uma bharti shivraj chuhan पूरे प्रदेश में यदि किसी की चर्चा है तो वो है दारू
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पूरे प्रदेश में यदि किसी की चर्चा है तो वो है दारू

uma bharti shivraj chuhan

इन दिनों मध्यप्रदेश में अगर सबसे ज्यादा सुर्ख़ियों में कोई है तो वो है दारू । उसकी टीआरपी आज की तारीख में सबसे ज्यादा है इधर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री बीजेपी की फायर ब्रांड नेता उमा भारती पूरे प्रदेश से दारु को जड़ से उखाड़ फेंकना चाहती हैं पूरे प्रदेश में शराबबंदी करवाना चाहती हैं ,तो अपने मामा जी यानी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी अब महिलाओं के लिए शराब की अलग दुकान खुलवाने की व्यवस्था मैं जी जान से जुटे हैं ।  प्रदेश के 4 शहरों में महिलाओं के लिए अलग से शराब की दुकान खोली जाएंगी जिनमें  हर तरह के ब्रांड महिलाओं के लिए उपलब्ध होंगे अगर ये दुकानें जम के चल गई तो फिर प्रदेश में वाइन उत्सवभी मनाया जाएगा । uma bharti shivraj chuhan

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कितनी चिंता है मामा जी को अपने प्रदेश की दारु पीने वाली महिलाओं की, वैसे एक हिसाब से सही तो बात है जब मर्द दारु पी सकता है तो औरतें क्यों नहीं ।एक दूसरी बात ये भी सामने आई है कि प्रदेश में दारू की खपत लगता है कम हो गई है, पता नहीं दरुओं को क्या हो गया है, सरकार इतनी फैसिलिटी दे रही है कोरोना में सब कुछ बंद था फिर भी दारू मिल रही थी ,उसके बाद भी अगर वे दारू की  खपत नहीं बढ़ा पा रहे हैं तो सरकार को सोचना तो पड़ेगा ना, इसलिए उसके आबकारी विभाग के बड़े अफसरों ने एक मीटिंग बुलाई और छोटे अफसरों से  कहा कि देखो भैया प्रदेश में मदिरा की खपत कैसे कम हो रही है क्या दरुए आध्यात्म की तरफ चले गए हैं या उनका दारू से मोहभंग हो गया है, पता लगाओ, सर्वे करो, दरुओं से बात करो कि भैया सरकार को क्यों गरीब करने में जुटे हुए हो तुम्हारे दम पर तो सरकार का खजाना भरता है अगर तुम ही अलसेट दे दोगे तो सरकार भी दाने-दाने को मोहताज हो जाएगी, इसलिए अपनी आदतों से बाज मत आओ दारू पियो, तुम भी खुश रहो और हमें भी खुश रहने दो ।

अधिकारी लगातार इस खोज में हैं कि दरुओं की संख्या कैसे बढ़ाई जाए ताकि मदिरा की खपत बढ़ जाए । उधर दूसरी तरफ कांग्रेस ने घोषणा कर दी है कि कांग्रेस का सदस्यता अभियान चलेगा उसमें केवल उनको ही सदस्य बनाया जाएगा जो शराब और ड्रग से दूर से ही तौबा करते हों ,मामा जी दरुओं को प्रोत्साहित कर रहे हैं तो कमलनाथ दरुओं को पार्टी में शामिल करने से इंकार कर रहे हैं ,अरे भाई पार्टी का काम अलग है और अपने अपने शौक अलग ,अगर दो चार पैग पार्टी का कोई सदस्य लगा भी रहा है तो उससे पार्टी को कौन सा नुकसान है । कुल मिलाकर इन दिनों दारू पर पूरा प्रदेश केंद्रित हो गया है आबकारी विभाग दरुओं के सर्वे में लगा है, महिलाएं अपने लिए अलग दुकान खुलने के इंतजार में हैं कांग्रेस के कार्यकर्ता परेशानी में हैं कि कैसे यह एफिडेविट दे दे कि वह शराब नहीं पिएंगे, यदि देखा जाए  तो बिना दारू के कोई भी प्रदेश सरकार चल नहीं पाती क्योंकि सारा माल तो दारू से ही आता है यदि उसमें बंदिश लग गई तो फिर माल कहां से आएगा, तिजोरी खाली हो जाएगी । एक बात अपन उमा जी को भी बता देते हैं उमा जी सब कुछ करना लेकिन दरुओं की बद्दुआ मत लेना क्योंकि इनकी आह भीतर से निकलती है और उसका असर बहुत दूर तक होता है

नेता और भरोसा

आजकल पता नहीं क्यों संस्थाएं लगातार सर्वे करने में जुटी हुई हैं, कोई किसी चीज का सर्वे कर रहा है तो कोई किसी चीज का । अब एक और नया सर्वे सामने आ गया है कि लोगों का भरोसा किस पर सबसे ज्यादा है और किस पर सबसे कम, इस सर्वे में यह बात सामने आई है कि लोगों का भरोसा सबसे कम यदि किसी पर है तो वह है मंत्री और नेता। कुल जमा 18 फीसदी लोग नेताओं पर और 15 फ़ीसदी लोग मंत्रियों पर भरोसा करते हैं , अपने को तो इन सर्वे करने वालों की बुद्धि पर तरस आता है इसके लिए सर्वे करने की जरूरत क्या है यह तो बच्चा बच्चा जानता है कि नेता और मंत्री सिर्फ वादा करते हैं उनकी पोटली में हजारों वायदे होते हैं और जब जनता के बीच जाते हैं तो उस पोटली में से लगातार वायदे निकाल निकाल कर जनता की तरफ फेंकते रहते हैं जनता भी जानती है कि मंत्री जी या नेता जी जो कुछ कह रहे हैं या जो वायदे कर रहे हैं वे कभी पूरे नहीं होने वाले इसके बावजूद उसकी मजबूरी होती है क्यों किसी न किसी को तो वोट देना ही है ।

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नेता मंत्री भी जानते हैं कि कितना ही सर्वे करवा लो ,हम पर भरोसा करो ना करो, लेकिन बेटा वोट तो हमको ही दोगे ,तुम्हारे पास कोई ऑप्शन भी तो नहीं है, कहां जाओगे हमारे जाल से बचके। कितने ही तड़पड़ा लो, कितनी ही गालियां दो कि नेता झूठे होते हैं, इन पर भरोसा नहीं करना चाहिए लेकिन आफ्टर आल आना तो हमारी शरण में ही पड़ता है वैसे सर्वे में एक बात और निकल कर आई है कि लोगों का भरोसा पत्रकारों पर भी कम हो गया है   31 फ़ीसदी लोगों ने पत्रकारों पर अपना भरोसा जताया ।  अब पत्रकार बेचारा गरीब करे तो करे क्या, खबर तो छापनी है जो मालिक चाहेगा, कलम भले ही तो उसकी हो लेकिन लिखना क्या है यह तय तो सेठ करता है यानी कलम उसकी है लेकिन स्याही मालिक की भरी हुई है तो उस पर भी भरोसा कम होना लाजमी है । अच्छी बात है कि लोगों का भरोसा देश की सेना और देश का भविष्य तैयार करने वाले शिक्षकों पर बना हुआ है। उनका प्रतिशत 60 और 65 है। वैसे इस सर्वे के बाद भी नेताओं और मंत्रियों को कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है क्योंकि वादा करना और फिर उस पर अमल न करना उनके खून में प्रवाहित हो रहा है और जब शरीर के भीतर ही यह दोनों चीज  उपस्थित हैं तो फिर किसी चीज से कोई फर्क नहीं पड़ता । जिस किसी को भी नेता बनना है उसे वादा करने और उनको भूल जाने का एक्सपीरियंस लेना बहुत जरूरी है तभी वो नेता व मंत्री बन पाएगा ।

सुपर हिट ऑफ़ द वीक

सुनिए आप मुझसे बार-बार सॉरी मत कहा कीजिए श्रीमती जी ने श्रीमान जी से कहा

लेकिन क्यों श्रीमान जी ने पूछा

दरअसल आपके बार-बार सॉरी कहने से मेरा लड़ने का पूरा मूड खराब हो जाता है श्रीमती जी का उत्तर था

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