मैसेज बनाने के लिए मशक्कत

अब जबकि तय हो गया है कि राजा-महाराजा के साथ डॉक्टर राज्यसभा में जाएंगे। इसके बावजूद भाजपा और कांग्रेस में बैठकों का दौर लगातार चल रहा है तो इसके पीछे केवल यही है कि 24 विधानसभा की सीटों पर उप चुनाव के पहले यह मैसेज देना है कि दमखम के मामले में हम आगे हैं।

बसपा, सपा और निर्दलीयों को जोड़ने की क्षमता हम में भी है और रही सही कसर चुनाव के क्रास वोटिंग करा कर भी पूरी की जा सकती है और शायद यही कारण है कि कांग्रेस दिग्विजय सिंह के लिए दो वोट ज्यादा डलवाएगी जिससे जीत सुनिश्चित हो सके।
दरअसल विधायकों की संख्या के आधार पर तस्वीर पूरी तरह से साफ हो चुकी है कि भाजपा से पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और कांग्रेस से दिग्विजय सिंह राज्यसभा के लिए चुने जाएंगे लेकिन इसके बावजूद दोनों ही दल जिस तरह से बैठकें कर रहे हैं लंच और डिनर कर रहे हैं और जितनी मशक्कत चल रही है उसकी कोई जरूरत राज्यसभा चुनाव के लिए महसूस नहीं हो रही है लेकिन भविष्य के लिए मैसेज बनाना है। खासकर 24 सीटों पर होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए दमखम दिखाना है माहौल बनाना है। यही कारण है जोड़-तोड़ ऐसे चल रही है जैसे एक या दो वोट इधर-उधर हो जाने से परिणाम बदल जाएगा।

जहां तक निर्दलीयों बसपा और सपा विधायकों का सवाल है तो वे सत्ता के साथ ही रहना पसंद कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने 15 महीने के कांग्रेस शासनकाल में देखा है कि जो काम कांग्रेस के विधायक और मंत्री नहीं करा पाते थे वह काम यह विधायक करा लेते थे। निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल को तो खनिज विभाग जैसा महत्वपूर्ण विभाग भी दिया गया था। इन विधायकों को सत्ता का चस्का लगा है और भाजपा को विधायकों को तोड़ने में मजा आने लगा है। इससे यह मशक्कत चल रही है। भाजपा ने इन विधायकों को पार्टी के साथ जोड़कर भाजपा के उन विधायकों को भी संदेश दिया है जो बगावत कर सकते थे। साथी ही इन विधायकों को अभी से इसलिए भी जोड़ दिया है कि कहीं 24 सीटों के उपचुनाव में बहुमत के आंकड़े को बरकरार रखने में कोई कमी ना रह जाए। यदि कुछ सीटें हार भी जाते हैं तो उनकी पूर्ति इन विधायकों से की जा सके। उपचुनाव के बाद यदि शामिल करते तो यह विधायक अपनी शर्त पर रखते लेकिन अभी तो यह विधायक सरकार में जुड़ने की शर्त पर ही पार्टी में आ गए।

बहरहाल आज राज्यसभा के लिए मतदान होगा उसके लिए दोनों ही दलों ने 2 दिन में पूरी कसरत कर ली है। कांग्रेस की बैठक में जहां न केवल प्रथम वरीयता दी जाएगी। वहीं जीत के लिए जरूरी वोटों से 2 वोट ज्यादा दिलवाए जाएंगे जिससे कि यदि कहीं मतदान में गड़बड़ी हो जाए कोई चूक हो जाए या कोई विधायक का क्रॉस बोट कर जाए। तब भी दिग्विजय सिंह की जीत सुनिश्चित हो सके। कांग्रेस विधायक दल की बैठक पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बंगले पर हुई जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रदेश प्रभारी मुकुल वासनिक, दिग्विजय सिंह, सुरेश पचौरी कांतिलाल भूरिया एवं फूल सिंह बरैया विशेष रूप से उपस्थित थे। जबकि सत्ताधारी दल भाजपा राज्यसभा चुनाव के बहाने 24 सीटों पर होने जा रहे विधानसभा के उपचुनाव की तैयारी कर रही हैं और केंद्रीय नेताओं की उपस्थिति में मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले मंत्रियों के नाम भी तय कर रही है क्योंकि राज्यसभा चुनाव के बाद कभी भी मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। पार्टी की प्रबंध समिति की बैठक भी हुई जिसमें प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर, प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा, सुहास भगत, नरोत्तम मिश्रा, भूपेंद्र सिंह, उमाशंकर गुप्ता, बृजेश लुणावत एवं रामेश्वर शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे।

कुल मिलाकर आज सुबह 11:00 बजे से दोपहर बाद 4:00 बजे तक राज्यसभा की 3 सीटों के लिए मतदान होना है जिसके लिए विधानसभा सचिवालय ने तो अपनी तैयारी है पूरी कर ही ली है। दोनों ही प्रमुखजनों भाजपा और कांग्रेस में भी अपने विधायकों को पर्याप्त समझाइश दे दी है और यह भी तय हो गया है कि भाजपा से जहां ज्योतिरादित्य सिंधिया और डॉक्टर सुमेर सिंह चुने जाएंगे। वहीं कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह लेकिन इसके बावजूद दोनों ही दलों की ओर से मशक्कत जारी है जो कि शाम 4:00 बजे तक सभी वोटों की पड़ जाने तक रहेगी क्योंकि आगे के लिए दलो को मैसेज बनाना है और नेताओं को भी अपनी क्षमता दिखाना है।

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