सड़क से लेकर सदन तक कांग्रेस की कमान कमलनाथ के हाथ

दरअसल, देश-प्रदेश में कांग्रेस अपनों से परेशान है। मध्यप्रदेश में झटका खाने का सिलसिला अभी थमा नहीं है। 22 विधायकों के बागी होने के बाद सरकार से हाथ धो बैठे कांग्रेसी जहां सत्ता वापसी की उम्मीद लिए हुए हैं, वहीं बड़ा मलहरा के विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी के भाजपा में चले जाने के बाद कांग्रेस हतप्रभ है और विधायकों को संभालने के जतन कर रही है।

यही कारण है कि कमलनाथ ने दमोह विधायक राहुल लोधी और बंडा विधायक तरवर लोधी को बुलाकर उनसे चर्चा की। कांग्रेस 20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के सत्र में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराना चाह रही है।

इसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने नेता प्रतिपक्ष की कमान संभालेंगे। वैसे तो पार्टी की योजना थी कि मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के वितरण के बाद भाजपा खेमे के विधायकों में कितना असंतोष है इसको नापने के लिए पार्टी बजट सत्र के दौरान मतदान की मांग रखेगी लेकिन एक और विधायक द्वारा पार्टी छोड़ देने के बाद अब पार्टी को अपने ही विधायकों को संभालने के लिए जोर लगाना पड़ रहा है। ऐसे में नए सिरे से यदि नेता प्रतिपक्ष का चयन किया जाता तो हो सकता है पार्टी के अंदर और भी असंतोष पनप सकता था। यही कारण है कि अपने विधायकों को संभालने और भाजपा सरकार को भेजने के लिए पार्टी में कमलनाथ के हाथ में ही नेता प्रतिपक्ष की बागडोर सौंपने का फैसला लिया है।

बहरहाल, विधानसभा के बजट सत्र की तैयारियां कोरोना महामारी के कारण सतर्कता और सावधानी को दृष्टिगत रखते हुए की जा रही हैं। पहले तो बजट सत्र को आगे बढ़ाए जाने की अटकलें लगाई जा रही थी लेकिन सरकार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अब सीमित पास जारी करके और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए यह सत्र आयोजित किया जा रहा है। सरकार बदलने के बाद पहली बार बदली हुई परिस्थितियों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक आमने-सामने होंगे। प्रतिशोध की ज्वाला में जल रही कांग्रेस जहां सत्ताधारी दल के विधायकों और मंत्रियों को सरकार को घेरने ने की जमकर तैयारियां कर रही है। वहीं सत्ताधारी दल भाजपा भी विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए अपने अनुभवी मंत्रियों और विधायकों को जिम्मेवारी सौंप रही है।

विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से एक तरह से कैबिनेट शैडो बनाई गई है जिसमें विधायक, मंत्रियों को गिरने के लिए विभागवार तैयारी कर रहे हैं। भाजपा जिस तरह से कांग्रेस विधायकों में सेंधमारी कर रही है उससे विपक्षी दल कांग्रेस को भाजपा सरकार को खेलने के लिए जितनी तैयारियां करना है उतनी ही तैयारियां सतर्कता और सावधानी अपने विधायकों को भी संभालने के लिए करना है। पार्टी ने 19 जुलाई को विधायक दल की बैठक बुलाई है जिसमें रणनीति बनाई जाएगी कि सदन के अंदर कैसे सरकार को घेरा जाए। इस बैठक में सभी विधायकों को आवश्यक रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। भाजपा भी विधायक दल की बैठक में विपक्षी दल को जवाब देने के लिए रणनीति बनाएगी।

कुल मिलाकर मानसून और बजट सत्र भले ही सीमित उपस्थिति के बीच सीमित समय के लिए हो लेकिन बदली परिस्थितियों में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने जब पहली बार होंगे तब एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के तीर तो चलेंगे ही नेता प्रतिपक्ष के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की भूमिका पर भी नजर होगी। चौथी बार मुख्यमंत्री बने शिवराज सिंह चौहान का अनुभव देखने को मिलेगा।­

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