आ देखें जरा किसमें कितना है दम..

मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र राज्यपाल के अभिभाषण के साथ शुरू होने जा रहा है।  दिन भर की मोर्चाबंदी और उसके लिए जरूरी चिंतन मंथन बैठक के बाद रात को एक साथ दो खबर सामने आई स्वयं राज्यपाल ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को एक और चिट्ठी लिखकर विश्वास मत के दौरान मतदान की प्रक्रिया हाथ उठाकर करने की एक नई व्यवस्था बनाई।

दूसरे सारे विकल्प रोक दिए,यह बदलाव विधानसभा में बटन दबाकर मतदान की उपलब्धता के अभाव में बनाई गई ।

लगभग इसी समय विधानसभा की पहले दिन की कार्यवाही की कार्यसूची में फ्लोर टेस्ट जिसकी गाइडलाइन राज्यपाल द्वारा तैयार कर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित किया गया था वह संभव अब नजर नहीं आ रहा, कार्य सूची में विश्वास मत का उल्लेख नहीं। इसके साथ सस्पेंस बढ़ गया, इस बीच नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव मुख्य सचेतक नरोत्तम मिश्रा के साथ दूसरी बार रात को फिर राजभवन जा पहुंचे, जहां सरकार द्वारा राज्यपाल की गाइडलाइन के उल्लंघन पर उन्हें अवगत कराया गया।

मुलाकात के बाद नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने भरोसा जताया कि संविधान के तहत राज्यपाल फैसला जरूर उचित समय पर लेंगे.. शक्ति परीक्षण को लेकर बनी इस नई स्थिति से पहले जिस तरह टकराहट लगातार सदन के बाहर बढ़ चुकी है. ऐसे में बिगड़ते माहौल में विधानसभा के गौरवशाली इतिहास को ध्यान में रखते हुए कई सवाल खड़े हो जाते हैं, मुख्यमंत्री ने इससे पहले साफ कर दिया कि जब उनकी पार्टी के विधायक बंधक बनाए जा चुके। तब विश्वास मत कैसे संभव है, कांग्रेस के विधायक रविवार को जयपुर से भोपाल पहुंचे तो मुख्यमंत्री निवास पर कमलनाथ के साथ दिग्विजय सिंह मुकुल वासनिक और हरीश रावत विवेक तंखा जैसे नेता पार्टी और सरकार के सामने खड़ी चुनौती से बाहर निकलने की रणनीति बनती रही, दिन में कैबिनेट की बैठक तो शाम विधायकों का हौसला मुख्यमंत्री कमलनाथ ने यह कहकर बढ़ाया कि उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं।

मीडिया से चर्चा के दौरान भी कमलनाथ ने नंबर गेम अपने पक्ष में होने की दम पर अपनी सरकार की स्थिरता का दावा किया। तो दूसरी ओर देर रात भाजपा विधायकों के भी भोपाल लौट आने की खबर सुर्खियां बनी। इससे पहले दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह के आवास पर ज्योतिरादित्य सिंधिया, धर्मेंद्र प्रधान ,शिवराज सिंह चौहान जैसे नेता सक्रिय रहे कानून विदो से भी पार्टी द्वारा सलाह ली गई ..तो शाम ढले भोपाल लौटे शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव मुख्य सचेतक नरोत्तम मिश्रा और दूसरे सहयोगियों के साथ अपने विधायकों की सुरक्षा और विधानसभा के पहले दिन की कार्यवाही को लेकर रणनीति बनाई, इधर विधानसभा में सुरक्षा के कड़े प्रबंध सुनिश्चित किए गए हैं।

सदन शुरू होने से पहले विधानसभा अध्यक्ष एनपी मिश्रा पर मीडिया की नजर थी ..क्या वो इस्तीफे की पेशकश करने वाले सिंधिया समर्थक विधायकों की दूसरे चरण के अपने फैसले से अवगत कराएंगे, जो 1 दिन पहले 6 पूर्व मंत्रियों के इस्तीफे स्वीकार करने की बात सामने रख चुके थे ..लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ कोरोना वायरस की चिंता और विधायकों की सुरक्षा पर फोकस बनाते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने अपने फैसले को लंबित रखा। इस बीच सिंधिया समर्थक विधायकों ने एक बार फिर विधानसभा अध्यक्ष के नाम चिट्ठी लिखकर पूर्व में दिए गए इस्तीफे को स्वीकार कर ले के साथ विधानसभा के सत्र में मौजूद नहीं हो पाने की जानकारी से उन्हें अवगत कराया।  तो एक पखवाड़े के दौरान बनते बिगड़ते समीकरणों के बीच जब विधानसभा का सत्र शुरू होने जा रहा है।

तब उसमें सिंधिया समर्थक करीब 22 विधायकों में 6 का इस्तीफा स्वीकार बाकी के देर रात तक भोपाल पहुंचने की चर्चा रही, तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच इधर फ्लोर टेस्ट को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। फिर भी भाजपा और कांग्रेस के विधायक सदन में एक दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए नजर आएंगे.. राज्यपाल के अभिभाषण के बाद सदन पर सब की पैनी नजर रहेगी क्या हंगामा होगा या फिर से डाला जा सकता है ..यह सवाल इसलिए खड़ा होता है। कांग्रेस और भाजपा दोनों पक्ष के विधायकों के बीच हरियाणा के एक होटल में जोर जबरदस्ती की खूब चर्चा रही, तो बाद में कांग्रेस के मंत्री कि बेंगलुरु से भी वह तस्वीर भी खूब वायरल हुई, जिसमें झूमा छठकी साफ देखी जा सकती थी ..तो अब यह सभी जनप्रतिनिधि आमने-सामने सदन के अंदर बैठे नजर आएंगे।  देखना होगा विधायकों के कोरोना टेस्ट और फ्लोर टेस्ट आखिर मध्य प्रदेश की राजनीति में क्या गुल खिलाने वाले हैं।

भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा ने कोरोना की आड़ में फ्लोर टेस्ट से भागने का गंभीर आरोप कमलनाथ सरकार पर लगाया है, उनका दावा है कि कमलनाथ सरकार बहुमत खो चुकी है..सरकार में रहने के हथकंडे अपना रही है, जबकि कमलनाथ ने मूल्यों की राजनीति और मध्य प्रदेश के गौरवशाली इतिहास का हवाला देकर विधायकों को बंधक बनाए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई है, कमलनाथ ने विधायकों की बैठक में भी कहा कि भाजपा अनैतिक व संवैधानिक संकट बनाए हुए, मध्यप्रदेश की विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव की इस कवायद के बीच विधानसभा अध्यक्ष राजभवन और राज्यपाल के साथ मुख्यमंत्री और उनका सचिवालय 3 बड़े केंद्र बिंदु बने हुए हैं , जबकि दिल्ली में दोनों पार्टी के शीर्ष नेता अपनी नजर मध्यप्रदेश पर लगाए हुए हैं।

यह मामला उस वक्त चर्चा में आया था जब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के साथ कमलनाथ सरकार के मंत्री तरुण भनोट जीतू पटवारी जयवर्धन दिल्ली से हरियाणा जा पहुंचे थे। जहां सरकार को समर्थन देने वाले कुछ विधायक मौजूद थे इसके बाद विधायकों ने स्थान परिवर्तन के साथ हृदय परिवर्तन भी दिखाया।  खासतौर से सुरेंद्र सिंह शेरा बिसाहू लाल सिंह रामबाई संजीव सक्सेना राजेश शुक्ला इंदल सिंह कंसाना कई दूसरे विधायक कभी कमलनाथ के साथ तो कभी शिवराज के साथ फोटो सेशन करते हुए नजर आए। इस बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा का दामन थामा और उनके साथ पांच विधायकों ने सामूहिक इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को भेज दिया था.. यानी कांग्रेस में बड़ी बगावत और उसके साथ ही राज्यसभा चुनाव ने मध्य प्रदेश की सियासत में इस बड़े उलटफेर की वह स्थिति निर्मित की जिसमें कभी दोस्त नजर आने वाले अब जमकर दुश्मनी कर रहे।

राज्यसभा की एक-एक सीट पर ज्योतिरादित्य और दिग्विजय सिंह यानी राजा महाराजा जो उस दिन तक पहले साथ थे अब अलग-अलग दल से बैक डोर एंट्री के जरिए सदन में पहुंचेंगे, दूसरी सीट को लेकर तस्वीर साफ होना बाकी है, इसका सीधा कनेक्शन मध्यप्रदेश विधानसभा के गणित से जुड़ता है. जो तय करेगा कि कमलनाथ सरकार संकट से बाहर निकलेगी या फिर बात बहुत दूर तलक पहले ही निकल चुकी है । मध्यप्रदेश के इस पॉलिटिकल डेवलपमेंट के बीच उसके सूत्रधार और मैनेजर जो एक साथ कई मोर्चों पर लड़ रहे, भाजपा की ओर से केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा संगठन महामंत्री सुहास भगत,मुख्य सचेतक नरोत्तम मिश्रा ,विधायक अरविन्द भदोरिया,संजय पाठक संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी।

तो दूसरी ओर कांग्रेस की सत्ता और संगठन के मुखिया कमलनाथ के साथ राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रतिनिधि के तौर पर हरीश रावत ,मुकुल वासनिक, दिग्विजय सिंह ,विवेक तंखा, दीपक बाबरिया ,जयवर्धन सिंह जीतू पटवारी गोविंद सिंह, तरुण भनोट सज्जन सिंह वर्मा ,रामनिवास रावत फिलहाल बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। कांग्रेस पर कमलनाथ का डैमेज कंट्रोल तो भाजपा के साइलेंट मूव ने दोनों पार्टी के प्रबंधकों और उनके नीति निर्धारकों को हर दिन नए सिरे से रणनीति बनाने को मजबूर किया है।

इनमें कुछ पर्दे के अंदर तो कुछ सड़क पर लड़ाई लड़ते हुए नजर आ चुके। अब जब विधानसभा सत्र के आगाज से कुछ घंटे पहले देर रात विधानसभा की कार्यसूची में फ्लोर टेस्ट की कोई जानकारी नहीं होने के कारण एक और संकट खड़ा हो गया। तब सबकी नजर राज्यपाल लालजी टंडन पर बिक चुकी है कि वह क्या फैसला लेते हैं, विश्वास और अविश्वास इस लड़ाई में सरकार चलाने के लिए जरूरी बहुमत और अल्पमत की इस रस्साकशी ने कहीं ना कहीं सत्ता संघर्ष को एक निर्णायक मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया।

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