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अदरक में हैं कमाल के औषधीय गुण

अदरक का बॉयो-एक्टिव कम्पाउंड जिन्जेरॉल, ब्रेन फंक्शन इम्प्रूव करता है, विशेषरूप से मिडिल एज़ महिलाओं के सम्बन्ध में। यह एजिंग प्रोसेस बढ़ाने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और क्रोनिक इन्फ्लेमेशन को कम करके एल्जाइमर से बचाव के साथ उम्र बढ़ने से हो रहे ब्रेन डैमेज प्रोसेस को धीमा करता है।  यदि संक्रमण की बात करें तो अदरक, बैक्टीरिया और वायरस दोनों तरह के इंफेक्शन से बचाता है।

मशहूर कहावत, बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद, आपने जरूर सुनी होगी। बंदर, अदरक के बारे में कितना जानते हैं, नहीं पता। लेकिन हम इंसानों ने इसके उन स्वादों की खोज भी कर ली है जो जीभ के लिये नहीं बल्कि सेहत के लिये बने हैं। देश और दुनिया के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों ने रिसर्च के बाद अदरक के इन गुणों को मान्यता दी है और माना है कि अदरक सच में औषधि है।

सेहत से बढ़कर कुछ नहीं, प्राकृतिक तौर-तरीकों से सब सेहतमंद रहें, यही सोचकर सदियों पहले हमारे पूर्वजों में औषधीय गुण वाले पेड़-पौधों को आहार में जोड़ा गया और संस्कृति का हिस्सा बनाया। इसी परम्परा का अनुसरण करके हमने बनायी अदरक वाली चाय। क्योंकि चाय का चलन अभी हाल में 1850 के आसपास ही शुरू हुआ है। आज शायद ही कोई ऐसा हो जिसने सर्दी में अदरक वाली चाय न पी हो।

कई तरह से इस्तेमाल  

पूरी दुनिया में अदरक, खाने की रेसिपीज़ का सबसे कॉमन इन्ग्रीडियेंट है। इसे अलग-अलग तरह से इस्तेमाल किया जाता है। कहीं फ्रेश, कहीं सुखाकर तो कहीं पाउडर बनाकर। इसके तेल का इस्तेमाल दवाओं और कॉस्मेटिक्स में होता है। मूलरूप से यह फूलवाला पौधा है जो हल्दी, मोटी इलायची और गलन्गल की फैमिली से आता है। हमारे लिये सबसे उपयोगी है इसकी जड़ यानी जिन्जर रूट। आपको ये जानकर खुशी होगी कि इसका उत्पत्ति स्थल हमारी धरती यानी जम्बूद्वीप ही है। आर्युवेद में इसे पृथ्वी पर उगने वाली सबसे स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट वनस्पतियों में से एक माना गया है।

इतना स्वास्थ्यवर्धक कैसे?

अब सवाल ये कि अदरक इतना स्वास्थ्यवर्धक कैसे? तो जबाब है जिन्जेरॉल की वजह से। जो इसका मेन बॉयो-एक्टिव कम्पाउंड है। अदरक का स्वाद, मेडीसनल प्रॉपर्टीज, खुशबू सब इसी से, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-इन्फलामेटरी तथा एंटी-डॉयबिटीज गुणों का स्रोत भी यही। इसके कारण ही सदियों से इसे इनडाइजेशन, नौजिया और सर्दी-खांसी-जुकाम के इलाज में प्रयोग किया जा रहा है। आर्युवेद के मुताबिक अदरक के आधा चम्मच रस को शहद की समान मात्रा में हल्दी के साथ मिलाकर गरम करके चाटा जाये तो खांसी-सर्दी-जुकाम में आराम मिलता है। ध्यान रहे, इसे चाटने के 30 मिनट बाद तक पानी नहीं पीना।

इन बीमारियों में बहुत इफेक्टिव

अदरक, नौजिया यानी जी मिचलाने की कारगर दवा है, विशेषरूप से मॉर्निंग सिकनेस की। वैज्ञानिकों ने शोध में पाया कि सुबह-सुबह 1 से 1।5 ग्राम अदरक के सेवन से प्रेगनेन्सी, सर्जरी और कीमोथेरेपी से होने वाले नौजिया में आराम मिलता है। यह वोमटिंग रोकता है लेकिन प्रेगनेन्सी में इसका सेवन अत्यन्त अल्प मात्रा में डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिये।

अदरक, हमारी हड्डियों के लिये बहुत फायदेमंद है, शोध से पता चला यह हड्डियों में ऑस्टियो ऑर्थराइटिस से होने वाली क्षति रोकता है। वैज्ञानिकों ने बताया कि अदरक, गोंद, दालचीनी और सीसमी ऑयल के कॉम्बीनेशन से घुटनों के दर्द और अकड़न में कमी आती है।

देखा, टेड़े-मेड़े अदरक में कितने गुण, लेकिन ये तो शुरूआत है। रिसर्च से सामने आया कि अदरक की एंटी-डॉयबिटीज प्रॉपर्टीज ब्लड शुगर कम करने के साथ हार्ट के लिये भी फायदेमंद हैं। टाइप-2 डॉयबिटीज के मरीज यदि 12 सप्ताह रोजाना खाने में इसकी मात्रा बढ़ा दें तो उनका औसत शुगर लेवल जिसे A1C कहते हैं घटेगा और ब्लड में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ जायेगी। इससे शुगर तो कंट्रोल होगी ही साथ में हार्ट भी हेल्दी रहेगा।

क्रोनिक इन्डॉयजेशन पर अदरक का असर जानने के लिये इस पर तीन अलग-अलग शोध हुए तो पता चला कि पाचन से जुड़ी समस्याओं, डिस्कम्फर्ट और क्रोनिक कब्ज दूर करने में ये किसी भी दूसरी दवा से कम नहीं। यह पुरानी से पुरानी पाचन समस्या को आसानी से ठीक कर देती है।

उन महिलाओं के लिये तो अदरक वरदान है जो हर महीने पेनफुल पीरियड झेलती हैं। वैज्ञानिकों ने ऐसी 150 महिलाओं पर क्लीनिकल ट्रॉयल करते हुए उन्हें पीरियड के पहले तीन दिन 250 मिलीग्राम अदरक पाउडर दिया तो पाया कि यह मेन्सुरल पेन दूर करने में दूसरी पेन रिलीवर दवाओं जितना ही असरदार है।

अब अदरक की एक और खूबी। यह टोटल कोलोस्ट्रॉल, LDL और ट्राइग्लिसराइड्स कम करता है। एक स्टडी में सामने आया कि तीन महीने रोजाना तीन ग्राम अदरक पाउडर लेने से इन तीनों में 10 से लेकर 17।5 प्रतिशत तक कमी आयी। इसलिये बिना देर किये अपने खाने में इसकी मात्रा बढ़ायें या रोजाना तीन ग्राम सोंठ पाउडर का सेवन करें।

कैंसर की रोकथाम में अदरक का असर जानने के लिये वैज्ञानिकों ने कुछ लोगों को एक क्लीनिकल ट्रॉयल के तहत 28 दिनों तक रोजाना 2 ग्राम अदरक एक्सट्रैक्ट दिया तो पाया कि इससे कोलोरेक्टल और गैस्ट्रोइन्टसटाइनल कैंसर का रिस्क कम हुआ, विशेषरूप से पेनक्रियाज और लीवर कैंसर का। एक अन्य रिसर्च में इसे ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर रोकने में भी असरदार पाया गया।

अदरक का बॉयो-एक्टिव कम्पाउंड जिन्जेरॉल, ब्रेन फंक्शन इम्प्रूव करता है, विशेषरूप से मिडिल एज़ महिलाओं के सम्बन्ध में। यह एजिंग प्रोसेस बढ़ाने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और क्रोनिक इन्फ्लेमेशन को कम करके एल्जाइमर से बचाव के साथ उम्र बढ़ने से हो रहे ब्रेन डैमेज प्रोसेस को धीमा करता है।

अगर संक्रमण की बात करें तो अदरक, बैक्टीरिया और वायरस दोनों तरह के इंफेक्शन से बचाता है। ओरल बैक्टीरिया और रेसिपीरेटरी इंफेक्शन बढ़ाने वाले वायरस के खिलाफ ये बहुत प्रभावी है। 2008 में हुयी एक रिसर्च से पता चला कि ओरल बैक्टीरिया के खिलाफ प्रभावी होने की वजह से इसका नियमित सेवन, मसूड़ों को अनेक बीमारियों से बचाता है। और रही रेसिपीरेटरी इंफेक्शन की बात तो सर्दी-खांसी-जुकाम से बचने के लिये तो इसे सदियों से इस्तेमाल किया जा रहा है।

वैज्ञानिकों ने अदरक को, वजन कम करने के साथ BMI सुधारने में प्रभावी माना है। 2016 में हुयी एक रिसर्च के मुताबिक यह मोटापे से रिलेटेड हाई ब्लड इंसुलिन लेवल कम करके बीएमआई यानी बॉडी-मॉस-इंडेक्स ठीक रखता है। 2019 में हुयी एक रिसर्च से पता चला कि अदरक के सप्लीमेंट्स लेने से बॉडी वेट में कमी के साथ वेस्ट-हिप रेशियो ठीक रहता है। अदरक से वजन कम और सुडौल शरीर, वाह क्या बात है।

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