‘उपचुनाव’ यदि समय पर तो फिर कांग्रेस में ‘भगदड़’ …..

मध्य प्रदेश में पिछले दिनों सर्वसम्मति से विधानसभा का बजट सत्र स्थगित किए जाने का फैसला तब सामने आया, तो लगा कि कोरोना के चलते उपचुनाव हर हाल में टाले जाएंगे। तो कांग्रेस में मची भगदड़ पर भी विराम लगने के संकेत मिले.. खासतौर से बड़ा मलहरा विधायक प्रद्युम्न लोधी के कांग्रेस से इस्तीफा दे भाजपा में शामिल होने के बाद इसी समुदाय के 2 दूसरे कांग्रेस विधायकों द्वारा मीडिया के जरिए आरोप लगाया गया कि बीजेपी प्रलोभन दे रही.. ऐसे भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के पी सिंह जो कमलनाथ सरकार में मंत्री नहीं बनाए गए उन्होंने पार्टी की विधायक दल की बैठक में भाग लिया लेकिन अचानक संसदीय मंत्री नरोत्तम मिश्रा से मिलने जा पहुंचे.. सोमवार को हुई इस मुलाकात की गोपनीयता को दोनों नेताओं और राजनीतिक दलों द्वारा कोई विशेष टिप्पणी नहीं की गई.. इस बीच मध्य प्रदेश के लिए सोमवार को दो बड़ी खबर पहली.. अचानक दिल्ली से मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा कहीं गई बात से उपचुनाव को लेकर निकलकर सामने आई.. तो संयोग से दूसरी बड़ी खबर इसी दिन सरसंघचालक मोहन भागवत और दूसरे अखिल भारतीय पदाधिकारियों के भोपाल में इकट्ठे होने से निकली.. संघ का अपना पूर्व निर्धारित एजेंडा जिसमें उपचुनाव का भले ही कोई ज्यादा लेना देना नहीं है।

बावजूद इसके मध्य प्रदेश का राजनीतिक परिदृश्य बदलने और शिवराज के नेतृत्व में भाजपा की सरकार फिर बनने को संघ भी नजरअंदाज नहीं कर सकता.. संघ के लिए सवाल सिर्फ भाजपा की सरकार लौटने और कमलनाथ सरकार के तख्तापलट तक सीमित नहीं है.. संघ के लिए भी इस सरकार की स्थिरता और उसके लिए उपचुनाव महत्वपूर्ण माने जाएंगे.. कुछ दिन पहले तक मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र से पहले प्रोटेम स्पीकर द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद राज्यपाल से सदन को स्थगित करने पर फैसला लिया गया था.. यानि भाजपा और कांग्रेस जैसे प्रमुख राजनीतिक दल नहीं चाहते की कोविड-19 द्वारा बढ़ाई गई समस्याओं के बीच मध्य प्रदेश का विधानसभा विवादों का कारण बने जिससे समस्या में इजाफा हो.. खुद जिसके आधा दर्जन से ज्यादा विधायक कोरोना पॉजिटिव और क्वारंटाइन हुए हैं ..पिछले एक पखवाड़े में ग्वालियर चंबल से लेकर इंदौर हो या फिर भोपाल और दूसरे जिले जिस तरह कोरोना ने अपने पैर पसारे ।

उसने राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी थी.. खुद जिम्मेदार नेता भी अब यह स्वीकार करने लगे कि हालात बिगड़े हैं और कोरोना रिटर्न की स्थिति निर्मित हुई… मध्य प्रदेश के इन बदलते हालातों को लेकर या तो मुख्य चुनाव आयुक्त पूरी तरह से अपडेट नहीं थे.. या फिर वो यह जानते हुए कि स्थिति भविष्य में भी अचानक सुधरने वाली नहीं .. तो कब तक उपचुनाव को डाला जाए… इसलिए संवैधानिक व्यवस्था को जरूरी सुधार के साथ लागू करना उचित होगा ..मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने आर्टिकल 324 का हवाला देकर चुनाव टाले जाने के वैधानिक पक्ष को भी सामने रखा.. इस विकल्प के साथ उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव की अपनी बड़ी प्राथमिकता का जिक्र कर उपचुनाव को समय रहते करा लिए जाने पर अपना इरादा भी जाहिर कर दिया.. सुनील अरोड़ा ने मंगलवार को होने वाली रूटीन बैठक के एजेंडे की ओर भी देश का ध्यान आकर्षित किया।

जिसमें तमाम चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रेजेंटेशन के बाद ही अंतिम निष्कर्ष लिया जाएगा… सवाल खड़ा होना लाजमी है क्या सिर्फ बिहार उपचुनाव समय पर संपन्न हो इसलिए मध्य प्रदेश समेत कुल 45 सीटों पर उपचुनाव को लेकर आयोग गंभीर है.. क्या कोरोना की समस्या के चलते इन उपचुनावों को बिहार विधानसभा के साथ कराने का विकल्प खुला रहेगा… या फिर बिहार चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए कोई गलत संदेश न जाए.. इसलिए चुनाव आयोग तमाम चुनौतियों से वाकिफ होने के बावजूद इन उप चुनाव के जरिए संदेश बिहार ही नहीं पश्चिम बंगाल को भी देना चाहता है ..तो क्या यह मान लिया जाए कि कोरोना के चलते चुनाव टालने का चुनाव आयोग का कोई इरादा नहीं है।

तो सवाल यदि आयोग चुनाव को लेकर व्यवस्थाओं में बदलाव को लेकर ज्यादा संजीदा है ..तो क्या मतदान की समय सीमा.. उसके चरण और ज्यादा बढ़ाने के साथ सोशल डिस्टेंस बनाए रखने के लिए मतदान केंद्रों की संख्या में भी इजाफा करेगी… चुनाव प्रचार में वर्चुअल रैलियों के उपयोग और उसकी सार्थकता को ध्यान में रखते हुए मतदान के लिए भी आधुनिक तकनीक के बेहतर सुविधाजनक उपयोग की ओर आयोग आगे बढ़ेगा …चुनाव प्रचार की गाइड लाइन में बदलाव और सख्ती को लेकर आखिर आयोग कितना गंभीर नजर आएगा.. क्या आने वाले समय में उत्तर प्रदेश उससे पहले पश्चिम बंगाल और उससे भी पहले बिहार को वह कोरोनकाल में आदर्श राज्य साबित करने का मानस बना चुका है .. दूसरे देशों में कोरोना की गाइडलाइन के साथ यह चुनाव संपन्न कराकर यह संभव किया जा चुका है ..सवाल क्या यह सब भारत में फिलहाल संभव है।

आखिर संविधान में विशेष प्रतिकूल परिस्थितियों में समय सीमा खत्म होने के बाद भी चुनाव कराए जाने का प्रावधान है ..तो फिर क्या कोरोना को चुनाव आयोग कोई बड़ी चुनौती नहीं मानता है… या फिर हालात उसकी नजर में इतने नहीं बिगड़े हैं कि चुनाव टाले जाएं.. जहां तक बात मध्य प्रदेश के बदलते राजनीतिक परिदृश्य और उपचुनाव की सरगर्मियों को लेकर है… तो ना सिर्फ विधानसभा सत्र स्थगित किया जा चुका .. जबकि विधायक पाला बदल रहे और किसी भी राजनीतिक दल की प्रतिद्वंदिता और प्रतिस्पर्धा से इनकार नहीं किया जा सकता.. राजनीतिक दलों का शीर्ष नेतृत्व अब भीड़-भाड़ से दूर रहने का मानस बना चुका है.. सरकार द्वारा पुरानी गाइडलाइन नए सिरे से संशोधन के साथ लागू कर जागरूकता अभियान पर भी फोकस बनाया जा चुका.. तो यह भी सच है कांग्रेस हो या फिर भाजपा उसके नेता और कार्यकर्ता उपचुनाव वाले क्षेत्रों में न सिर्फ सक्रिय हैं… बल्कि चुनाव की तैयारियों को लेकर कितने गंभीर … इसका अंदाजा सियासी आरोप-प्रत्यारोप और उसके तौर-तरीकों पर लगाया जा सकता है।

यही नहीं शिवराज सरकार में मंत्री की शपथ लेने वाले अपने नेता विधानसभा क्षेत्रों में स्वागत अभिनंदन में विशेष दिलचस्पी भी ले रहे हैं.. यही नहीं कमलनाथ और शिवराज शिवराज दोनों ही पार्टी स्तर पर बंद कमरे में चुनाव की रणनीति को भी आगे बढ़ा रहे हैं.. यही नहीं उपचुनाव सीट संख्या में भी बदस्तूर इजाफा होने का सिलसिला जारी है …जब कांग्रेस से मोहभंग कर विधायक इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम रहे.. सवाल मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा उपचुनाव को लेकर दिए गए संकेतों के बाद क्या मध्य प्रदेश कांग्रेस में भगदड़ बढ़ेगी…. या फिर पूरी तरह थम जाएगी.. सवाल क्या गारंटी है कि 26 विधानसभा सीटों पर ही चुनाव होंगे पर इसके बाद कम से कम इस्तीफे की नौबत नहीं बनेगी जिससे उपचुनाव का सिलसिला फिर आगे बढ़े.. सवाल यह भी खड़ा होता है जिस तरह विधानसभा के उपचुनाव की सीट संख्या सत्ता परिवर्तन के बाद भी बढ़ रही है।

यह शिवराज और उनकी भाजपा के लिए या फिर कमलनाथ और कांग्रेस के लिए परेशानी में इजाफा करेगी.. मध्यप्रदेश में टीम भागवत यानी संघ का शीर्ष नेतृत्व जिसमें उनके अखिल भारतीय पदाधिकारी शामिल है ..देश दुनिया के ज्वलंत मुद्दों पर चिंतन मंथन के लिए भोपाल में इकट्ठे हो चुके.. क्या ऐसे में कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले विधायकों को भाजपा द्वारा सिर माथे पर बैठाने का सिलसिला जारी रहेगा.. क्या प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा की नई टीम का ऐलान भी इस दौरान कर दिया जाएगा.. टीम भागवत की विस्तारक बैठक का सिलसिला सोमवार को छोटी बैठक के साथ शुरू हो चुका है ..तो मंगलवार से यह कोरोना काल मे नई चुनौतियों और अपने पूर्व निर्धारित एजेंडे से जुड़े विषय विशेष पर आगे बढ़ेगा.. इसके अंतिम दिन भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष समेत पार्टी के और दूसरे अन्य नेताओं की संघ पदाधिकारियों से मुलाकात संभव है।

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