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चुनावी संघर्ष सोशल मीडिया के सहारे

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भोपाल। जिस तरह से दिन प्रतिदिन सोशल मीडिया का उपयोग बढ़ता जा रहा है उसको देखते हुए अब राजनीतिक दल भी चुनावी संघर्ष को जीतने के लिए सोशल मीडिया को सबसे बड़ा सहारा मान रहे हैं। प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2023 के लिए भाजपा और कांग्रेस सोशल मीडिया को सशक्त बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

दरअसल अब आम हो या खास हर हाथ में मोबाइल है। सेकंड में सूचनाएं लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंचती है और राजनीतिक दलों को अपना पक्ष जनता के बीच पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया सबसे बड़ा माध्यम नजर आ रहा है। यही कारण है कि प्रदेश के दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस में अपनी सोशल मीडिया टीम को सशक्त बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। उसके लिए अनुभवी लोगों की सेवाएं ली जा रही है और कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। जैसे अब तक भाजपा सोशल मीडिया में सबसे मजबूत मानी जाती रही है लेकिन कांग्रेस ने तेजी से सोशल मीडिया में अपनी पकड़ बनाई है।

बहरहाल, गुरुवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में सोशल मीडिया और आईटी विभाग की प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित की गई। जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पार्टी के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव, प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा एवं सोशल मीडिया वाह आईटी विभाग के राष्ट्रीय संयोजक अमित मालवीय विशेष रुप से उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संबोधित करते हुए कहा की कांग्रेस दुष्प्रचार करेगी। इसका सोशल मीडिया के माध्यम से जवाब देना है। प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव ने कहा की सोशल मीडिया और आईटी में युवा एवं महिलाओं की संख्या बढ़ाई जाए। 80 हजार से अधिक कार्यकर्ताओं को हमने प्रशिक्षित किया है और सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर पार्टी की बढ़त बनाए रखना है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि 2023 और 2024 में इतिहास बनाने के लिए सोशल मीडिया के कार्यकर्ता उत्साह से भरे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की 15 महीने की सरकार में गरीब कल्याण की सारी योजनाओं को बंद किया गया था। कांग्रेस के झूठ का जवाब देकर सच को उजागर करने में सोशल मीडिया के वीर योद्धा सक्रिय हो जाए।

प्रदेश संगठन महामंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि रील के माध्यम से रियल को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से पहुंचाया जा सकता है। सोशल मीडिया एवं आईटी विभाग के राष्ट्रीय संयोजक पश्चिम बंगाल के सह प्रभारी अमित मालवीय ने कहा पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं को 2003 के पहले की स्थिति बताओ ना सोशल मीडिया के माध्यम से जरूरी है।

बैठक में सोशल मीडिया विभाग के प्रदेश संयोजक अभिषेक शर्मा एवं आईटी विभाग के प्रदेश सह संयोजक गौरव शर्मा ने प्रेजेंटेशन देकर सोशल मीडिया एवं आईटी विभाग के कार्यों को विस्तार से समझाया।

उधर दूसरी ओर विपक्षी दल कांग्रेस ने भारत जोड़ो यात्रा और कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जो सोशल मीडिया की टीम काम कर रही थी उसी को मध्यप्रदेश के मोर्चे पर तैनात किया है और पार्टी ने कम समय में फालोवर्स की संख्या भाजपा के बराबर करने में जो तत्परता दिखाई है उसके कारण भाजपा ने इस ओर ध्यान फोकस किया है। 2018 विधानसभा चुनाव के पहले तक भाजपा का सोशल मीडिया पर दबदबा रहता था लेकिन इसके बाद से कांग्रेस ने भी इस क्षेत्र में जमकर सेंध लगाई है और अब 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों ही दलों की ओर से चुनावी संघर्ष जीतने के लिए सोशल मीडिया को सशक्त बनाने का हर उपाय हो रहा है। भाजपा ने प्रदेश मीडिया प्रभारी के रूप में आशीष अग्रवाल को इसी आधार पर नियुक्त किया है कि उनकी सोशल मीडिया पर बेहतर पकड़ है और उन्होंने पदभार ग्रहण करने के बाद ही सोशल मीडिया और आईटी विभाग का प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम आयोजित कर दिया।

कुल मिलाकर भाजपा ने 2013 में ट्विटर पर काम शुरू किया और उसके 1.2 मिलीयन फॉलोअर्स हैं और कांग्रेस में 2015 पर ट्विटर पर आमद दर्ज कराई और उसके 1.1 मिलियन फॉलोअर्स हैं। जाहिर है सोशल मीडिया के प्रभाव को देखते हुए कांग्रेस में जहां तेजी से फालोअर्स की संख्या बढ़ाई है। वहीं अब भाजपा ने भी अपनी गति बढ़ा दी है। ऐसे में आगामी चुनाव सोशल मीडिया पर वार युद्ध के रूप में नजर आएंगे।

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