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कितनी कारगर कॉस्मेटिक सर्जरी?

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कॉस्मेटिक की अब छह शाखाएं हैं- कॉस्मेटिक, ट्रॉमा, रिकन्सट्रक्टिव, माइक्रो, बर्न और मैक्सियोफेसियल सर्जरी। आज खूबसूरती निखारने और युवा दिखने की चाह में इसका चलन दिनों-दिन बढ़ रहा है, इस बारे में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की एक रिपोर्ट से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रतिवर्ष दुनियाभर में करीब 15 करोड़ लोग खुद को निखारने के लिये किसी न किसी रूप में कॉस्मेटिक सर्जरी का सहारा लेते हैं और इसकी दर प्रतिवर्ष 3 प्रतिशत की गति से बढ़ रही है। How effective cosmetic surgery

दुनिया में शायद ही कोई ऐसा हो जो खूबसूरत और जवान न दिखना चाहे, उम्र बढ़ने के साथ यह चाहत और बढ़ती है, मेडिकल साइंस में हुई तरक्की से आज इस चाहत को आसानी से पूरा किया जा सकता है, किसी जमाने में जलने या जख्मों के निशान दूर करने के लिये चलन में आयी प्लास्टिक सर्जरी इतनी एडवांस हो चुकी है कि आज इसकी एक शाखा कॉस्मेटिक सर्जरी के रूप में सामने हैं। इससे चेहरा खूबसूसरत बनाने के अलावा शरीर के सभी अंगों को सुघड़-सुडौल बना सकते हैं जैसे- ब्रेस्ट, पेट, कमर, हिप्स, योनि, जांघें और बाजुएं। इसके बारे विस्तार से जानकारी के लिये मैंने दिल्ली के जाने-माने प्लास्टिक सर्जन डॉ. साहिल सिंगला (एम.बी.बी.एस, एम.एस, डीएनबी-जनरल सर्जरी, डीएनबी-प्लास्टिक सर्जरी) जो वर्तमान में दिल्ली के क्लाउड9 और लाइफ-लाइन हॉस्पिटल में अपनी सेवायें दे रहें हैं और 5000 से ज्यादा सफल प्लास्टिक सर्जरी कर चुके हैं से बात की तो उन्होंने बताया कि-

प्लास्टिक सर्जरी में इस्तेमाल शब्द प्लास्टिक एक ग्रीक शब्द प्लास्टिके से आया है जिसका अर्थ होता है- रिशेपिंग या रिकन्सट्रक्सन। कहते हैं कि अपने देश इसकी शुरूआत ईसा से करीब 700 साल पहले महर्षि सुश्रुत ने की थी। आज इसकी छह शाखायें हैं- कॉस्मेटिक, ट्रॉमा, रिकन्सट्रक्टिव, माइक्रो, बर्न और मैक्सियोफेसियल सर्जरी। आज खूबसूरती निखारने और युवा दिखने की चाह में इसका चलन दिनों-दिन बढ़ रहा है, इस बारे में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की एक रिपोर्ट से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रतिवर्ष दुनियाभर में करीब 15 करोड़ लोग खुद को निखारने के लिये किसी न किसी रूप में कॉस्मेटिक सर्जरी का सहारा लेते हैं और इसकी दर प्रतिवर्ष 3 प्रतिशत की गति से बढ़ रही है।

आज शरीर की सुंदरता और सुघड़ता बढ़ाने के लिये ये एस्थेटिक प्रोसीजर उपलब्ध हैं-

ब्रेस्ट एग्यूमेन्टेशन (इन्लार्जमेन्ट): छोटे स्तन या सपाट सीने वाली ज्यादातर महिलाएं हीन भावना से ग्रस्त हो जाती है। ऐसे में मेमोप्लास्टी से ब्रेस्ट एग्यूमेन्टेशन किया जाता है। इसमें सिलिकॉन जेल प्रोस्थेटिक इम्प्लॉन्ट करके स्तनों का आकार बढ़ाते हैं। प्रेगनेन्सी या शिशु स्तनपान से स्तनों का असमान आकार यानी एक बड़ा तथा एक छोटा होने और उम्र बढ़ने के साथ स्तन ढिलकने (ड्रॉप) होने पर इसी प्रोसीजर से उन्हें ठीक किया जाता है।

ब्रेस्ट रिडक्शन: बड़े स्तनों ( हैवी ब्रेस्ट) से हो रही असुविधा और स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्यायें दूर करने के लिये ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी से इनका आकार कम करते हैं। इससे असुविधा दूर होने के साथ ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क घटता है, शोध से सामने आया है कि हैवी ब्रेस्ट वाली महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क अन्य की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक होता है।

मैस्टोपेक्सी या ब्रेस्ट फिट: इसमें स्तनों के ढीले टिश्यू रिमूव तथा स्वस्थ टिश्यू रि-अरेंज करके ब्रेस्ट को सुघड़-सुडौल (लिफ्ट) किया जाता है। कई बार सिलिकॉन इम्प्लॉन्ट भी किया जाता है, यह इस पर निर्भर है कि ब्रेस्ट के कितने टिश्यू स्वस्थ हैं, स्वस्थ टिश्यू की मात्रा कम होने पर सिलिकॉन इम्प्लॉन्ट की जरूरत होती है। इन प्रोसीजरों का खर्च एक से सवा लाख तक आता है।

एब्डोमिनोप्लास्टी या टमी-टक प्रोसीजर: इसमें ढिलके-लटके पेट को नया आकार देकर फ्रिम (टाइट)  करने के लिये मध्य व निचले पेट से अतिरिक्त त्वचा तथा वसा हटाते हैं। वजन कम करने या डिलीवरी के बाद मोटी महिलाओं के पेट की खाल लटकने पर इसी प्रोसीजर से पेट को पहले वाली शेप में लाते हैं। इसका अधिकतम खर्च 1.5 लाख तक आता है जोकि अस्पताल के स्टैंडर्ड पर निर्भर है।

वुल्वोवैजिनल/जिनाइटल (योनि) रिजुवेशन सर्जरी: इसमें महिला जननांग (योनि) के प्रमुख भाग लेबिया (भगोष्ठ) की एक्सट्रा लम्बाई को वेजिनोप्लास्टी से कम किया जाता है। लैबियाप्लास्टी, लैबियोप्लास्टी, वुल्वा लेबिया मिनोरा सर्जरी से बच्चे की डिवीलरी के बाद योनि में आये ढीलेपन या बिगड़ी शेप सुधारते हैं। डॉ. साहिल ने बताया आजकल हायमनोप्लास्टी बहुत कॉमन हैं। इससे योनि में नयी कौमार्य झिल्ली लगाते हैं ताकि कौमार्य भंग होने का पता न चले। 35 से 50 हजार में होने वाली इस सर्जरी से, योनि फिर से वर्जिन हो जाती है, प्रोसीसर के दो सप्ताह बाद महिला सेक्स सम्बन्ध स्थापित कर सकती है। जिनाइटल रिजुवेशन का कोई भी प्रोसीजर हो अधिकतम खर्च 60 हजार रूपये और रिकवरी समय 6 सप्ताह तक होता है।

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नितंब वृद्धि (बटक अग्मेन्टेशन) सर्जरी: इसमें नितंबों को बड़ा (सुडौल) बनाते हैं, आम भाषा में इसे “ब्राज़ीलियाई बट लिफ्ट” कहते हैं। सर्जन लिपोसक्शन से शरीर के दूसरे हिस्से की वसा (फैट) को नितंबों में ग्राफ्ट करते हैं, जरूरत होने पर सिलिकॉन प्रोस्थेटिक्स भी प्रत्यारोपित किये जाते हैं।

नितंबों और शरीर के निचले भाग को लिफ्ट करने में कूल्हों और जांघों से अतिरिक्त त्वचा हटाकर कसावट और उठान (लिफ्ट) लाते हैं। इस प्रोसीजर को एब्डोमिनोप्लास्टी के साथ उन मरीजों पर प्रयोग किया जाता है जिन्होंने बेरिएट्रिक (वेट रिडक्शन) सर्जरी के बाद काफी मात्रा में वजन कम किया हो।

पुरूष ब्रेस्ट रिडक्शन: कुछ पुरूषों में मोटापे या हारमोन असंतुलन से छाती बढ़कर (गॉयनेकोमास्टिया)  लटक जाती है, इसे लिपोसक्शन से ठीक किया जाता है।

डॉयबेटिक फुट/बेड सोर सर्जरी: मधुमेह या बेड सोर की वजह से पैरों के जख्मों और पीठ की खराब स्किन को इस सर्जरी से ठीक किया जाता है। इसमें करीब 50 हजार का खर्च आता है।

लिपोसक्शन क्या है?

लिपोसक्शन या सक्शन-असिस्टेड लिपेक्टोमी में अल्ट्रासाउंड, लेजर और कुछ मैकेनिकल डिवाइसों को इस्तेमाल करते हुए एक ट्यूब (कैनुला) के जरिये शरीर के विभिन्न हिस्सों, आमतौर पर पेट, जांघों, नितंबों, कूल्हों, बाहों के पिछले हिस्से और गर्दन से वसा (फैट) को निकालते हैं। पुरुषों के बढ़े स्तन भी इसी से कम करते हैं। इसमें कॉम्प्लीकेशन रेयर हैं लेकिन कुछ लोगों में त्वचा के नीचे रक्त संचय यानी हेमेटोमा, इंफेक्शन, संवेदना में परिवर्तन, एलर्जिक रियेक्शन तथा त्वचा की अंदरूनी संरचनाओं को नुकसान हो सकता है, कई बार अपेक्षित परिणाम भी नहीं मिलते। रोगी को अस्पताल से तुरन्त छुट्टी दे दी जाये या उसे भर्ती रखा जाये यह निकाले गये फैट की मात्रा पर निर्भर करता है। यह याद रखें कि लिपोसक्शन से मधुमेह, हृदय रोग या उच्च रक्तचाप का जोखिम कम नहीं होता।

फेसियल कॉस्मेटिक सर्जरी

इसमें नैन-नक्श खूबसूरत बनाने के लिये ये प्रोसीजर इस्तेमाल होते हैं-

ब्लेफेरोप्लास्टी (पलक) सर्जरी: बढ़ती उम्र के साथ त्वचा ढीली पड़ने से ऊपरी पलकें ढलकने व निचली पलकों पर बैग बन जाते हैं, इन्हें फिर से आकार देने हेतु ब्लेफेरोप्लास्टी की जाती है, यह सर्जरी फंक्शनल, कॉस्मेटिक या दोनों तरह की हो सकती है। इसमें अतिरिक्त त्वचा हटाकर या वसा का स्थान बदलकर आंख के आसपास की मांसपेशियां और टेंडन सुदृढ़ किये जाते हैं। यह याद रखें कि इस प्रोसीजर में त्वचा कसने से चेहरे की शेप में कुछ बदलाव आ सकता है। इसका खर्च 40 से 50 हजार के बीच आता है।

राइनोप्लास्टी: इसे “नोज जॉब” के रूप में जाना जाता है, सर्जन रोगी की नाक को फिर से आकार देता है ताकि एपीयरियेंस में सुधार और सांस लेने में हो रही कठिनाई दूर हो। इस प्रोसीजर में नोज टिप को रिशेप करने के अलावा नाक के ऊपरी हिस्से में निकली हड्डी भी कम की जाती है। राइनोप्लास्टी 15 वर्ष की उम्र के बाद करानी चाहिये ताकि नाक की कार्टिलेज और हड्डी का पूर्ण विकास हो सके।

ओटोप्लास्टी: इसमें सर्जरी और टांकों (पिनिंग) से कान (त्वचा/कार्टिलेज) में हुए कटाव तथा शेप को ठीक किया जाता है आमतौर पर यह प्रक्रिया 5-6 साल उम्र के बाद ही की जाती है क्योंकि इस उम्र तक कान पूरा आकार ले चुके होते हैं।

राइटिडेक्टमी: इस फेसलिफ्ट प्रोसीजर में सर्जरी से चेहरे की झुर्रियां हटाकर त्वचा में कसावट लाते हैं जिससे मरीज लम्बे समय तक युवा लगे। सर्जरी में लगने वाला चीरा आमतौर पर कान के सामने और पीछे रखा जाता है जो टेम्पल एरिया में हेयरलाइन तक जा सकता है। चेहरे की त्वचा टाइट करने के लिये की गहराई में मौजूद ऊतकों व अतिरिक्त त्वचा हटाकर चीरे को टांकों से बंद कर देते हैं। बहुत से मामलों में चेहरे के साथ गर्दन के ऊतक (टिश्यू)  भी टाइट करने  पड़ते हैं। इसके साथ ब्लेफेरोप्लास्टी या पलक सर्जरी भी की जा सकती है।

ब्रोप्लास्टी: ब्रो लिफ्ट, ब्रोप्लास्टी या फोरहेड लिफ्ट का उद्देश्य झुकी भौहें उठाकर व माथे की झुर्रियां या चिंता की रेखायें हटाकर उम्र बढ़ने के संकेतों को दूर करना है। अधिक सामंजस्यपूर्ण चेहरे की एपीरियेन्स के लिए इसे अक्सर अन्य कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं के साथ किया जाता है।

चिन ऑग्यूमेन्टेशन: इसका उद्देश्य चेहरे के फीचर्स संतुलित करने के लिये ठोड़ी को अधिक प्रमुखता देना है। ऐसा कृत्रिम प्रत्यारोपण के साथ या ठोड़ी की हड्डी में हेरफेर करके किया जाता है। आमतौर पर यह राइनोप्लास्टी के साथ होता है।

चीक ऑग्यूमेन्टेशन: इसे मलेर या गाल वृद्धि भी कहते हैं जिसमें चेहरे पर चीकबोन्स को अधिक प्रमुखता दी जाती है, इसके लिये सर्जन चीकबोन्स के शीर्ष पर इम्प्लांट लगाते हैं।

पील्स, फिलर्स, ग्राफ्ट्स और लेजर ट्रीटमेंट

मामूली चीर-फाड़ वाली (लेस इन्वेसिव)  इस तकनीक में ट्रीटमेंट के रूप में पील्स, फिलर्स, इन्जेक्शन् और लेजर ट्रीटमेंट इस्तेमाल होता है, आज की मार्डन सोसाइटी में इसका चलन सबसे ज्यादा है, आइये जानें और समझें कि ये सब क्या हैं-

कैमिकल पील्स: ये हल्के और गहरे रंग वाली यानी दोनों तरह की त्वचा के लिए सुरक्षित और प्रभावी होते हैं। इससे मुंहासे, मुंहासों के निशान, आम निशान या झुर्रियां दूर करते हैं, इनमें कई तरह के सक्रिय रसायन प्रयोग किये जाते हैं। लाइट या सुपरफिसियल पील्स के रूप में अल्फा हाइड्रॉक्सी एसिड (एएचए) जैसे ग्लाइकोलिक, लैक्टिक या फलों का एसिड इस्तेमाल होता है। मीडियम पील्स में अलग-अलग सान्द्रता (कन्सन्ट्रेशन) के ट्राई-क्लोरोएसेटिक एसिड इस्तेमाल किये जाते हैं, ये त्वचा में ज्यादा गहराई तक जाते हैं। डीप पील जिसे फिनोल पील कहते हैं के त्वचा में सबसे ज्यादा गहराई तक प्रवेश करने की वजह से त्वचा के पुनरुत्थान (स्किन रिसरफेसिंग) पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है।

बोटोक्स:  इसे बोटुलिनम टॉक्सिन भी कहते हैं यह क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम जीवाणु द्वारा निर्मित एक विष है जो आज एक ब्रांड के रूप में ज्यादा प्रचलित है। इसे पहली बार 1980 के दशक में मांसपेशियों की ऐंठन के इलाज के लिये एफडीए द्वारा अनुमोदित किया गया था। आज इसका प्रयोग चेहरे और शरीर के अन्य अंगों की झुर्रियां दूर करने में होता है। यह विष नर्व से मांसपेशी तक पहुंचने वाले सिगनल अवरूद्ध करता है जिससे मांसपेशी रिलेक्स मोड में आ जाती है, इसे इंजेक्शन के जरिये झुर्रियों वाली त्वचा में लगाते हैं। इसका सर्वाधिक प्रयोग माथे और आंखों के चारों ओर की रेखाएं हटाने में होता है। बगलों (आर्मपिट्स) में ज्यादा पसीना आने का इलाज भी इसी से होता है। वर्तमान में बोटुलिनम टॉक्सिन, बोटोक्स के अलावा और भी कई नामों से बाजार में उपलब्ध है।

सॉफ्ट टिश्यू या डर्मल फिलर्स: एफडीए स्वीकृत इस तकनीक का इस्तेमाल चेहरे की सिलवटें/झुर्रियां हटाकर त्वचा को चिकना और जवान लुक देने में होता है। इसका उपयोग नासोलैबियल सिलवटों, गालों और होंठों के अलावा हाथ के पिछले हिस्से की सिलवटें हटाने में होता है साथ ही झुर्रियों, रेखाओं और अन्य निशान भी कम हो जाते हैं। सॉफ्ट टिश्यू भरने से सिलवटें हटती हैं और त्वचा जवान दिखाई देती है। याद रखें कि ये इलाज स्थायी नहीं है जब शरीर सॉफ्ट फिलर्स एब्जार्ब (आमतौर पर 12 से 18   महीनों में) कर लेता है तो इस प्रक्रिया को दोहराना पड़ता है। सॉफ्ट फिलर्स जेल फॉर्मूलेशन में आते हैं जिन्हें विशेष इंजेक्शन के जरिये त्वचा की गहरी परतों और चेहरे के अंतर्निहित सॉफ्ट टिश्यूज में इंजेक्ट करते हैं। वैसे तो यह सेफ हैं लेकिन कुछ लोगों को कॉम्प्लीकेशन हो सकते हैं इसे अपनाने से पहले फिलर सामग्री की अच्छी तरह जांच व डॉक्टर से इस बारे में बात करें। सन् 2015 में, यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने चेतावनी दी थी कि अगर चेहरे की रक्त वाहिकाओं में सॉफ्ट फिलर्स गलती से इंजेक्ट हो जाये तो गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

फैट इंजेक्शन/ फैट ग्राफ्टिंग: इसमें रोगी की खुद की वसा को लिपोसक्शन से शरीर के एक हिस्से से एकत्र करके आवश्यकता वाले क्षेत्रों में इंजेक्ट करते हैं। इसे आमतौर पर चेहरे पर लगाया जाता है, जिसमें होंठ, हाथ और त्वचा के वे स्थान होते हैं जहां गड्ढे पड़ गये हैं। इसके परिणाम सुरक्षित और लंबे समय तक चलने वाले होते हैं और वसा को ऐसी जगह से हटाने का अतिरिक्त लाभ होता है जहां यह नहीं चाहिए। लिपोसक्शन से हटायी वसा को शुद्ध करके विशेष रूप से डिज़ाइन सुइयों के साथ सावधानीपूर्वक पुन: जरूरी जगहों पर इंजेक्ट करते हैं। वांछित परिणाम के लिए प्रक्रिया कई बार दोहरानी पड़ती है।

स्टेम सेल इन-रिच्ड फैट ग्राफ्ट: यह रिकन्सट्रक्टिव तकनीक अभी शुरूआती दौर में है लेकिन इसके परिणाम आशाजनक और प्रोसीजर विश्वसनीय, सुरक्षित तथा प्रभावी है। कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे प्लास्टिक और कॉस्मेटिक सर्जरी का केन्द्र बिंदु बनाने से पहले इस पर और शोध की जरूरत है क्योंकि स्टेम सेल्स की वजह से ट्यूमर ग्रोथ भी हो सकती है।

लेजर एंड लाइट बेस्ड फेसियल ट्रीटमेंट:  फेशियल लेजर रिसर्फेसिंग या लेजर स्किन ट्रीटमेंट के नाम  से प्रचलित इस ट्रीटमेंट से चेहरे की महीन रेखाओं, झुर्रियों और असामान्य पिगमेन्टेशन, जैसे कि सनस्पॉट इत्यादि कम करते हैं। इसमें भी वांछित परिणाम के लिये कई  सिटिंग्स की जरूरत पड़ती है।

हेयर ट्रांसप्लांटेशन

कॉस्मेटिक सर्जरी के तहत होने वाली इस विशेष सर्जरी से सिर में पुन: बाल उगाने को हेयर ट्रांसप्लान्टेशन कहते हैं। स्कल्प (खोपड़ी) के पिछले हिस्से जहां घने बाल होते हैं से छोटे हेयर फॉलिकल ग्राफ्ट लेकर खोपड़ी के उन क्षेत्रों में जहां के बाल झड़ गये हैं बहुत छोटा चीरा (मिनट इन्सीजन्स) लगाकर प्रत्यारोपित करते हैं। वांछित परिणाम के लिये कई सेशन्स होते हैं,  6 सप्ताह बाद प्रत्यारोपित बाल झड़ जाते हैं और नए बाल उगने लगते हैं, इसमें करीब तीन महीने का समय लगता है।

साइड इफेक्ट क्या-क्या?

डॉ. साहिल के मुताबिक प्लासटिक सर्जरी में आमतौर पर कोई समस्या नहीं आती बर्शते ड़ॉक्टर अनुभवी और अस्पताल अच्छा हो। लेकिन लाखों में किसी एक को असामान्य दर्द, देखने में दिक्कत, इंजेक्शन स्थल के पास सफेद त्वचा और स्ट्रोक के लक्षण उभर सकते हैं। यदि पीड़ित बॉडी डिस्मार्फिक डिस्आर्डर का शिकार है तो अपेक्षित परिणाम का 50 प्रतिशत भी बड़ी सफलता माना जाता है।

इन बातों का ध्यान रखें

– हमेशा अनुभवी डॉक्टर (प्लास्टिक सर्जन) और अच्छे अस्पताल का चयन करें। डॉक्टर को सर्जरी के अलावा सौन्दर्य़-बोध यानी एस्थेटिक्स का ज्ञान होना जरूरी है।

– कॉस्मेटिक सर्जरी को हल्के में न लें, इसके परिणाम स्थायी होते हैं इसलिये सर्जरी का निर्णय बहुत सोच समझकर लें। सर्जन की राय के बाद निर्णय स्वयं लें और कुछ भी ऐसा न चुनें जो आप पहले से नहीं जानते या नहीं चाहते।

– कॉस्मेटिक प्रोसीजर के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करें और उसके अच्छे/बुरे पहलुओं से अवगत रहें। प्रोसीजर के जोखिमों और सीमाओं से अवगत रहें, उदाहरण के लिए, क्या इसे 6 महीने में फिर से दोहराना होगा?

– जरूरी नहीं कि आपकी सौन्दर्य सम्बन्धी चाहत किसी एक प्रोसीजर से पूरी हो, यह भी हो सकता है कि आपको सर्जिकल प्रोसीजर, फिलर्स, फैट ग्राफ्ट और बोटोक्स इत्यादि सभी का इस्तेमाल करना पड़े।

– प्रोसीजर के लिये तनावपूर्ण घटना के आसपास का समय न चुनें, जैसे कि नौकरी बदलना, शोक मनाना, बच्चा पैदा करना इत्यादि। किसी को खुश या प्रभावित करने के लिए कभी भी कॉस्मेटिक सर्जरी न करायें।

– सर्जरी के लिए बहुत दूर न जायें, यदि जाना जरूरी है, तो सुनिश्चित करें कि व्यवस्थाएं विश्वसनीय हों, खासकर यदि विदेश में सर्जरी का विकल्प चुना हो।

– सर्जरी से कुछ महीने पहले धूम्रपान या तंबाकू उत्पादों का सेवन बंद करें इससे घाव जल्दी भरते हैं।

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