उम्मीद की रोशनी की तलाश…

राज्यपाल लालजी टंडन से से चर्चा के बाद मीडिया से मुखातिब हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा बजट सत्र में उनके अभिभाषण पर उन्हें धन्यवाद अर्पित किया है। मैंने उन्हें कहा है कि संविधान के दायरे व नियम प्रक्रिया के तहत हम हर चीज में राजी हैं।

भाजपा बार-बार कहती है कि हमारे पास बहुमत नहीं है , फ्लोर टेस्ट की माँग करती है तो हमने उन्हें कहा था कि भाजपा को लगता है कि हमारे पास बहुमत नहीं है तो उन्हें अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहिए।  आज वो लाये हैं , उन्होंने स्पीकर के सामने प्रस्ताव पेश किया है।

हम अपना बहुमत साबित करेंगे।साथ ही उन 16 बंधक विधायक को भी सामने लाना चाहिए ,उन्हें भी स्वतंत्र करना चाहिए। बहुमत को लेकर कोई कुछ भी कहे ,हमारे पास आज बहुमत है और हम उसे साबित भी करेंगे। कमलनाथ की बात पर गौर करें तो वह फ्रंट फुट पर अपने आक्रामक अंदाज में ही इस राजनीतिक संकट से खुद को लड़ते हुए हुए दिखाई देना चाहते हैं ..तमाम कयासों पर विराम लगा कर कमलनाथ ने इस लड़ाई को निर्णायक मानते हुए अपने फैसले लगातार ले रहे।

चाहे फिर नए चीफ सेक्रेटरी के तौर पर गोपाल रेड्डी का आना हो या फिर विधानसभा से लेकर लोकसभा चुनाव और सत्ता संघर्ष के खेल मे कांग्रेस मीडिया सेल के चेयरपर्सन शोभा ओझा को महिला आयोग का अध्यक्ष बनाना हो या फिर दूसरे फैसले. भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा सरकार के इन फैसलों पर लगातार यह कहकर आपत्ति दर्ज करा रहे सरकार अल्पमत में आ चुकी है जिम्मेदार लोगों को सावधान होना चाहिए ..कांग्रेस की ओर से अनुभवी कमलनाथ को चुनौती देने के लिए शिवराज सिंह चौहान गोपाल भार्गव नेता प्रतिपक्ष सुनियोजित रणनीति के तहत पलटवार के साथ आक्रमक बने हुए हैं।

जिन्होंने समर्थक भाजपा विधायकों की राजभवन में परेड भी कराई तो सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे भी खटखटा दिए हैं.. मंगलवार को प्रदेश ही नहीं देश के साथ कांग्रेस और भाजपा की नजर सुप्रीम कोर्ट पर रहेगी .. सोमवार को संकट का कोई समाधान नहीं निकला और संदेश यही गया कि तनातनी जारी है भाजपा राज्यपाल के निर्देशों का हवाला देकर आर पार की लड़ाई लड़ रही है राज्यपाल ने नई चिट्ठी के साथ एक बार फिर 17 मार्च को विश्वास मत हासिल करने के निर्देश कमलनाथ सरकार को दिए हैं। विधानसभा स्थगित होने के बाद बीजेपी जब अपने विधायकों को एक बार फिर दिल्ली और उसके साथ मानसेर भेजने की तैयारी में जुटी थी। तभी मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कांग्रेस विधायकों की बैठक मुख्यमंत्री निवास पर बुला ली।

यहां लगातार मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, हरीश रावत, विवेक तन्खा, मुकुल वासनिक राष्ट्रीय नेतृत्व से संपर्क कर सरकार को इस संकट से बाहर निकालने की जद्दोजहद में जुटा था.. घटनाक्रम एक बार फिर तेजी से बदला भाजपा ने राजनीति में बदलाव के साथ विधायकों को स्थानांतरित कर दिया .. क्योंकि तब खबर विधायक दल की बैठक से निकलकर मुख्यमंत्री कमलनाथ के राजभवन में राज्यपाल से मुलाकात की आ चुकी थी .. वह बात और है कि एक बार फिर कमलनाथ ने अपने रुख में कोई बदलाव ना लाते हुए विपक्ष को चुनौती दे डाली कि यदि उन्हें विश्वास नहीं है तो वह अविश्वास प्रस्ताव लाए। साफ है कि राज्यपाल की कुछ घंटे के अंदर दूसरी चिट्ठी वह भी सीधे मुख्यमंत्री के नाम, जिसमें फ्लोर टेस्ट नहीं कराए जाने पर यह मान लिया जाएगा कि सरकार बहुमत नहीं रखती है।

राज्यपाल ने कमलनाथ की चिट्ठी के कुछ खास बिंदुओं पर यह कहकर आपत्ति दर्ज कराई कि आपके तर्क और तथ्य आधारहीन हैं.. कहीं ना कहीं राज्यपाल के दिशानिर्देश और गाइड लाइन में कांग्रेस को बैकफुट पर लाकर खड़ा कर दिया.. कांग्रेस को एक ओर राज्यपाल को संतुष्ट करना है.. तो दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट पर भी उसकी पैनी नजर रखनी होगी.. यही नहीं, विधानसभा अध्यक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका भी उसके लिए मायने रखती है.. जिन्होंने 22 में से 6 सिंधिया समर्थक मंत्रियों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए। लेकिन 16 अन्य के बारे में कोई फ़ैसला नहीं लिया।

प्रदेश का पिछले करीब 15 दिन से जारी सियासी नाटक थमने का नाम नहीं ले रहा है.. सोमवार को जैसे ही विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई और राज्यपाल का अभिभाषण हुआ तो उसके तुरंत बाद कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया.. अब ये लड़ाई देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है.. भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत परीक्षण के मसले पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी है.. इस पर अब मंगलवार को सुनवाई होगी।सोमवार को सदन की कार्यवाही 26 मार्च तक स्थगित होने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.. बीजेपी लगातार मांग कर रही थी कि सोमवार को ही फ्लोर टेस्ट करवाया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

इसी के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता शिवराज सिंह चौहान ने सर्वोच्च अदालत में याचिका दी..बीजेपी की ओर से मांग की गई है कि अदालत कमलनाथ सरकार को 24 घंटे में बहुमत परीक्षण कराने के आदेश दे..कमलनाथ सरकार के लिए सोमवार का दिन काफी अहम था.. राज्य में मची सियासी हलचल के बीच सोमवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई। लेकिन राज्यपाल लालजी टंडन के अभिभाषण के तुरंत बाद स्पीकर की ओर से विधानसभा की कार्यवाही को 26 मार्च तक स्थगित कर दिया गया.. इससे पहले राज्यपाल ने सदन में इशारों इशारों में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता को ध्यान में रखते हुए गौरवशाली इतिहास की याद दिलाई।

जिससे यही संकेत गया की सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच रिश्तो में कड़वाहट आ चुकी है और सत्ता संघर्ष इन्हें किसी हद तक भी ले जा सकता है । यह स्थिति तब निर्मित हुई जब कांग्रेस में रहते ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ बीजेपी के साथ जाने के बाद 22 विधायकों ने इस्तीफा दिया था.. बाद में सिंधिया ने भगवा थामकर भाजपा के टिकट पर राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया। बाद में विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए थे जबकि 16 पर सस्पेंस बरकरार है ..इसी के बाद कमलनाथ सरकार पर बहुमत साबित करने का संकट है.. जिसे मुख्यमंत्री इंकार ही नहीं कर चुके बल्कि राज्यपाल द्वारा लिखी चिट्ठियों के जवाब में भी यही कहा कि उनकी सरकार बहुमत में है जिन्हें विश्वास नहीं वह अविश्वास प्रस्ताव लाए।

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