‘पॉलिटिक्स’ में ‘कोरोना’ के बाद अब ‘जानवरों’ की एंट्री

इसे राजनीति के पतन का दौर कहा जाए या सिर्फ सत्ता पाने की लोलुपता कि जनप्रतिनिधि अब इंसानियत को तार तार करने वाले बयान देकर अपनी और अपने प्रतिद्वंद्वी की आलोचना जानवरों का उदाहरण देकर करने में मशगूल हैं.यानी अब ये कहना भी बेमानी नहीं होगा की इंसानों को अपनी राजनीति चमकाने अब जानवरों के नाम का सहारा लेना पड़ रहा है.मंत्रिमंडल गठन के बाद से मध्यप्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ जो देखने को मिला उसे देखकर तो यही कहना उचित होगा कि अब इंसानों की राजनीतिक उठापटक के बीच जानवरों की महत्वपूर्ण भूमिका हो गई है,कोई टाइगर की बात करता है तो कोई बब्बर शेर की,कोई कागज़ी शेर पर ताने मारने व्यस्त है तो कोई शेर को चूहा की संज्ञा देने में मसरूफ.किसी को टाइगर कुकरमुत्ते नज़र आते हैं तो किसी को आस्तीन के सांप.कोई टाइगर को हाथी बोलता है

तो कोई सियार.राजनीति की गिरावट का इससे सटीक उदाहरण क्या हो सकता कि शेर से शुरू हुई बात अब कुत्तों और कुकरमुत्तों तक आ गई.इन हालातों में जहां जनता पर कोरोना जैसी गम्भीर बीमारी का खतरा अभी भी टला नहीं पर जनप्रतिनिधि इस गंभीर संक्रमण से जानबूझकर अनजान बन सिर्फ अपने अहंकार की अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर अपनी वाहवाही में मस्त और व्यस्त नज़र आ रहे हैं और जानवरों का सहारा लेकर इंसानों की तुलना कर एक दूसरे को नीचा दिखाने की ओछी राजनीति कर रहे हैं.इन सब बातों और बयानों का आशय क्या अब ये माना जाए कि राजनीतिक दलों के पास आप शेर,सियार,हाथी,चूहा,कुत्ता,गद्दार, बिकाऊ और कुकरमुत्ते के अलावा कोई ऐसे जनहितैषी मुद्दे नहीं बचे जिनके बलबूते भाजपा और कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दल 24 सीटों के उपचुनाव में जनता के बीच जाएं और चुनाव लड़ेंगे.

‘टाइगर जिंदा है’ और सियासी घमासान
कांग्रेस की अल्पकालिक सरकार अस्तित्व में आई और शिवराज सिंह ने विपक्ष में रहते हुए एक जुमला बोला कि ‘टाइगर अभी जिंदा है’ इस जुमले पर सियासत का रुख ज्यादा गर्माहट वाला नहीं रहा पर यही बात ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंत्रीमंडल गठन के दिन बोली तो बवाल मच गया.दरसअल ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों को शिवराज मंत्रिमंडल में एकतरफा बजनदारी के साथ भाजपा ने जिस तरह मंत्रिपद देकर उनका मान बढ़ाया तो सिंधिया भी शपथग्रहण समारोह के साक्षी बने.इसी दौरान सिंधिया ने कुछ मीडियाकर्मियों को वक्तव्य देते हुए बोला कि ‘टाइगर अभी जिंदा है’ उनके ये शब्द हालांकि उन आलोचकों के लिए थे जो कांग्रेस छोड़ने के बाद से लगातार सिंधिया पर ऊल-जलूल टिप्पणियां करने से बाज़ नहीं आ रहे थे.सिंधिया के इतने बोलने के बाद कांग्रेस मानो बौखला गई और तत्काल पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय का एक ट्वीट सामने आया कि ‘हमने भी शेर का शिकार किया है अब हम शेर को कैमरे में उतारते हैं’.इस ट्वीट ने तो मध्यप्रदेश की राजनीति में जैसे जानवरों की एंट्री कर डाली.महाराजा के खिलाफ राजा के ट्वीट के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का बयान कि कौन सा टाइगर पेपर टाइगर या सर्कस वाला,फिर पूर्व मंत्री डॉ गोविंद सिंह का बयान कि शिवराज और सिंधिया में शेर के लक्षण नहीं चूहे के लक्षण जरूर दिखाई देते हैं से सियासत गर्मा गई.उमंग सिंगार ने कहा शेर थे तो आस्तीन में क्यों छुपे थे,पूर्व मंत्री सज़्ज़न सिंह वर्मा का भी बयान सामने आया.कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता और ग्वालियर-चम्बल अंचल के प्रभारी केके मिश्रा ने एक शायरी के माध्यम से निशाना साधते हुए लिखा कि-
‘क्या ताकत है बुजदिलों की जो रोके दिलेर को,

मोहब्बत में तो काट लेते हैं,कुत्ते भी शेर को.’
अब इसके मायने कुछ भी हों पर सियासत में एक दूसरे पर जानवरों का सहारा लेकर आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर शुरू हो चुका है.रविवार को एक ट्वीट में मिश्रा ने कहा कि डॉ गोविन्द सिंह ही प्रदेश के असली टाइगर हैं,भेड़िया टाइगर की खाल पहनने से टाइगर नहीं कहलाते.दोनों नकली टाइगर हैं.यदि उनमें हिम्मत है तो गोविंद सिंह के आरोपों की जांच करायें.इधर पूर्व मंत्री लाखन सिंह का बयान कि बीजेपी में टाइगर तो कुकरमुत्तों की तरह पैदा हो गए कांग्रेस के पास इनका शिकार करने बब्बर शेर हैं,सिंधिया बीजेपी के अदने से कार्यकर्ता हैं.सिलसिला यहीं नहीं थमता अमर्यादित शब्दों भरे बयान की लंबी फेहरिस्त है जो उन माननीय जनप्रतिनिधियों ने दिए जो हमारी सरकारों का हिस्सा रहे.इधर सिंधिया समर्थक और भाजपा सरकार की मंत्री इमरती देवी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि महाराज सिंधिया हाथी की तरह हैं और हाथी चलता है तो कुत्ते भौंकते ही हैं अभी एक बार हाथी झूमा तो कांग्रेस की सरकार उलट गई आगे आगे देखिये क्या क्या होता है.

बेतुकी बयानबाज़ी नहीं जनता को विकास चाहिए
जिन नेताओं के विचारों और सिद्धान्तों पर राजनीतिक दल खड़े और बड़े हुए हैं शायद उन्होंने भी ये नहीं सोचा होगा की लोकतंत्र के प्रहरी भविष्य में इस तरह के कृत्य करके संवैधानिक सिद्धातों को हवा में उड़ायेंगे और एक दूसरे के साथ इंसानियत छोड़कर जानवरों जैसा बर्ताव करते नज़र आएंगे.खैर नेताओं की दो तीन रोज़ से जानवरों को आधार बनाकर चल रही सियासत का जनता से कोई सरोकार भले न हो पर अहम के टकराव में इस तरह के बयानों का राजनीतिक वहम बड़ा दिलचस्प है.बस येन केन प्रकारेण अपने को सही और सामने वाले को गलत साबित करने की विधा ने ही राजनीति में शिक्षा,सम्मान,स्वाभिमान और शालीनता सब ताक पर रखने शायद राजनेताओं को मजबूर कर दिया है.उपचुनाव में जनता को ही तय करना हैं की बेतुके बयानवीरों के अहंकार का पतन करना है या उन्हें सिरमौर बनाना है या फिर विकास करने वालों को मौका देना है.

कोरोना कहर,सरकार से ज्यादा विपक्ष चिंतित
फिलहाल कांग्रेस सरकार जाने से बौखलाहट में है तो भाजपा सरकार बनाने को लेकर और सिंधिया समर्थक उन्हें और उनके महाराज को बराबर सम्मान मिलने से उत्साहित नज़र आ रहे हैं,जिन 24 सीटों पर उपचुनाव होना हैं अब उनमें 16 सीटों वाले ग्वालियर चंबल अंचल पर पिछले कुछ दिनों से कोरोना के बढ़ते केसों ने सरकार और विपक्ष की चिंता बड़ा दी है.सरकार जहां मुरैना और ग्वालियर अंचल में बढ़ते कोरोना संक्रमित के चलते लॉकडाउन को दोबारा लगाने पर गंभीर है वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक चाल बता रही है.कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने एक ट्वीट कर कहा कि उपचुनाव में भाजपा की हालात बहुत खराब नज़र आ रही है.इसलिए अब सरकार उपचुनाव टालने की फिराक में है.जब पूरे प्रदेश का रिकवरी रेट बेहतर है तो मुरैना और ग्वालियर ही संक्रमित क्यों?उन्होंने कहा सरकार के आंकड़े फर्जी हैं और ग्वालियर अंचल में डर कोरोना नहीं पराजय है.में इसी क्षेत्र में हूं,ऐसा कुछ नहीं जैसा सरकार बता रही.यहां गम्भीर बात तो ये है कि मेडिकल जांच के आधार पर जहाँ सरकार इस क्षेत्र को संवेदनशील मानकर निर्णय लेने पर विचार कर रही है तो विपक्ष के लिए ‘कोरोना’ सरकार की घेराबंदी के काम आने वाला है.

Amazon Prime Day Sale 6th - 7th Aug

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares