़ दें तो निचले स्तर पर सरकारी व्यवस्थाओं, सुविधाओं पर भरोसा नहीं रहा है. इसलिए प्रदेशभर के एक कोविड सेंटरों के अनेक संक्रमित व्यक्ति सरकार और प्रशासन से निजी अस्पतालों में इलाज कराने की मंजूरी मांग रहे हैं।

सरकार को कुछ होटल मालिकों ने हाल ही उनके प्रतिष्ठान को कोविड केअर सेन्टर में तब्दील करने की सहमति जताई है पर अभी निर्णय सरकार की पाले में है. दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में निजी होटलों को कोविड केअर सेन्टर बनाया जा चुका है.इन होटल मालिकों ने उनके पैकेज का निर्धारण भी किया है.हालांकि मध्यप्रदेश सरकार की तरफ से कोई ऐसा फैसला अभी नहीं आया है कि कोविड मरीजों को निजी सुविधाओं के लिए उनके खर्च पर कहीं सुरक्षित और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराया जा सके. कुछ विशेषज्ञ चिकित्सक बताते हैं कि अब सरकार भी जनभावनाओं को भांप चुकी है कि जनता का सरकारी कोविड सेंटरों पर हो रही भर्राशाही के चलते अविश्वास बढ़ता जा रहा है और आये दिन किए जा रहे लॉकडाउन से भी आमजन की बहुत नाराजगी सामने आने लगी है सो अब अनलॉक करके इसके साथ इलाज के निजीकरण की दिशा में भी प्रदेश सरकार प्रयासरत है और संक्रमित लोगों को उनके घरों पर कोरेन्टीन कर उनके इलाज कराने की व्यवस्था कराने की दिशा में विचार कर रही है।

सौ रुपए में मरीज को क्या क्या खिलाओगे?
विपक्ष पार्टियों के नेता हों या सत्ताधारी दल के लोग सभी इस कोरोना संक्रमण काल में अपने राजनीतिक लाभ के अवसर की तलाश में जुटे हुए हैं. दरअसल उपचुनाव की कवायद के बीच जहां सरकार बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराकर जनता को ये संदेश देना चाहती हैं कि भाजपा सरकार ही जनता की सच्ची हमदर्द है तो विपक्ष लापरवाही,भर्राशाही और संक्रमित व्यक्तियों के लिए खोले गए कोविड केअर सेंटर पर पाई जाने वाली अव्यवस्थाओं को सामने लाकर सरकार की किरकिरी कराने की योजना पर अमल कर रहा है.इन आरोप और बचाव की राजनीति के बीच स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त संजय गोयल का 24 जून को जारी किया गया एक आदेश सामने आता है जिसमें कोविड 19 से पीड़ित व्यक्ति के भोजन की दिनचर्या का हवाला दिया गया है।

जिसमें प्रति व्यक्ति 100 के मान से विभागीय स्वीकृति प्रदान की गई है.इस पत्र में जो कोविड मरीज को सुबह से लेकर शाम तक नाश्ता, चाय, बिस्किट और दोनों टाइम के भोजन की व्यवस्था के लिए प्रति रोगी 100 रु स्वीकृति दी गई है.अब आप खुद अंदाज़ा लगा सकते हैं कि एक मरीज को एक दिन में तीन बार चाय,बिस्किट,सुबह का नाश्ता और दो टाइम का पौष्टिक भोजन कितना बेहतर दिया जा रहा होगा.इसके अलावा मरीज को बिसलरी का पानी पिलाने का भी जिक्र है.अब यहां सवाल ये उठता है कि 100 रु प्रतिदिन के मान से मरीजों को कितना हेल्थी और पौषण वाला आहार कोविड सेंटरों में खिलाया ज रहा होगा अपने आप मे हास्यास्पद लगता है।

भ्रस्टाचार खाने में नहीं व्यवस्थाएं जमाने का है
प्रदेश में कोरोना संक्रमित के आंकड़ा 30 हज़ार पार कर गया है अब इनकी रोकथाम के लिए सरकारी प्रयास लगातार जारी हैं.प्रदेश के कोविड सेंटरों में जो लापरवाहियों और कोरोना में हो रहे भ्रस्टाचार के आरोप सामने आ रहे दरअसल इसके पीछे हर जिले के स्वास्थ्य अमले के मुखिया और प्रशासन को ही कटघरे में खड़ा नज़र आ रहा है.कोविड के नाम पर आस्थाई कर्मचारियों की भर्ती हो या अपने चहेते डॉ और स्टाफ की ड्यूटी कोविड केअर सेंटर पर न लगाने के मामले, मरीजों को अतिरिक्त सुविधा देने के नाम पर रोगी कल्याण समिति का बजट निकालने की बात हो या फिर जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रदान की गई राशि के व्यय का मामला,सब मदों से व्यय करने में ही भ्रस्टाचार होने की संभावनाओं पर कुछ जिम्मेदार स्वास्थ्य अधिकारी प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहे हैं।

कुछ कोविड सेंटरों में ड्यूटी करने वाले डॉ बताते हैं कि पीपीई किट,टेस्ट किट,सेनेटाइजर सहित जितने भी जरूरी सामग्री की खरीद होना थी वो ऊपर से पूर्व में ही कर ली गई है पर सीएमएचओ लेबल पर भी सरकार ने 10 लाख तक की खरीद का प्रावधान रखा था जिसमें पूरे प्रदेश लेबल पर अनियमितताएं देखने मिलेंगी.प्रदेश के हर जिलेवार रोज़ाना मरीजों और कोविड सेंटरों पर खाने के अलावा हो रहे व्यय का लेखाजोखा देखा जाये तो बहुत बड़ा मामला सामने आएगा.हालांकि इन डॉ का ये भी मानना है कि कोविड केअर यूनिटों में काम कर रहे डॉ और मेडिकल स्टाफ पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी से अपने कर्तव्यों का पालन कर रहा है पर ऐसे कई लोग हैं जो सीनियर पदों पर बैठे हैं और उन्होंने इस महामारी में भी अपने लिए अवसर तलाश लिए हैं. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में आपको ऐसे कई उदाहरण अभी देखने मिल जाएंगे कि जिन लापरवाह अधिकारियों को खुद मुख्यमंत्री हटाने का बोल चुके वे अब भी वहीं काम कर रहे हैं।

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