फेसबुक पर प्रदर्शित भव्य नाट्य समारोह - Naya India
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फेसबुक पर प्रदर्शित भव्य नाट्य समारोह

img class=”size-medium wp-image-87906 alignleft” src=”https://www.nayaindia.com/wp-content/uploads/2020/07/luho-300×171.jpg” alt=”” width=”300″ height=”171″ />गिरिजाशंकर < कोरोना काल में आडिटोरियम के दरवाजे बंद है। नाटक नहीं हो सकते, यहां तक रिहर्सल की भी कोई गुंजाइष नहीं है। लिहाजा समूची रंगमंचीय गतिविधियां डिजिटल प्लेटफार्म पर उतर आई हैं। सुबह, दोपहर, शाम हर दिन रंगमंच के दिग्गज कलाकार किसी न किसी प्लेटफार्म पर संवाद करते मिल जायेंगे। महिनों से यह सिलसिला जारी है। इन्ही के साथ नाटकों का प्रदर्षन भी इसी प्लेटफार्म पर हो रहे हैं। इसी क्रम में भोपाल में युवा रंगकर्मी आषीष श्रीवास्तव ने अपनी रंग संस्था चेतना रंग समूह के बेनर तले 9 दिवसीय नाट्य महोत्सव का आयोजन किया। फेसबुक पेज पर आयोजित इस समारोह में राजीव वर्मा, शरद शर्मा, के.जी. त्रिवेदी, विवेक सावरीकर, मृदुल, आलोक चटर्जी, पंकज सोनी, वसंत काषिकर, खुद आषीष श्रीवास्तव व अयाज खान जैसे मषहूर रंग निदेषकों के बहुचर्चित नाटकों ’नटसम्राट’, ’रूदाली’, ’तितली’, ’लहरों के राजहंस’ आदि की प्रस्तुति संयोजित की गई थी। ये सभी नाटक अपने समय के बहुचर्चित और लोकप्रिय नाटक रहे हैं जिन्हें एक बार फिर देखना सुखद अनुभव था। भले ही उन्हें आडिटोरियम के मंच पर नहीं बल्कि मोबाइल पर फेसबुक के पेज पर देखा जा रहा हो। मेरे लिये डिजिटल प्लेटफार्म पर नाटक देखना कोई नई बात नहीं थी। थियेटर ओलंपिक व भारत रंग महोत्सव के स्क्रीनिंग के दौरान वीडियों में रिकार्ड किये गये अनेक नाटक देखने का मौका मिला था। आम दर्षकों के लिये डिजिटल प्लेटफार्म पर नाटक देखना नया अनुभव रहा होगा लेकिन यह उनके लिये बेहद सुविधाजनक था। घर बैठे या जहां जैसे हैं वहां, मोबाइल खोला और नाटक देखने लगे। संभवतः इसी सुविधा के चलते 9 दिनों के नाट्य समारोह में लगभग 50 हजार से अधिक दर्षकों ने इन नाटकों को देखा। इतने दर्षकों तक इन नाटकों का पहुंचना रंगकर्मियांे के लिये दूर की कौड़ी रही है। इस नाट्य समारोह के दर्षकों में रंगकर्मियों की भी बड़ी संख्या थी जो न केवल नाटक देख रहे थे बल्कि प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अपनी उपस्थिति का अहसास भी करा रहे थे। सामान्य तौर पर हिन्दी रंगकर्मी नाटक नहीं देखने के लिये जाने जाते हैं। भोपाल में चेतना रंग समूह विगत दो दषक से अधिक समय से सक्रिय है। समूह के निदेषक आषीष श्रीवास्तव भोपाल रंगमंच पर भी सक्रिय हैं और मुम्बई में भी जहां प्रोडक्षन हाउसों में काम करते हुए थियेटर भी पूरी सक्रियता से कर रहे हैं। जहां प्रोडक्षन हाउसों में काम करते हुए थियेटर भी पूरी सक्रियता से कर रहे हैं। यह उनकी सूझबूझ का परिणाम है कि कोरोना काल में एक शानदार रंग महोत्सव का आयोजन हो पाया। हर निदेषक अपने नाटक की वीडियो रिकार्डिंग कराता है, अपने रिकार्ड के लिये या सरकारी औपचारिकता को पूरा करने के लिये। उन्हीं रिकार्डेड नाटकों को फेसबुक में प्रसारित कर आषीष ने भव्य रंग समारोह की रचनाकर दी। चूंकि नाटकों की वीडियों रिकार्डिंग प्रसारण के लिये नहीं कराई गई थी, लिहाजा उनकी गुणवत्ता उत्कृष्ट नहीं थी, फिर भी नाटकों का भरपूर आनंद लिया गया। इस रंग समारोह में ग्वालियर की परिवर्तन संस्था द्वारा प्रस्तुत नाटक ’कचरा राक्षस’ का अलग से उल्लेख करना मुझे जरूरी लगता है क्योंकि यह नाटक अपनी विषयवस्तु और प्रस्तुतिकरण की दृष्टि से अपना एक अलग स्थान बनाता है। अयाज खान एनएसडी रेपटरी में काम कर चुके हैं और श्रीराम कला केन्द्र की रेपटरी में अभी भी काम करते रहते हैं और रंगमंच पढ़ाते भी हैं। ग्वालियर में रहकर वे लम्बे अरसे से थियेटर कर रहे हैं। कुछ समय पहले उन्होंने ’कचरा राक्षस’ नाटक तैयार किया। ग्वालियर में पर्यावरण पर पीएचडी धारक प्रोफेसर आलोक शर्मा कवितायें भी लिखते हैं। उन्होंने प्रकृति व पर्यावरण पर कुछ कवितायें लिखी जिन्हें कंपाइल कर नाटक की शक्ल दी गई और जिसे अपनी कल्पनाषीलता के साथ अयाज खान ने अद्भुत प्रस्तुति तैयार की। स्वच्छता व प्रकृति की रक्षा जैसे उपदेषवादी शुष्क विषय पर उन्होंने डॉ. आलोक शर्मा की कविताओं के सहारे बेहद मनोरंजक व संगीतमय नाटक बनाया। गांधी के भजन और गांधी द्वारा स्वच्छता के संदेष के साथ नाटक शुरू होता है। नाटक प्रकृति के विनाष और उसकी रक्षा के बीच संघर्ष की कहानी कहता है। नाटक में मुखौटों का बेहतरीन उपयोग किया गया है। बड़े-बड़े मुखौटों में अपना चेहरा छिपाये कचरा राक्षस और मनुष्यों का अभिनय करते कलाकार और बैकग्राउंड से आती गीत, संगीत और संवाद की लहरियां सारी कहानी कहती है। स्वच्छता और प्रकृति की रक्षा करने का संदेष इतना संगीतमय और नाटकीयता के साथ दिया गया कि पूरा नाटक दर्षकों के दिलो दिमाग में छा जाता है। नाटक के निदेषक अयाज खान से बात करते हुए कुछ रोचक जानकारियां भी मिली। देष के संस्कृति मंत्री प्रहलाद पटेल की संस्कृतिक समझ को तो मैं जानता था लेकिन उनके गहरे रंगमंच प्रेम से मैं भी उतना वाकिफ नहीं था। प्रहलाद पटेल श्रीराम सेंटर व अन्य स्थानों पर होने वाले दिल्ली के रंगमंच के नियमित दर्षक रहे हैं। उसी दौरान उनका परिचय अयाज खान से हुआ और उनके बहुत से नाटक प्रहलाद जी ने देखा। उसी संपर्क के चलते अपने नये नाटक ’कचरा राक्षस’ के बारे में अयाज ने जब प्रहलाद जी को बताया तो उन्होंने नाटक देखने की इच्छा प्रकट की। साधनों के अभाव में अपने दम पर नाटक का दिल्ली में मंचन करना अयाज के बूते की बात नहीं थी। इसी बीच प्रहलाद पटेल का दौरा कार्यक्रम बना और वे दोपहर में सड़क रास्ते से ग्वालियर से गुजरने वाले थे। इसी दौरान वे अयाज का नाटक देखने की इच्छा प्रकट की। आनन-फानन में षिवाजी पार्क के खुले मंच पर दोपहर में इस नाटक का विषेष मंचन हुआ जिसके दर्षक बने देष के संस्कृति मंत्री प्रहलाद पटेल। वे इस नाटक से इतने प्रभावित हुए कि सरकारी खर्च में इस नाटक का मंचन उन्होंने दिल्ली में करवाया। यह सिलसिला कुछ आगे बढ़ता कि इसी बीच लॉकडाउन हो गया और संस्कृति मंत्री के प्रयासों पर विराम लग गया। संस्कृति मंत्री प्रहलाद पटेल का रंगमंच प्रेम से कितने रंगकर्मी अवगत हैं, कहा नहीं जा सकता लेकिन यह जानकारी देष भर के रंगकर्मियों के लिये सुखद और उम्मीद जगाने वाला हो सकता है। संस्कृति मंत्रालय द्वारा रंग संस्थाओं व रंगकर्मियों को मिलने वाले अनुदान व छात्रवृत्ति के 2-3 साल से नहीं मिलने की षिकायतें देष भर से आती रही हैं। पता नहीं इसकी जानकारी प्रहलाद जी को है या नहीं लेकिन उनसे इस संबंध में चर्चा करने पर इन षिकायतों का न केवल निराकरण हो सकेगा बल्कि सरकारी अनुदान की प्रक्रिया में व्याप्त विसंगतियों को भी दूर करने की पहल हो सकती। रंगमंच प्रेमी संस्कृति मंत्री से रंगकर्मियों को संवाद बनाने की दिषा में कदम उठाना चाहिए।

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