आए ‘महाराज’ तो क्या गई सरकार..!

मोदी, शाह, नड्डा, राजनाथ से मिलने के बाद ज्योतिरादित्य जब भोपाल पहुंचे तो महाराज शिवराज के साथ अपनी केमिस्ट्री मजबूत साबित करने में जुटे नजर आए। इससे लगा कि महाराज और शिवराज दोनों की नजर फिलहाल मध्य प्रदेश पर है जिन्हें अघोषित तौर पर भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने बड़ा टास्क दिया है।

दो राज यानी महाराज और शिवराज मैं भले ही एक ही जल में साथ जुड़ने के साथ दिल मिलाने की कसमें खाई लेकिन फिर भी दोनों के दिल में राज कई छुपे हैं। शिवराज 13 साल मध्यप्रदेश में राज किया जिन्हें वोट ज्यादा मिलने के बावजूद सरकार नहीं बन पाने का मलाल है।

तो कांग्रेस ने दो दशक की राजनीति के बावजूद अपनी अनदेखी उपेक्षा से आहत महाराज के दिल में भी राज है। जिन्होंने भोपाल आकर सिंधिया घराने को चुनौती देने वालों को ललकार दिया। दोनों ने संदेश दिया कि यह जोड़ी जनता को उसका हक दिलाने के लिए किसी भी हद तक जा सकेगी। भाजपा कार्यालय में स्वागत अभिनंदन के बाद ज्योतिरादित्य ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास पर डिनर के दौरान चर्चा की.. जिसे राज्यसभा चुनाव और विधानसभा के फ्लोर पर शक्ति प्रदर्शन से जोड़कर देखा जा रहा है।

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ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा की सदस्यता लेने के बाद जब भोपाल पहुंचे। तब प्रदेश कांग्रेस और उसके नेता सिंधिया के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे.. जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला ईओडब्ल्यू को भी सरकार द्वारा सौंपा गया। तो दिल्ली में भी कभी उनके नेता रहे राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दामन थामने के लिए अपने मित्र ज्योतिरादित्य नीति और नीयत पर सवालों की झड़ी लगा दी।

जब कांग्रेस की ओर राज्यसभा के लिए राजा दिग्विजय सिंह नामांकन दाखिल कर रहे थे ..तब सिंधिया अपने कदम प्रदेश भाजपा कार्यालय की ओर बढ़ा रहे थे। कह सकते हैं कि बदले बदले नजर आ रहे थे महाराज.. जिन्होंने पहले ही कमलनाथ को सड़क पर उतर कर जनता के हक की लड़ाई लड़ने के संकेत दे दिए थे। आज महाराज सोनिया, राहुल, प्रियंका, राजा और कमलनाथ से दूर होकर मोदी, शाह, नड्डा, शिवराज और नरेंद्र सिंह के बीच भावुक अपील कर अपनी राजनीति का उद्देश्य नए सिरे से समझाने को मजबूर हुए।

ज्योतिरादित्य शिवराज ने विधानसभा चुनाव में माफ करो महाराज और सियासी लड़ाई के खट्टे मीठे अनुभव को बुलाते हुए जमकर जिस तरह एक-दूसरे की पीठ थपथपाई उससे लगा कि दोनों के बीच केमिस्ट्री मजबूत बन सकती है। दोनों के भाषण धाराप्रवाह और आक्रामक लक्ष्य एक फैसला करना आसान नहीं था कि कौन किस पर भारी, एक सिंधिया घराने का चिराग जिसमें राजघराने का खून बह रहा तो दूसरा किसान का बेटा जिसने 13 साल प्रदेश के राजा बनकर सेवक के तौर पर काम किया।

दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता लेते वक्त ज्योतिरादित्य के चेहरे पर जो असमंजस उदासी नजर आ रही थी.. वह यहां दूर-दूर तक नजर नहीं आई । वजह स्वागत-अभिनंदन से अभिभूत और मान-सम्मान की लड़ाई में कांग्रेस नेता कार्यकर्ताओं का सिंधिया को पूरा भरोसा। ज्योतिरादित्य स्वागत समारोह में भाजपा के मंच से पूरे जोश और होश हवास में कभी मुस्कुराते तो कभी खुलकर कांग्रेस के खिलाफ आक्रामक नजर आए। जिन्होंने इस मंच से अपने मकसद को साफ कर बता दिया कि पहला उद्देश्य कार्यकर्ताओं के दिल में जगह बनाना उनका भरोसा जीतना होगा।

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सिंधिया का कहना था कि आप लोग विरोधी के तौर पर बाहर से कांग्रेस सरकार की वादाखिलाफी पर आरोप लगाते रहे। मैंने तो कांग्रेस के अंदर रहकर बहुत कुछ सहा तो लगे हाथ साफ कर दिया कि सिंधिया परिवार ने कभी अपमान नहीं सहा.. चाहे फिर वह दादी, राजमाता सिंधिया का हो या फिर पिता माधवराव सिंधिया का जिन्हें हवाला मामले में झूठा उलझा दिया गया। सिंधिया यही नहीं रुके.. उन्होंने कहा कि हमारे लिए कुर्सी और पद महत्वपूर्ण नहीं, केवल सम्मान और पहचान के साथ मैं आपके हृदय में स्थान पा सकूंगा तो अपने जीवन को सफल मानूंगा, ज्योतिरादित्य ने दल अलग और राजनीतिक रंग अलग-अलग होने का हवाला देकर मतभेद स्वीकार किया।

लेकिन पक्ष-विपक्ष के बीच कभी मनभेद नहीं होने की जरूरत जताई, सिंधिया ने दिल खोलकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तारीफ में उन्हें समर्पित जनता के प्रति सब कुछ न्योछावर करने वाला ऐसा कार्यकर्ता बताया, जो देश और प्रदेश में बिरला होगा। सिंधिया ने कार्यकर्ताओं से मार्मिक अपील थी। क्या आपके दिल में स्थान बनाना ही जीवन का लक्ष्य होगा, ज्योतिरादित्य ने मंचासीन नेताओं में सबसे बाद में उद्बोधन दिया, इससे पहले शिवराज, नरेंद्र सिंह तोमर, विष्णु दत्त शर्मा, गोपाल भार्गव सिंधिया का हौसला बढ़ाते हुए नजर आए, सम्मान की उनकी लड़ाई को भाजपा का एक-एक कार्यकर्ता लड़ेगा।

यह भरोसा उन्हें वक्ताओं द्वारा दिलाया गया, इस मौके पर जिस तरह शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री कमलनाथ के खिलाफ आक्रामक अंदाज में सीधा मोर्चा खोला, वो उनके स्वभाव के विपरीत नजर आया, सरकार की कार्यशैली वादाखिलाफी बदले की राजनीति अहम और अहंकार में डूब जाना, वल्लभ भवन को दलालों का अड्डा बना देना, रेत खदान, ट्रांसफर-पोस्टिंग और भी बहुत कुछ, शिवराज ने यह संदेश देने की कोशिश की कि इस सरकार का जाना जरूरी है और अब यह काम सब मिलकर करेंगे, क्योंकि समय आ गया है, सीधे तौर पर शिवराज ने विधायकों के इस्तीफे और सदन के गणित का जिक्र न करते हुए कार्यकर्ताओं के साथ जनता के बीच जाकर मुख्यमंत्री कमलनाथ को एक्सपोज करने का भरोसा दिलाकर कार्यकर्ताओं में जोश भरा।

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उन्होंने इस लड़ाई को कार्यकर्ताओं के सम्मान से जोड़ा, उन्होंने धर्म युद्ध में महाराज के साथ मिलकर आगे कदम बढ़ाने के स्पष्ट संकेत देकर संकेत यह भी दे दिए कि शिवराज और महाराज अब कमलनाथ सरकार के कई राज उजागर करेंगे, ऐसे में सवाल खड़ा होना लाजमी है क्या फ्लोर टेस्ट से पहले भाजपा सुनियोजित योजना के तहत कांग्रेस की अंतर्कलह की आड़ लेकर तख्तापलट के लिए, जिस रणनीति पर काम कर रही, अब जब ज्योतिरादित्य भाजपाई हो गए, सवाल क्या उनके समर्थक बागी होकर भाजपा के पाले में खड़े नजर आएंगे, जो इस्तीफा दे चुके हैं और सदन में सिंधिया के समर्थन में कांग्रेस के खिलाफ एकजुट होंगे।

क्या यह कोशिश अब दो राजदार शिवराज और महाराज के नेतृत्व में कामयाब होगी, क्योंकि उसका मुकाबला उस कमलनाथ से है, जिसे राष्ट्रीय नेतृत्व का भरोसा तो खुद मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश अध्यक्ष रहते पार्टी के सारे सूत्र अपने पास रखे हुए हैं, जिन्होंने कुछ दिन पहले ही सिंधिया को सड़क पर उतर जाने की चुनौती दी थी या फिर बागी विधायक के दम पर भाजपा अति आत्मविश्वास में सत्ता वापसी का सपना संजो बैठी है।

क्योंकि कमलनाथ ने अभी हार नहीं मानी है तो दिग्विजय सिंह भाजपा को सीधी चुनौती दे रहे हैं, वैसे भी विधायक जिन्हें प्रेशर पॉलिटिक्स के बीच सदन में इस्तीफे से बनी स्थिति पर अंतिम फैसला लेना है, वो सभी मध्य प्रदेश से बाहर सैर सपाटे पर है, जहां रूठने मनाने की मशक्कत चल रही और दोनों पक्ष के बीच झड़प की भी खबर सामने आ रही। ऐसे में प्रदेश ही नहीं देश की नजर मध्य प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति और राज्यपाल लालजी टंडन की भूमिका पर आ कर टिक चुकी है।

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