हाथी की हुंकार से कमल निखरेगा या मजबूत होगा पंजा ?

मध्यप्रदेश में 24 विधानसभा क्षेत्रों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण क्षेत्र चंबल है जहॉ 16 विधानसभा सीटों पर चुनाव होने है, इन 16 सीटो पर ज्योतिरात्दिया सिंधिया का प्रभाव है, सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के कारण कांग्रेस पहले ही इन क्षेत्रों में कमजोर दिखाई दे रही है

वही दूसरी और बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी कांग्रेस की मुश्किल बढ़ा दी है। बहुजन समाज पार्टी का वर्चस्व इन सीटो पर हमेशा रहा है पहले कई विधानसभा चुनाव में बसपा ने इन सीटो पर परचम लहराने में कामयाब हुई है। विधानसभा चुनाव 2018 की बात करे तो भले ही बसपा ने इस सीटो पर जीत हासिल न की हो लेकिन अपनी छाप छोडने पर पीछे नही हटी है।

आंकड़ो के हिसाब से बात करे तो मुरैना जिले की पॉच विधानसभा क्षेत्र जहॉ उपचुनाव होने है जौरा, सुमावली, मुरैना, दीमनी तथा अम्बांह में विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस ने इस सभी सीटो पर कुल 2,97,547 वोट, भाजपा ने 2,19,081 वोट तथा बसपा ने 1,30,129 वोट प्राप्त किये। महत्वपूर्ण तथ्य यह कि जौरा विधानसभा में बसपा के मणिराम धाकड़ 41,014 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे यहॉ कांग्रेस के बनवारी लाल शर्मा 15,173 वोटो से चुनाव जीते। यह सीट कांग्रेस विधायक बनवारी लाल शर्मा के आकस्मिक निधन के कारण रिक्त हुई है।
भिंड जिले की दो विधानसभा क्षेत्र मेहगांव एवं गोहद में विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस ने कुल 1,24,541 वोट, भाजपा ने 74,738 वोट तथा बसपा ने 23,074 वोट प्राप्त किये।

ग्वालियर जिले की तीन विधानसभा क्षेत्र ग्वालियर, ग्वालियर पूर्व तथा डबरा में विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस ने कुल 2,72,786 वोट, भाजपा ने 1,76,477 तथा बसपा ने 23,197 वोट प्राप्त किये। शिवपुरी जिले की दो विधानसभा क्षेत्र करेरा तथा पोहरी में विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस ने कुल 1,24,855 वोट, भाजपा ने 86,645 तथा बसपा ने 92,762 वोट प्राप्त किये। पोहरी विधानसभा क्षेत्र में बसपा के कैलाश कुशवाह 52,736 वोट हासिल करके दूसरे स्थान पर रहे, कांग्रेस के सुरेश धाकड 7,918 वोटो से चुनाव जीते।

दतिया जिले की भांडेर सीट पर विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस ने 73,578 वोट, भाजपा ने 33,682 वोट तथा बसपा ने 2,642 वोट हासिल किये। गुना जिले की बामोरी सीट पर विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस ने 64,598 वोट, भाजपा ने 36,678 तथा बसपा ने 7,176 वोट प्राप्त किये। भाजपा से बागी पूर्व मंत्री कन्हैया लाल अग्रवाल निर्दलीय चुनाव लड़कर 28,488 वोट हासिल करके तीसरे स्थान पर रहे, जिस कारण यहॉ बसपा के वोट बैंक का गणित बिगड गया। अशोकनगर जिले की दो विधानसभा क्षेत्र अशोकनगर तथा मुंगावली सीट पर विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस ने कुल 1,21,096 वोट, भाजपा ने 1,09,230 तथा बसपा ने 23,761 वोट प्राप्त किये।

इन 16 विधानसभा क्षेत्रों में बसपा के आंकडे से यह साफ जाहिर है कि भले ही बसपा इन सीटो पर जीतने में कामयाब न हो पाई हो लेकिन इन क्षेत्रों में बसपा के झंडे में ताकत अभी भी बाकी है। बसपा का वोट बैंक आज भी सियासी उठापठाक करने की कबालियत रखता है ऐसे में कांग्रेस और भाजपा दोनों की मुश्किले बढाना निश्चित है।

उपचुनाव में अहम रहने वाली इन सीटो पर ज्योतिरात्दिया सिंधिया का प्रभाव है जो वर्तमान में भाजपा के साथ खडे हुए है, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विजय रथ के सारथी सिंधिया होगे, इस पार्थ और सारथी के जोडे से कांग्रेस पहले ही परेशान थी और अब बसपा का शंखनाद कांग्रेस के लिए सिरदर्द बन गया है। मध्यप्रदेश में निर्मित इस नवीन चक्रव्युह को तोडना पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए आसान तो नही होगा।

कांग्रेस ने बसपा नेता रहे फूलसिंह बरैया को अपने सेना में शामिल तो किया है लेकिन मध्यप्रदेश में बसपा का वोटबैंक सिर्फ उसके झंडे के नीचे चलता है न कि किसी व्यक्ति विशेष के। हालांकि बसपा की यह रणनीति प्रेशर पॉलिटिक्स का भी हिस्सा हो सकती है। उत्तरप्रदेश के राजनीति में प्रियंका गांधी के बढते ग्राफ से समाजवादी पार्टी तथा बहुजन समाज पार्टी दोनों ही व्यतीत है, ऐसे में कांग्रेस और बसपा के संधि के दरवाजे मध्यप्रदेश के जरिए खोले जा सकते है।

मध्यप्रदेश में अपने दो विधायकों के आंकडो को दहाई में बदलने की लिए बसपा के पास सुनहरा अवसर है लेकिन हाथी के हुंकार किसके पक्ष में होगी, जहॉ भाजपा अपना कमल निखारने की तलाश में है वही कांग्रेस अपने पंजे को मजबूत करने की रणनीति बना रही है।
उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस से शामिल विधायकों को अपना उम्मीदवार बनाने जा रही है वही कांग्रेस विधानसभा चुनाव 2018 में बसपा प्रत्याशीयों को अपना मुहरा बनाने की सोच रही है और अब बसपा भी मैदान में उतार रही है। इस बीरबल की खीचडी का स्वाद क्या होगा ये तो चुनाव का परिणाम ही बतायेगा। लेकिन कभी शांत एवं सैंद्धांतिक राजनीति का प्रतीत रहा मध्यप्रदेश में इस प्रकार की सियासी उठापठक होगी ये कभी किसी ने नही सोचा होगा।

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