nayaindia heart attack what to do दिल का दौरा पड़े तो क्या करें?
गेस्ट कॉलम | लाइफ स्टाइल | धर्म कर्म| नया इंडिया| heart attack what to do दिल का दौरा पड़े तो क्या करें?

दिल का दौरा पड़े तो क्या करें?

सबसे ज्यादा खतरा कोरोनरी हार्ट डिसीज (सीएडी) के पीड़ितों और बड़े दिल (लार्ज हार्ट) वालों को होता है। हार्ट वॉल्व में लीकेज, कॉग्नीजेन्टियल हार्ट डिसीज और इलेक्ट्रिकल इम्पल्स प्रॉब्लम वाले लोग भी इसकी चपेट में आ जाते हैं। इन रिस्क फैक्टरों के अलावा सेडेन्टरी (गतिहीन) लाइफस्टाइल, धूम्रपान, लगातार या अधिक मात्रा में मादक द्रव्यों का सेवन, हाई ब्लड प्रेशर. मोटापा, फैमिली हिस्ट्री, मेल जेन्डर, और शरीर में पोटेशियम तथा मैग्नीशियम की कमी से भी इसका रिस्क बढ़ता है।

मेडिकल साइंस के मुताबिक दिल की धड़कन इलेक्ट्रिकल इम्पल्सेस (विद्युतीय आवेगों) से कंट्रोल होती है। जब इन इम्पल्स का पैटर्न बदलता है तो दिल की धड़कन अनियमित और अनियन्त्रित यानी बहुत तेज या बहुत धीमी हो जाती है। दिल का दौरा तब पड़ता है जब ऐसा अक्सर होने लगता है।  दिल की किसी भी अन्य बीमारी से होने वाली मौतों की तुलना में दौरे से सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। हमारे देश में हर साल इसके 10 लाख से ज्यादा मामले सामने आते हैं इनमें से 60 प्रतिशत समय से इलाज न मिलने से जान गवां बैठते हैं और 20 प्रतिशत अपंग हो जाते हैं।

क्यों पड़ता है दिल का दौरा?

दिल का दौरा दो कारणों से पड़ता है- वेन्ट्रिकुलर और आर्टियल फिब्रिलेशन। दिल में चार चैम्बर होते हैं जिनमें नीचे के दो वेन्ट्रिकल्स कहलाते हैं। वेन्ट्रिकुलर फिब्रिलेशन में इनका कंपन अनियन्त्रित होने से धड़कन बदलती है जिससे वेन्ट्रिकल्स की रक्त पम्प करने की क्षमता घटने से शरीर में कम रक्त पम्प होता है, परिणाम दिल का दौरा।    दिल के ऊपरी चैम्बर आट्रिया कहलाते हैं, आर्टियल फिब्रिलेशन में सिनोट्रायल (एसए) नोड सही इलेक्ट्रिकल सिगनल नहीं भेज पाती। सिनोट्रायल (एसए) नोड, दांयी एट्रियम में होती है और इससे दिल के रक्त पम्प करने का प्रोसेस रेगुलेट होता है। वेन्ट्रिकल्स के पूरी क्षमता से रक्त पम्प न कर पाने का परिणाम है दिल का दौरा।

किन्हें ज्यादा खतरा?

इसका सबसे ज्यादा खतरा कोरोनरी हार्ट डिसीज (सीएडी) के पीड़ितों और बड़े दिल (लार्ज हार्ट) वालों को होता है। हार्ट वॉल्व में लीकेज, कॉग्नीजेन्टियल हार्ट डिसीज और इलेक्ट्रिकल इम्पल्स प्रॉब्लम वाले लोग भी इसकी चपेट में आ जाते हैं। इन रिस्क फैक्टरों के अलावा सेडेन्टरी (गतिहीन) लाइफस्टाइल, धूम्रपान, लगातार या अधिक मात्रा में मादक द्रव्यों का सेवन, हाई ब्लड प्रेशर. मोटापा, फैमिली हिस्ट्री, मेल जेन्डर, और शरीर में पोटेशियम तथा मैग्नीशियम की कमी से भी इसका रिस्क बढ़ता है।

दौरे से पहले क्या संकेत?

दौरा पड़ने से पहले मरीज में कुछ चेतावनी संकेत उभरते हैं जैसे सांस लेने में दिक्क्त, चक्कर आना, बहुत कमजोरी, धड़कन तेज होना, सीने में दर्द और उल्टी। यदि इन्हें पहचानकर मरीज को शीघ्र इलाज मिल जाये तो जान बच सकती है। अगर इन संकेतों के साथ मरीज फेंट हो जाये या मुश्किल से सांस ले पा रहा हो तो उसे तुरन्त अस्पताल ले जायें।

कैसे कन्फर्म होता है दिल का दौरा?

इसके लिये डाक्टर इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम टेस्ट करते हैं जिससे हार्ट की अनियमित धड़कन का पता चलता है। इसके अलावा कुछ ब्लड टेस्ट करके खून में पोटेशियम और मैग्नीशियम का लेवल पता करते हैं साथ ही चेस्ट एक्स-रे से पता लगाते हैं कि दिल में कोई और प्रॉब्लम तो नहीं।

इमरजेंसी मेडिकल केयर और इलाज

दिल का दौरा पड़ने पर इमरजेन्सी मेडिकल केयर से मरीज की जान बचायी जा सकती है। जितनी जल्दी हो सके उसे पास के अस्पताल ले जायें। ऐसे में दिये जाने वाले ट्रीटमेंट का मुख्य उद्देश्य शरीर में ब्लड सप्लाई रिस्टोर करना होता है। इसके लिये कार्डियोपुमोनरी रेसूसियेशन (सीपीआर) से दिल को रिवाइव करने का प्रयत्न करते हैं और डिफाइब्रिलेटर द्वारा दिल में इलेक्ट्रिक शॉक देते हैं। अनेक मामलों में इलेक्ट्रिक शॉक से दिल धड़कन सामान्य हो जाती है। यदि इन दोनों में से किसी भी विधि से मरीज की धड़कन रिस्टोर हो जाती है तो डाक्टर भविष्य में कार्डियक अरेस्ट रोकने के लिये उपचार के ये तरीके अपनाते हैं-

मेडीकेशन: दवाइयों से कोलोस्ट्रॉल, बल्ड प्रेशर और डाइबिटीज जैसी बीमारियों को कंट्रोल करते हैं।

सर्जरी: सर्जरी से दिल के डैमेज वॉल्व और रक्त वाहिकाओं को रिपेयर करते हैं। इसमें एंजियोप्लास्टी, बाइपास और अन्य विधियों से नसों की ब्लॉकेज हटाकर रक्त प्रवाह ठीक किया जाता है।

व्यायाम: दिल ठीक रखने का सबसे आसान उपाय है व्यायाम। नियमित व्यायाम से दिल में रक्त का प्रवाह ठीक रहता है जिससे कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ इम्प्रूव होती है। रोजाना 30 मिनट का व्यायाम या 45 मिनट टहलना हृदय स्वस्थ रखता है।

खान-पान: कम वसा (लो फैट) और कम नमक वाला शाकाहारी भोजन शरीर में कोलोस्ट्रॉल की मात्रा ठीक रखता है। भोजन में नमक और मीठा कम करने से ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल रहते हैं वहीं मोटापा भी कम होता है।

सही इलाज और खानपान से यदि आपका ब्लड प्रेशर 130/80 से कम, फास्टिंग ब्लड शुगर 70 से 100 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर के बीच, ब्लड कोलोस्ट्रॉल 180 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर के नीचे, बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 18.5 और 24.9 के मध्य, कमर का घेरा महिलाओं के लिये 35 इंच से कम तथा पुरूषों के लिये 40 इंच से कम रहता है तो दिल का दौरा पड़ने के चांस कम हो जाते हैं।

आउटलुक या नजरिया

दिल का दौरा पड़ना घातक कंडीशन है दौरे के कुछ मिनटों के अंदर किया गया ट्रीटमेंट सबसे ज्यादा फायदेमंद है। यदि एक बार दिल का दौरा पड़ चुका है तो भविष्य में इससे बचाने के लिये जरूरी दवाओं को हमेशा साथ रखें। कभी भी डाक्टर की बिना सलाह के डायोरेटिक (पेशाब लाने के लिये दी जाने वाली दवाइयां), एंटीबॉयोटिक, एंटीसायोटिक्स,एंटीडिप्रसेन्ट और सोडियम ब्लॉकिंग दवाइयां न लें। ज्यादा भारी व्यायाम न करें लेकिन हल्के व्यायाम नियमित करें। यदि मरीज डाइबिटीज और ब्लड प्रेशर से पीड़ित है तो इन्हें कंट्रोल करने वाली दवाइयों को नियमित और निर्धारित समय पर लें। उम्र बढ़ने के साथ हार्ट स्ट्रक्चर में बदलाव होते हैं, अगर मरीज जन्मजात किसी हृदय रोग से पीड़ित है तो उसे साल में दो बार कार्डियोलॉजिस्ट से मिलना चाहिये ताकि हृदय के स्ट्रक्चर में आ रहे परिवर्तनों के मुताबिक वह अपना मेडीकेशन और लाइफ स्टाइल मेन्टेन रखें। धूम्रपान और अन्य मादक द्रव्यों के सेवन से बचें। यदि एक बार दिल का दौरा पड़ चुका है तो जीवन भर के लिये धूम्रपान त्याग दें।

Tags :

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

4 × four =

ट्रेंडिंग खबरें arrow
x
न्यूज़ फ़्लैश
गुजरात में ‘रेवड़ियों” की बौछार!
गुजरात में ‘रेवड़ियों” की बौछार!