politics bjp or congress भाजपा हो या कांग्रेस हैरान परेशान क्यों है..
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भाजपा हो या कांग्रेस हैरान परेशान क्यों है..

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भोपाल। मध्य प्रदेश में भाजपा हो या फिर कांग्रेस…उसके नेता 2223 के नेतृत्व को लेकर भले ही दावा करें कि कोई कन्फ्यूजन नहीं….लेकिन कुछ तो बात है…कोई तो बात है जो नेता यदि शक्ति परीक्षण का सहारा ले रहे हैं तो मेल मुलाकात के जरिए भी सियासी हित साध रहे हैं….ग्वालियर में सिंधिया का शक्ति प्रदर्शन हो या फिर उसका हिस्सा बने नरेंद्र तोमर का भोपाल पहुंचने पर परंपरा से हटकर अभिनंदन… जिसने इस बहस को एक नई दिशा दी है.. पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के जन्मदिन पर नरोत्तम का अपने अंदाज में बधाई देने पहुंचना हो या फिर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की बधाई के साथ चिर परिचित मुस्कान.. फिलहाल कांग्रेस के अंदर भी कुछ सवाल खड़े हो गए..पिछले डेढ़ साल में मध्यप्रदेश की सियासत ऐसी हो चुकी हैं जहां कब क्या हो जाए…कोई गारंटी नहीं….सिंधिया और उनके समर्थकों ने दल बदल कर एमपी में नई परंपरा को जन्म दिया… politics bjp or congress

इसके बाद भी कांग्रेस के कई नेता गाहे बगाहे अपनी नाराजगी जता रहे हैं लेकिन खुलकर कोई फैसला नहीं ले पा रहे…इन्हीं में एक नाम है अजय सिंह का…जिनके जन्मदिन पर बधाई देने पहुंचे खास मेहमान नरोत्तम मिश्रा की वजह से अजय सिंह एक बार फिर सुर्खियों में आ चुके हैं…. सियासत में विरोधियों के बीच भी मेल मुलाकातें आम बात हैं…लेकिन प्रदेश में नंबर 2 की पोजीशन वाले नरोत्तम से मिलने अजय सिंह का जाना या राहुल भैया को बधाई देने गृहमंत्री का जाना कम से कम सामान्य मुलाकात तो नहीं ही माना जाएगा…तो फिर इस मुलाकात के मायने क्या हैं.,.. आखिर अजय सिंह के दिलो दिमाग में इस वक्त क्या चल रहा है…कमलनाथ कांग्रेस के अंदर लूप लाइन में पहुंचा दिए गए अजय सिंह क्या कम बैक का माहौल बना रहे ?क्षेत्र और समर्थकों से बाहर पूर्व नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस के लिए क्या सड़क पर उतरकर मोर्चा खोलेंगे ?

जन्मदिन यदि बहाना है तो फिर असली निशाना क्या प्रदेश अध्यक्ष की दावेदारी या पार्टी में नए सिरे से एडजस्टमेंट ?विंध्य के रैगांव उपचुनाव में क्या कमलनाथ… अजय सिंह पर भरोसा कर उन्हें उप चुनाव की जिम्मेदारी सोंपेगे ?अजय सिंह आखिर इन दिनों किसके ज्यादा नजदीक और भरोसेमंद… कमलनाथ या दिग्विजय सिंह ?सिंधिया की भाजपा में बढ़ती स्वीकार्यता के बीच क्या उनकी काट के लिए कांग्रेस राहुल भैया का इस्तेमाल करना चाहेगी ?चुनाव हार जाने और सत्ता में रहते कमलनाथ कांग्रेस द्वारा दरकिनार किए जाने के बाद आखिर अजय सिंह का अब भविष्य क्या ?

राहुल भैया कमबैक के साथ कांग्रेस के अंदर किन नेताओं के लिए चुनौती बन सकते हैं  ?प्यार का तोहफा नरोत्तम मिश्रा का हो या फिर दिग्विजय सिंह का राहुल भैया को कौन ज्यादा रास आएगा ?नरोत्तम मिश्रा हों या कैलाश विजयवर्गीय…अजय सिंह के प्रति उमड़ता प्रेम और रिश्तों की प्रगाढ़ता सिर्फ व्यक्तिगत…या फिर इसके भी सियासी रंग 2023 में देखने को मिलेंगे.. एक साथ ऐसे कई सवाल इसलिए उठकर खड़े हो गए क्योंकि राहुल भैया को बधाई देने में कांग्रेस से ज्यादा दिलचस्पी भाजपा के दिग्गजों ने दिखाई.. वो कहते है न पॉलिटिक्स में टिकट काटने के लिए क्राइटेरिया बनाया जाता है.. तो चुनाव जिताने के लिए कार्यकर्ता को घर से बाहर निकाल कर जोश भरा जाता है..  कोई भी राजनीतिक दल हो या फिर नेता विशेष वह अपने कार्यकर्ताओं को अपनी लोकप्रियता और स्वीकार्यता का भी संदेश देता है.. हैप्पी बर्थडे की बधाई देकर रिश्तो में आई  खटास दूर करने जतन भी नेता करते हैं.. ऐसा ही कुछ अजय सिंह के जन्मदिन पर नजारा देखने को मिला जब गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ही नहीं भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी प्यार का तोहफा लेकर चर्चित बंगले सी 19 पहुंचे.. और भी कई लोगों ने फोन पर बधाईयां दी…

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बड़ी दूर से आए. प्यार का तोहफा लाए..

इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि सियासत में अपनी लाइन बढ़ाने और विरोधी की छोटी करने के जतन भी खूब किए जाते.. वो कहते हैं चुनाव में काम बोलता है ..लेकिन विकास  ही सब कुछ नहीं ..प्रबंधन और जोड़-तोड़ भी अब  टिकिट हासिल करने से लेकर चुनाव लड़ने और जीत जाने के बाद बड़ी भूमिका निभाती  है.. ऐसे में मेल मुलाकात हो या कुछ तस्वीर अंतिम सत्य नहीं माना जाता ..लेकिन अंदर की बात समय आने पर चोंकाती जरूर है.. भाजपा या कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर इससे अछूती नहीं.. मोदी शाह नड्डा की लाइन हो या फिर राहुल सोनिया का एजेंडा इन दिनों राज्यों की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ… ऐसे में जब मध्यप्रदेश में कांग्रेस को बदलती भाजपा में यूपी समेत पांच राज्यों के बाद  किसी अप्रत्याशित गुटबाजी के सामने आने पर का इंतजार है… तब मध्यप्रदेश में जहां कांग्रेस के सारे सूत्र कमलनाथ के पास वहां पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के जन्मदिन राजधानी में लगे और लगाए गए मजमा ने एक नई बहस छेड़ दी.. यह सब उस वक्त हुआ है जो भाजपा में महाराज का मेगा शो ग्वालियर में सुर्खियां बटोर रहा

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..जहां सिंधिया की अगुवाई करने के लिए मुरैना पहुंचे केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के समर्थकों ने भी जोरदार स्वागत कर शक्ति प्रदर्शन का ही संदेश दिया वह बात और है कि भोपाल पहुंचकर नरेंद्र सिंह ने साफ कर दिया कि भाजपा में कोई पावर सेंटर नाम की चीज नहीं.. इधर पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने दावा किया कि राहुल भैया में दम है तभी गृहमंत्री उन्हें बधाई देने आए हैं.. प्रधानमंत्री भी कहेंगे तो भी राहुल भैया कांग्रेस छोड़कर भाजपा में नहीं जाने वाले.. इसलिए कमलनाथ जी मध्य प्रदेश से बाहर  तब कांग्रेस में जन्मदिन के जश्न पर अजय सिंह के शक्ति प्रदर्शन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.. कांग्रेस के विधायक कितने पहुंचे यह ज्यादा महत्व नहीं रखता बल्कि उनका शक्ति प्रदर्शन ही बहुत कुछ सोचने को मजबूर करता.. जहां शिवराज सरकार के नंबर दो गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा भी राहुल भैया को बधाई देने उनके बंगले पर जा पहुंचे… इस मुलाकात को कुछ दिन पहले ही अजय सिंह की नरोत्तम के आवास पर हुई मुलाकात से बने सौहार्द मुलाकात जोड़कर देखा जा रहा है.. किसी ने सही कहा है राजनीति में जो दिखता है वही अंतिम सत्य नहीं होता  यहाँ भी अंदर की बात कुछ और ..तो कहा जा सकता है कि कंफ्यूजन क्रिएट कर के भी सियासी हित साधे जाते हैं.. यह सब कुछ कैडर कार्यकर्ता की पार्टी भाजपा में फिलहाल साफ दिखाई देता है.. लेकिन अजय सिंह के साथ नरोत्तम मिश्रा की सामने आई बधाई संदेश की तस्वीरें यह सवाल जरूर खड़ा कर चुका है.. कि यह सब कुछ सामान्य शिष्टाचार तक सीमित है.. तो फिर बीते गुजरे सालों में यह नजर क्यों नहीं आया… और यह दिए है तात्कालिक सियासी रिश्ते मजबूत करने की दोनों की कोई मजबूरी है ..तो फिर बात ही कुछ और है… दूरगामी लक्ष्य को लेकर यदि शिवराज सरकार के प्रवक्ता नरोत्तम प्यार का तोहफा देने के लिए अजय सिंह के घर पहुंचे …कभी विधानसभा के फ्लोर पर अजय सिंह की नरोत्तम के अलावा जिन कैलाश विजयवर्गीय से सीधी तकरार चर्चा का विषय बनती थी वो भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भी बधाई देने बड़ी दूर से चलकर प्यार का तोहफा देने आए…..

तो फिर इसके सियासी निहितार्थ निकाले जाना भी लाजमी.. सवाल क्या अजय सिंह शक्ति प्रदर्शन के साथ अपने सहयोगी नेताओं समर्थकों के साथ कांग्रेस नेतृत्व को कोई संदेश अपनी ओर से दिया है.. तो फिर वह क्या है ..नरोत्तम मिश्रा के ही आवास पर कुछ  साल पहले विधानसभा के फ्लोर पर अजय सिंह को झटका देने के लिए उस वक्त के उप नेता प्रतिपक्ष चौधरी राकेश सिंह का सदन के अंदर इस्तीफा कराया गया था…  सुविधा की सियासत में यह कोई नई बात नहीं… फिर भी बड़ा सवाल क्या अजय सिंह कम बैक कर रहे हैं तो फिर किसके लिए चुनौती बनेंगे और क्या कमलनाथ के उत्तराधिकारी के सस्पेंस खत्म होने तक मैदान में डटे रहेंगे.. बधाई देने पहुंचे नरोत्तम का यदि अपना गणित तो क्या गारंटी है कि दिग्विजय सिंह इस बार अजय सिंह के खेवनहार बनकर सामने आएंगे..

क्राइटेरिया और एजेंडे पर सस्पेंस.. कन्फ्यूजन बढ़ेगा या खत्म होगा

अजय सिंह राहुल भैया कांग्रेस की राजनीति में मध्य प्रदेश का बड़ा चेहरा…जो पार्टी पॉलिटिक्स में फिलहाल हाशिए पर.. फिर भी लंबे अरसे बाद जन्मदिन के बहाने उन्होंने सिर्फ जश्न ही नहीं मनाया बल्कि जहां जिसको सियासी संदेश देना था पहुंचा दिया.. उनके सरकारी बंगले में कांग्रेस के कितने विधायक पहुंचे ..उससे ज्यादा मायने रखता है कि आखिर नरोत्तम मिश्रा और कैलाश विजयवर्गीय ने व्यक्तिगत रिश्तो को मजबूती क्यों दी.. क्या इसे महाराज की भाजपा में बढ़ती स्वीकार्यता से जोड़ कर देखा जाए.. या फिर कांग्रेस के सारे सूत्र अपने पास रखने वाले कमलनाथ के उत्तराधिकारी की तलाश की संभावनाओं से जोड़कर देखा जाए.. बधाई देने के लिए तो पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी पहुंचे.. पहुंचे तो कई और दूसरे विधायक भी.. लेकिन प्रदेश कांग्रेस दफ्तर के बगल में अजय सिंह के घर पर लगा यह मजमा कांग्रेस के कई नेताओं के साथ खासतौर से विधायकों को सोचने को मजबूर जरूर कर गया.. सभी जानते हैं कि अगले कुछ महीनों में कांग्रेस की राजनीति मध्यप्रदेश में भी करवट ले सकती है..

इसलिए कांग्रेस के पदाधिकारी हो या फिर विधायक ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर कहावत को चरितार्थ करने को मजबूर नजर आए.. अजय सिंह ने खुला ऐलान भले ही नहीं किया लेकिन मीडिया के मार्फत यह संदेश जरूर दे दिया कि नवरात्रि के बाद वह पैदल यात्रा पर निकल सकते हैं.. तो बड़ा सवाल क्या इससे पहले कांग्रेस में बदलाव की पटकथा सामने आ जाएगी.. या फिर कमलनाथ को भरोसे में लेकर ही अजय सिंह कम बैक की कोशिश में जुट गए हैं..

भाजपा  में अंततः कन्फ्यूजन खत्म करने की एक्सरसाइज निर्णायक दौर में पहुंचती नजर आ रही है.. मुख्यमंत्री आवास पर देर रात तक चली महत्वपूर्ण बैठक इसकी अहम कड़ी साबित हो सकती है.. फिर भी बड़ा सवाल कैडरबेस पार्टी भाजपा जिसकी बैठक का क्राइटेरिया फिक्स नहीं एजेंडा सभी को पता नहीं.. आखिर यह यदि महत्वपूर्ण बैठक है तो फिर इससे कन्फ्यूजन बढ़ेगा या फिर आप खत्म हो जाएगा.. तो भाई फार्मूला और फैसले क्या होंगे जो इस बैठक के बाद सामने आएंगे .. क्या गारंटी है कि कल के दिन में नेताओं के अच्छे दिन आएंगे तो क्या दशहरा दीपावली का इंतजार करना होगा.. बीजेपी भले ही 2023 के तैयारियों को ध्यान में रखते हुए धीरे-धीरे कदम आगे बढ़ा रही हो.. लेकिन इससे पहले चार उपचुनाव बड़ी चुनौती पर भाजपा में कन्फ्यूजन परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं ..इस बैठक में विशेष दिलचस्पी राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश ले ली तो प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव  पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में बदलाव कर भोपाल रुके.. क्या इसे राष्ट्रीय नेतृत्व के दिशा निर्देश माना जाए या फिर ज्योतिरादित्य की राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ हो चुकी बातचीत के आगे की लाइन माना जाए..  फिलहाल  विशेष आमंत्रण पर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को इसका हिस्सा बनाया गया.. बैठक का एजेंडा  बैठक में शामिल अधिकांश सदस्यों को नहीं बताया गया था

..शिवराज सिंह चौहान के दिल्ली प्रवास और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात के पहले इस बैठक की तारीख तय हो गई.. लेकिन  बैठक के समय  में जरूर बदलाव किया गया.. नरेंद्र सिंह तोमर जो अपने संसदीय क्षेत्र मुरैना में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के रोड शो का हिस्सा बने.. वो बीती रात ही भोपाल पहुंच गए थे ..दोपहर बाद मुख्यमंत्री के साथ नरेंद्र सिंह ने मिंटो हॉल में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की.. सवाल इस बैठक के जरिए आखिर सत्ता और संगठन कौन से फैसले लेना चाहता है .. इसे तात्कालिक या दूरगामी रणनीति का हिस्सा माना जाए.. यह सवाल इसलिए क्योंकि भाजपा नेतृत्व और उसके वरिष्ठ जिम्मेदार नेता इस सरकार को बनाने का श्रेय ज्योतिरादित्य सिंधिया को देते रहे हैं.. दो-तीन दिन के ग्वालियर प्रवास पर पहुंच चुके हैं.. पहले दिन मेगा शो के जरिए अपनी लोकप्रियता को दर्शा ना फिर दूसरे दिन ग्वालियर में बुद्धिजीवियों के बीच अपनी बात रख रहे… ऐसे में गुरुवार को डिनर के साथ मुख्यमंत्री निवास पर शीर्ष नेतृत्व की इस बैठक से महाराज की दूरी भी कुछ सवाल खड़े करती है… निश्चित तौर पर भाजपा में फैसले लेने के लिए कई फोरम मौजूद है.. लेकिन यह भी सच है कि जिस कोर कमेटी की बैठक का  जिक्र दिन भर रहा और जिससे प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने इनकार भी कर दिया, उसको कमेटी की अंतिम बैठक तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह की अध्यक्षता में विधानसभा चुनाव 2018 से पहले हुई थी.. राकेश सिंह जो जबलपुर से सांसद है.. प्रदेश सत्ता संगठन की राजनीति फिलहाल दूरी बनाए है..

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जबलपुर दौरे के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मौजूद कई दूसरे नेताओं की तुलना में राकेश सिंह का सियासी कद और दबदबा बढ़ा दिया था…. विष्णु दत्त के अध्यक्ष रहते ज्यादातर बैठकर महा मंत्रियों और फिर पदाधिकारियों की होती रही है.. इस बीच प्रदेश कार्यकारिणी की भी एक बैठक हो चुकी है.. पीढ़ी परिवर्तन के दौर में बदलती बीजेपी के सामने नई चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए नई भूमिका में शिव प्रकाश और प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव इन दिनों खाते सक्रिय है.. मंडल से लेकर जिला और जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन का विस्तार अभी भी जारी है.. संगठन के पदाधिकारियों खासतौर से महा मंत्रियों को प्रदेश का सघन दौरा करने का फरमान बार-बार सुनाया जाता है.. पिछले दिनों उपचुनाव वाले दो क्षेत्रों का दौरा कर लौटे प्रदेश प्रभारी की मौजूदगी में इसका फीडबैक भी लिया गया.. मोर्चा प्रकोष्ठ किस जिम्मेदारी भी बढ़ा दी गई है खासतौर से चार उपचुनाव को लेकर.. ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर मुख्यमंत्री निवास पर बुलाई गई इस बैठक का एजेंडा क्या है..

भाजपा में रुके हुए फैसलों में निगम मंडल में नियुक्ति संगठन मंत्रियों का एडजस्टमेंट ,दीनदयाल समितियों के साथ नेताओं कार्यकर्ताओं को एडजस्ट किए जाने की एक्सरसाइज कई बार हो चुकी है… दीनदयाल समितियों पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान फोकस बनाए हुए हैं.. जिसके जरिए शिवराज और मोदी सरकार की योजनाओं के जरिये  लाभांवित हितग्राहियों की सूची बनाकर उन्हें भाजपा के वोट बैंक में तब्दील करने की बड़ी योजना पर पार्टी काम कर रही है .. सवाल क्या प्रदेश स्तरीय दीनदयाल समितियों में पुरानी पीढ़ी के अनुभवी नेताओं को एडजस्ट किया जाएगा प्रदेश स्तर पर इनकी संख्या 31 और जिला स्तर पर 21 होने की संभावना है जबकि ब्लॉक स्तर पर भी यह समितियां गठित की जाएगी.. आधा दर्जन संभागीय संगठन मंत्रियों की सेवाएं समाप्त कर जिन्हें प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य बनाया गया क्या इनकी उपयोगिता और समर्पण को देखते हुए इन्हें नई भूमिका में एडजस्ट किया जाएगा ..सत्ता और संगठन में समन्वय का दावा लेकिन फैसले सुनाये नहीं जा रहे.. तो यह भी सच है कि संगठन के कई जिलों में कार्यकारिणी का गठन नहीं हो पाया है ..चाहे फिर से ग्वालियर चंबल के सभी जिलों से जोड़ कर देखा जाए जहां महाराज और मुन्ना भैया दो केंद्रीय मंत्री के तौर पर केंद्रीय नेतृत्व के बहुत करीबी माने जाते.. जिला कार्यकारिणी तो भोपाल से लेकर इंदौर और उज्जैन की भी सामने नहीं आई है..

लाख टके का सवाल मुख्यमंत्री निवास पर हुई बैठक में जिन नेताओं को आमंत्रित किया गया क्या इसे पार्टी द्वारा एक फोरम प्रदान किया जाएगा.. तो क्या जरूरी मुद्दों पर यह सभी सदस्य हर महीने एक साथ बैठेंगे.. या फिर इसमें कुछ और सदस्यों को जोड़ा जाएगा.. फिर भी इसका क्राइटेरिया आखिर क्या होगा क्योंकि भाजपा भले ही अनुसूचित जाति जनजाति के नेतृत्व पर जोर देती रही लेकिन इस बैठक का हिस्सा इस वर्ग विशेष का कोई सदस्य नहीं बना.. भाजपा में मुख्यमंत्री प्रदेश अध्यक्ष संगठन महामंत्री के अलावा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ,राष्ट्रीय पदाधिकारियों केंद्रीय मंत्री सत्ता और संगठन के प्रतिनिधि और जाति वर्ग विशेष के प्रतिनिधि को ध्यान में रखते हुए कोआर्डिनेशन कमेटी समेत दूसरे फोरम बनाए जाते रहे.. जो बड़े और निर्णायक फैसले के भागीदार बनते रहे..

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