आ देखें जरा… किसमें कितना है दम…

दरअसल किस दल को सरकार बनाने लायक बहुमत प्राप्त है इसका लिटमस टेस्ट फ्लोर टेस्ट ही है और कोई भी दल तब यह टेस्ट कराना चाहता है जब उसे पूरा भरोसा होता है कि उसके विधायकों की संख्या बहुमत के लायक है प्रदेश में कांग्रेस की सरकार का संकट उस समय बढ़ गया

जब सभी प्रयासों के बाद में बेंगलुरु में ठहरे 22 बागी विधायक भोपाल आने के लिए तैयार नहीं हुए और विपक्षी दल भाजपा यही चाह रही थी की कांग्रेस के बागी विधायक भोपाल ना आने पाए फिलहाल समाचार लिखे जाने तक सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मुख्यमंत्री कमलनाथ विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रजापति और मंत्रियों एवं विधायकों के साथ चर्चा कर रहे हैं और चर्चा के बाद यदि आज सत्र बुलाया जाता है और फ्लोर टेस्ट होता है

तो फिर किस दल के दावे में कितना दम है यह तय हो जाएगा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ का जो पहला ट्वीट आया था उसमें वे विधि विशेषज्ञों से चर्चा करने की बात कह रहे थे। वहीं दूसरी ओर भाजपा खेमे में उत्साह का वातावरण है क्योंकि जब तक कांग्रेस के बागी विधायक भोपाल नहीं आ जाते तब तक पार्टी की उम्मीद है उफान पर है

और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 22 विधायकों के भोपाल आने की कोई संभावना नहीं है यदि भी आते हैं तो उनके लिए कर्नाटक और मध्य प्रदेश के डीजीपी को सुरक्षा करने के निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं। कुल मिलाकर पिछले एक पखवाड़े से जो राजनीतिक घमासान मचा हुआ था

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पालन में यदि आज शाम 5:00 बजे के पहले हेलो टेस्ट हो जाता है तो तय हो जाएगा कि बहुमत के विधायकों का दावा कर रहे कांग्रेश और भाजपा के विधायकों में से किसके दावे में दम है लेकिन सरकार बचाने की अंतिम कोशिशें जारी हैं और दूसरी ओर सरकार को गिराने की भी पूरी कोशिशें हो रही हैं आज क्या होता है शाम तक पता चल जाएगा क्योंकि रात अभी बाकी है बात अभी बाकी है।

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