Madhya Pradesh by election कमजोर कड़ी तलाशने कांग्रेस की कमेटी
गेस्ट कॉलम | देश | मध्य प्रदेश| नया इंडिया| Madhya Pradesh by election कमजोर कड़ी तलाशने कांग्रेस की कमेटी

कमजोर कड़ी तलाशने कांग्रेस की कमेटी

CM contender of Congress

भोपाल। प्रदेश में संपन्न हुए 4 क्षेत्रों के उपचुनाव में से कांग्रेस को केवल एक सीट पर सफलता मिली जबकि भाजपा ने एक लोकसभा और 2 विधानसभा में जीत दर्ज की जिसमें 2 विधानसभा पृथ्वीपुर, जोबट कांग्रेस के परंपरागत गढ़ थे। अब कांग्रेस उपचुनाव हारने वाले क्षेत्रों में कमजोर कड़ी पता करने की कोशिश करेगी जिसके लिए एक कमेटी बनाए जाने की चर्चा है।

दरअसल, प्रदेश में संपन्न हुए एक लोकसभा और 3 विधानसभा उपचुनाव के सियासी मायने विधानसभा के 2023 में होने वाले आम चुनाव के लिए वातावरण बनाने को लेकर है। इसी कारण दोनों दलों ने इन चुनावों में अपनी पूरी ताकत झोंकी और नेताओं को अलग-अलग क्षेत्रों में आजमाया गया। दोनों ही दलों के लिए भरपूर मौका था कि वह एक रणनीति से चुनाव लड़े तो सफलता मिल सकती है और भाजपा की रणनीति चुनाव परिणामों के बाद सफल मानी जा रही है। जिसमें पार्टी ने सबसे पहले बेहतर प्रत्याशियों की तलाश की और इसके लिए जोबट में कांग्रेस से सुलोचना रावत को और पृथ्वीपुर में सपा के डॉक्टर शिशुपाल यादव को चुनाव लड़ाने में कोई संकोच नहीं किया और पार्टी के नाराज नेताओं को समझा-बुझाकर अंततः पार्टी के काम में लगा दिया जबकि कांग्रेस पार्टी यदि ऐसी ही रणनीति पर काम करती और सुलोचना रावत या उनके बेटे का टिकट घोषित पहले कर देती तो शायद यह परिस्थिति नहीं बनती इसी तरह खंडवा में भी यदि अरुण यादव को प्रत्याशी बनाती तो सफलता के और नजदीक कांग्रेस होती लेकिन कांग्रेस पार्टी अपने परंपरागत चुनाव लड़ी। पहले टिकट के दावेदारों को टिकट के लिए संघर्ष करना पड़ा और फिर पूरा चुनाव प्रत्याशियों को अपने दम पर लड़ने पड़ा।

भाजपा में जिस तरह से प्रदेश स्तरीय चुनाव प्रबंधन समिति थी जिसका संयोजक मंत्री भूपेंद्र सिंह और सह संयोजक महामंत्री भगवानदास सबनानी को बनाया गया था और समिति में ऐसे नेताओं को रखा गया था जो पूरे समय चुनाव क्षेत्रों पर फोकस बनाए रखें लेकिन कांग्रेस कार्यालय में ऐसी कोई कमेटी नहीं की जोकि चुनाव क्षेत्रों पर पैनी नजर रखें और चुनाव आयोग में शिकायत करके मनोवैज्ञानिक दबाव बनाएं जबकि भाजपा की कमेटी छोटी-छोटी बातों की शिकायत चुनाव आयोग को कर रही थी। कांग्रेस पार्टी नेताओं को चुनाव क्षेत्रों में भेजा था बेशक वे चुनावी रणनीतिकार थे लेकिन पेट्रोल डीजल सहित अन्य चीजों की बढ़ती महंगाई से नाराज जनता और ऐन चुनाव के मौके पर गांव-गांव में खाद के लिए संघर्ष करते किसानों का आक्रोश देखकर वे यह मानकर चल रहे थे कि यह चुनाव जनता अपने आप ही कांग्रेस को जिता देगी और टेबल पर आंकड़े जीत के बनाते रहे जबकि भाजपा इन्हीं परिस्थितियों को भांपकर मैदान में गली गली और घर-घर जाकर मतदाताओं को समझाने में जुटी रही अब जबकि परिणाम आ चुके हैं। अब कांग्रेस के अधिकांश नेता इन परिणामों को अनुकूल नहीं मान रहे हैं और चुनाव में एक बार फिर गड़बड़ी होने के आरोप लगा रहे। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यहां तक कहा कि हमारी लड़ाई भाजपा के अलावा शासन प्रशासन से थी। जोगी सरकारी बिल्ला लगाकर भाजपा का काम कर रहे थे और जिन नेताओं को चुनाव क्षेत्रों का प्रभारी बनाया गया था वे लगातार पार्टी के नेताओं को चुनाव जीतने का आश्वासन दे रहे थे और चुनाव परिणाम आने के बाद वे भी स्थानीय स्तर पर मतदान के दौरान गड़बड़ी होने की शिकायतें कर रहे हैं।

कुल मिलाकर अति आत्मविश्वास में चुनाव लड़ी कांग्रेस 3 सीटों पर मिली पराजय के बाद हार के कारणों का पता लगाने और कमजोर कड़ी को ढूंढने की कोशिश कर रही है। यदि चुनाव के पहले सतर्कता और सावधानी बरती होती तो शायद इसकी जरूरत नहीं पड़ती।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ट्रेंडिंग खबरें arrow
x
न्यूज़ फ़्लैश
जनरल रावत की मौत की जांच रिपोर्ट आई सामने, किसी साजिश के तहत नही बल्कि पायलट के स्थानिक भटकाव के कारण हुई दुर्घटना में मौत
जनरल रावत की मौत की जांच रिपोर्ट आई सामने, किसी साजिश के तहत नही बल्कि पायलट के स्थानिक भटकाव के कारण हुई दुर्घटना में मौत