madhya pradesh politics bjp महाराज के स्वागत के लिए मुन्ना भैया मोदी की लाइन..!
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महाराज के स्वागत के लिए मुन्ना भैया मोदी की लाइन..!

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भोपाल। गुजरात के बाद बदलती बीजेपी में राज्यों की राजनीति में क्या सत्ता और संगठन की जोड़ियां बदलती नजर आ रही है.. यह सवाल इसलिए क्योंकि जहां भाजपा की सरकार है.. वहां सरकार को दोबारा लाने के प्रयोग नई बिसात बिछाने के साथ शुरू हो चुके.. तो जहां कॉन्ग्रेस और तीसरे दल चुनौती बनकर सामने वहां बीजेपी के अलग अलग फार्मूले  को साफ देखा जा सकता.. मोदी शाह नड्डा की तिकड़ी  की तात्कालिक  या दूरगामी बदलाव की पटकथा आधे दर्जन राज्यों में जब  आगे बढ़ रही है.. तब मध्यप्रदेश में कुछ घटनाक्रम सोचने समझने को मजबूर करते हैं.. जहां दूसरे राज्यों की तुलना में न सिर्फ परिस्थितियां अलग बल्कि नई चुनौतियां भी अलग है.. पिछड़े वर्ग के अनुभवी सभी को  स्वीकार्य शिवराज का कोई तोड़ भाजपा के पास नहीं .. madhya pradesh politics bjp

ऐसे में चाहे फिर  राज्यों की सियासत में जरूरी बदलाव को अंजाम तक पहुंचाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जबलपुर यात्रा और सत्ता संगठन के शीर्ष नेतृत्व को साइलेंट दिया गया संदेश या फिर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का शराबबंदी को लेकर अल्टीमेटम ही नहीं मकर संक्रांति के बाद मध्य प्रदेश में बढ़ती सक्रियता का स्पष्ट संदेश और उनके सामने खुद को खड़े देखना चाहते पूर्व संगठन महामंत्री कप्तान सिंह के ट्विटर बयानों की चर्चा एक नई बहस शुरू कर चुकी है… अब जब सरसंघचालक मोहन भागवत इंदौर प्रवास पर पहुंच चुके हैं.. इधर उपचुनाव वाले विधानसभा क्षेत्रों के साथ खंडवा लोकसभा चुनाव में प्रचार की दस्तक दे चुके मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत दिल्ली दौरे के दौरान बुधवार को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पीयूष गोयल और आरती सिंह से मुलाकात करेंगे…

mohan bhagwat

ऐसे में ग्वालियर चंबल से एक चौंकाने वाली खबर ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है.. यह खबर है ज्योतिरादित्य सिंधिया का केंद्रीय मंत्री बनने के बाद पूर्व प्रस्तावित पहला ग्वालियर दौरा … इस दौरान मेगा शो जिसे महाराज का शक्ति परीक्षण माना जा रहा.. इस कार्यक्रम में अचानक केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की जोड़ीदार बन कर एंट्री… ग्वालियर चंबल की राजनीति के कभी राजनीतिक प्रतिद्वंदी रहे महाराज और मुन्ना भैया अब एक सशक्त राजदार के साथ जोड़ीदार के तौर पर सामने आ चुके हैं.. नरेंद्र सिंह तोमर मुन्ना भैया यानी कभी शिवराज के सबसे भरोसेमंद और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लाइन को आगे बढ़ाने वाले सबसे निकट केंद्रीय मंत्री.. जिनकी सफलता का राज उनका संगठन के प्रति समर्पण और नेतृत्व सर्वोपरि.. मोदी मंत्रिमंडल के टॉप फाइव मंत्रियों में शामिल नरेंद्र सिंह अपने सहयोगी दूसरे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य की अगवानी और उनके रोड शो में शामिल होने के लिए एक दिन पहले ग्वालियर पहुंच चुके हैं.. ज्योतिरादित्य वो चेहरा जिसने कांग्रेस में रहते ग्वालियर चंबल में पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ा झटका दिया था और जिनकी बगावत से शिवराज की भाजपा सरकार 15 महीने बाद सत्ता में लौटी.. भाजपा के अंदर कई बनती बिगड़ती जोड़ियों के बीच महाराज और मुन्ना भैया की इस नई जोड़ी की मजबूती और मजबूरी पर भले ही सवाल खड़े किए जाएं..

सवाल क्या यह जोड़ी अब ग्वालियर से बाहर पूरे प्रदेश के लिए एक बड़ा सियासी संदेश देने जा रही है.. सिंधिया और तोमर की अंडरस्टैंडिंग भले ही केंद्र के हस्तक्षेप से संभव हुई हो.. लेकिन इस जोड़ी ने कॉन्ग्रेस की नींद उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है.. कमलनाथ दिग्विजय सिंह जयवर्धन जैसे नेता जो ग्वालियर चंबल की राजनीति में सिंधिया तोमर की प्रतिस्पर्धा पर नजर लगाए हुए हैं.. उन्हें शायद  इस जोड़ी की बढ़ती निकटता रास ना आए.. नरेंद्र सिंह जिनकी गिनती शिवराज सिंह चौहान के उत्तराधिकारी और विकल्प के तौर पर सबसे बड़े दावेदार के तौर पर होती है.. उन्होंने अपने महाराज को  ताकत देने ही नहीं उनकी स्वीकार्यता कार्यकर्ताओं के दिल में बनाने में अभी तक बड़ी भूमिका निभाई है… ग्वालियर जिस तरह महाराज के स्वागत के लिए सज धज के साथ तैयार है.. वह गौर करने लायक चाहे फिर पोस्टर हार्डिंग और उसमें नजर आने वाले नेता.. शीर्ष नेतृत्व के साथ कुछ भाजपा नेताओं की इन पोस्टर में गैरमौजूदगी जरूर चर्चा का विषय बन चुकी.. इसे भाजपा की कार्य प्रणाली गाइडलाइन और संस्कृति से भी जोड़कर देखने वाले भी मिल जाएंगे.. लेकिन जो माहौल ग्वालियर में बन चुका है वह भाजपा को एकजुट और उसकी ताकत में इजाफा करने वाला ही माना जाएगा..ग्वालियर जहां से नरेंद्र तोमर सांसद रह चुके और उनका अपना गृह जिला वह अपने वर्तमान संसदीय क्षेत्र मुरैना की सीमा से ज्योतिरादित्य सिंधिया की अगवानी के साथ पूरे समय रोड शो का हिस्सा बनेंगे..

इसे नरेंद्र तोमर की जवाबदेही विनम्रता माना जाए या फिर भाजपा नेतृत्व का हस्तक्षेप या प्रदेश संगठन की सतर्कता या वक्त की जरूरत माना जाए लेकिन यहीं पर सवाल खड़ा होता है कि क्या महाराज के मेगा शो को अब सिर्फ स्वागत ,अभिनंदन और उसे यादगार बनाने तक सीमित नहीं रखा जा सकता.. या फिर इसके सियासी मायने निकाले जाना लाजमी है और 2023 के चुनाव से पहले कई संदेश समय पर सामने आ सकते हैं.. यह सवाल इसलिए क्योंकि सिंधिया को यदि भाजपा ने सिर माथे पर बैठाया है तो इसकी वजह सिर्फ शिवराज सरकार की सत्ता में वापसी नहीं बल्कि कांग्रेस से निपटने की भविष्य की राजनीति का हिस्सा भी माना जा सकता है..  ग्वालियर की स्थानीय राजनीति में अभी भी कॉन्ग्रेस को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और जहां 28 विधानसभा उपचुनाव के दौरान सिंधिया के सभी समर्थक नहीं जीत पाए क्या ज्योतिरादित्य नरेंद्र सिंह की जोड़ी मजबूत होने से कांग्रेस का आगामी चुनाव में पूरा सफाया की संभावना से इनकार किया जा सकता है.. या फिर महाराज और मुन्ना भैया की इस जोड़ी को और मजबूत कर राष्ट्रीय नेतृत्व दूसरे बड़े निर्णायक सियासी हित भी साधना चाहता है…

फिलहाल यह जोड़ी केंद्रीय राजनीति में सक्रिय है इनमें से एक लोकसभा और दूसरा राज्यसभा का सदस्य है.. तो और मोदी  शाह के लिए सिर्फ दिल्ली और केंद्रीय राजनीति के भरोसेमंद नहीं है बल्कि मध्यप्रदेश के लिए भी एक बड़ा चेहरा बने हुए.. तो यह भी सच है कि सिंधिया जिन्होंने भाजपा को अपना भविष्य मान लिया है.. भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस चेहरे को आगे रखकर सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ से लेकर राजस्थान महाराष्ट्र तक बड़े सियासी हित साधना चाहेगा.. चाहे फिर से राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे या फिर सचिन पायलट से जोड़कर देखा जाए.. यह सच है जब भी भविष्य में डिसाइडिंग फैक्टर साबित होते रहे शिवराज सिंह चौहान की नई भूमिका की तलाश शुरू होगी.. तब इस जोड़ी के प्रदेश राजनीति में दावे को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा.. क्या 2023 विधानसभा चुनाव और उससे पहले इस जोड़ी की भी भूमिका बदल सकती है.. मध्यप्रदेश में सीएम इन वेटिंग के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त के बावजूद ग्वालियर चंबल की जोड़ी को कयासों का दौर कोई नई बात नहीं है.. इस क्षेत्र के विकास को लेकर दोनों केंद्रीय मंत्री एक और मोदी सरकार का खजाना खुलवाने और उनके मंत्रियों पर दबाव बनाने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने दे रहे.. तो मध्य प्रदेश सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान से तुम दोनों की अलग-अलग जबरदस्त ट्विनिंग से इनकार नहीं किया जा सकता.. कई मौके ऐसे आए जब शिवराज नरेंद्र सिंह और ज्योतिरादित्य ग्वालियर चंबल के विकास के मोर्चे पर एक साथ खड़े नजर आए.. जिस ग्वालियर शहर में कभी नरेंद्र सिंह का आदमी और भव्य स्वागत हो चुका है उसी शहर में ज्योतिरादित्य सिंधिया का मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री बनने के बाद पहले अभिनंदन कोई यादगार बनाने में भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है.. विष्णु दत्त शर्मा का संगठन पूरी तरह से एकजुट नजर आ रहा है और मंडल स्तर से लेकर जिले के नेता और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंप दी गई है..

ज्योतिरादित्य के स्वागत की पहली झलक शहर से दूर मुरैना से नजर आएगी ..जहां खुद केंद्रीय मंत्री और क्षेत्र के सांसद नरेंद्र सिंह तोमर दिल्ली से ग्वालियर सड़क मार्ग से पहुंच रहे ज्योतिरादित्य की अगवानी करेंगे , नरेंद्र सिंह तोमर एक दिन पहले ही जब  भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय पारिवारिक और धार्मिक कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए इंदौर पहुंचे थे.. तब यह जानकारी सार्वजनिक नहीं थी की सिंधिया के ग्वालियर दौरे के दौरान नरेंद्र सिंह भी वहां पहुंचेंगे.. इसे नरेंद्र सिंह की दरियादिली या बड़प्पन कहां जाए या पर पार्टी नेतृत्व का इशारा जो भाजपा में महाराज के दौरे के दौरान गुटबाजी दूर दूर तक नजर ना आए इसलिए नरेंद्र सिंह पहले ही ग्वालियर पहुंचकर मुरैना आ गए.. जब सिंधिया समर्थक शिवराज सरकार के सारे मंत्री ग्वालियर में डेरा डाले हुए हैं.. और संगठन का हर कार्यकर्ता दायित्व को निभाने के लिए मोर्चे पर डाटा हुआ है तब देखना दिलचस्प होगा कि ज्योतिरादित्य नरेंद्र सिंह की जोड़ी का स्वागत सिर्फ भव्यता के लिए याद किया जाएगा या फिर मध्य प्रदेश की राजनीति एक नया टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकता है..

यह सवाल इसलिए कि शिवराज और विष्णु दत्त की जोड़ी सरकार और संगठन जब चार उपचुनाव की जमीनी जमावट और विकास के मुद्दे को धार देने में जुटे हैं तब राजधानी से दूर जहां कोई उपचुनाव नहीं उस ग्वालियर में सिंधिया के शक्ति परीक्षण की चर्चा जोरों पर है.. ग्वालियर शहर में करीब 20 किलोमीटर और इसके अलावा मुरैना से शहर तक पहुंचने के बीच स्वागत की तैयारियां बता रही है कि सुबह 11:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक पूरा फोकस इस जोड़ी पर रहेगा.. बदलते राजनीतिक परिदृश्य में इंदौर पहुंचे सरसंघचालक मोहन भागवत से भाजपा संगठन महामंत्री सुहास भगत की मुलाकात भी चर्चा में हैं.. तो पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती कि भोपाल से झांसी और दिल्ली यात्रा और उनके ट्वीट अलग सुर्खियां बने हुए हैं.. केंद्रीय मंत्री अमित शाह के जबलपुर दौरे से अंदर खाने छुपी खबरों और सियासी संदेशों का भी लोगों को इंतजार है..

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