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इधर सामंजस्य का अभाव, उधर टूटता सब्र का बांध

दरअसल आमजन को जहां अनलॉक होने का इंतजार था, वहीं प्रदेश में मंत्री बनने के इच्छुक विधायक को मंत्रिमंडल के विस्तार का इंतजार था। तारीख पर तारीख बढ़ती गई लेकिन अब तक निश्चित तारीख नहीं आ पाई।

इसके पीछे सबसे बड़ी वजह सूची को लेकर भाजपा नेताओं के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। खासकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जिन पुराने सदस्यों को टीम में रखना चाहते हैं उनमें से और सदस्यों को संगठन और संघ सत्ता की बजाए संगठन में रखना चाहता है

और इसी गुत्थी को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दिल्ली जाना चाहते थे लेकिन रविवार रात को ही उनके दिल्ली दौरे के स्थगित होने की सूचना सोशल मीडिया पर प्रसारित हो गई।  बताया जा रहा है कि दिल्ली में जिन नेताओं से मिलना है उनसे समय तय नहीं हो पाया है। उधर पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य का भी भोपाल दौरा स्थगित हो गया। इसको लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। इसी कारण मुख्यमंत्री ने सोमवार को फिर कहा कि जल्दी ही दिल्ली जाऊंगा और मंत्रिमंडल का विस्तार भी शीघ्र कर लिया जाएगा।
बहरहाल लंबी कवायद के बाद भी मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले सदस्यों की सूची फाइनल नहीं कर पाने के कारण मंत्रिमंडल का विस्तार लगातार टलता गया और अभी भी कोई निश्चित तारीख तय नहीं हुई है। इससे दावेदारों के सब्र का बांध टूटने लगा है।

पूर्व मंत्री और ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक प्रद्युम्न सिंह तोमर ने मंत्री बनने तक चप्पल नहीं पहनने का संकल्प ले लिया है। वे नंगे पांव ही घूम रहे हैं। इसी तरह कांग्रेस के बागी पूर्व विधायक बिसाहू लाल ने अपने समर्थकों के बीच कष्ट जाहिर करते हुए कहा है कि उन्होंने कांग्रेस इसलिए नहीं छोड़ी कि मंत्री बनना तो दूर हम घर पर बैठे रहे और क्षेत्र में भी ना जा सकें। उन्होंने वर्तमान मंत्रियों को लेकर भी तंज कसा कि वे मंत्री बन सकते हैं तो मैं क्यों नहीं। इसी तरह और भी दावेदारों ने अपने-अपने कष्ट अपने समर्थकों और नेताओं के बीच उजागर किए लेकिन भाजपा नेतृत्व की अपनी मजबूरियां है। एक तरफ राज्यसभा के चुनाव होना है तो दूसरी तरफ 24 सीटों पर होने वाले विधानसभा के चुनाव सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में पार्टी किसी प्रकार की रिस्क नहीं लेना चाहती। आपस में सामंजस्य और तालमेल बनाकर सत्ता और संगठन को मजबूती देने के उद्देश्य से मामला अब तक आगे बढ़ता रहा और अब यह कभी भी सुलझ सकता है।

कुल मिलाकर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने चौतरफा चुनौतियां हैं। अब जब अनलॉक की ओर देश और प्रदेश बढ़ रहा है। राज्यसभा के चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान भी हो गया है। तब इन चुनौतियों से पार पाने के लिए अब और समय नहीं है। प्रदेश में चौथी बार सत्ता की कमान थामने वाले चौहान के लिए कोरोना महामारी मंत्रिमंडल विस्तार 24 विधानसभा सीटों के उपचुनाव और राज्यसभा के चुनाव से निपटना है।

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