‘मोदी पार्ट 2’ जश्न में खलल डालेगा ‘स्पीच अप इंडिया’..!

देश की सियासत की धुरी बन चुके कोरोना से निपटने के लिए शुरू किए गए लॉक डाउन का चौथा चरण 31 मई को खत्म होगा। तो उससे पहले 30 मई को नरेंद्र मोदी अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला 1 साल भी पूरा करेंगे। कांग्रेस ने मोदी सरकार के इस कार्यकाल में लिए गए नीतिगत फैसलों पर सवाल खड़ा कर नेतृत्व पर प्रश्नचिन्ह लगाने की रणनीति तैयार कर ली.. खासतौर से आर्थिक मोर्चे पर सरकार की नाकामी और कोरोना पर नियंत्रण के लिए जरूरी लॉक डाउन लागू और उसे बढ़ाए जाने के तौर तरीकों पर आगे भी सवाल खड़ा करने का मन बना लिया है। रणनीति के तहत मोदी सरकार और भाजपा देश में कोई माहौल अपने पक्ष में बनाएं ।

उससे पहले कांग्रेस की ओर से खुद सोनिया गांधी. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने चार मांगों पर फोकस कर इसे जनता की आवाज में तब्दील करने के लिए स्पीक अप इंडिया बिना समय गवाएं शुरू कर दिया.. वीडियो संदेश के द्वारा यह बताने की कोशिश की कि पिछले दो माह से कोरोनावायरस के कारण नई समस्याओ के साथ पूरा देश गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है।

ऐसे में मजदूर जब भूखा प्यासा सड़क पर तब हिंदुस्तान के लोगों को कर्ज की जरूरत नहीं है.. बल्कि पैसे की जरूरत है कांग्रेस ने घर लौटते हुए मजदूरों को सुविधा छोटे कारोबारियों के लिए पैकेज लघु उद्योगों को लोन नहीं बल्कि आर्थिक मदद के साथ हर परिवार को ₹10000 की फौरन सहायता और गरीब परिवार के खाते में ₹7500 प्रति महीना 6 महीने तक के लिए दिए जाने की मांग की है.. यही नहीं मनरेगा में मजदूरों को 100 दिन की जगह 200 दिन का काम गांव में ही मुहैया कराने का आग्रह किया.. कुल मिलाकर कांग्रेस अपने इस अभियान को भले ही गैर राजनीतिक बताकर मानवीयता के आधार पर मोदी सरकार से अपना खजाना खोलने की अपील कर रही है.. लेकिन इसके पीछे सियासत से इंकार भी नहीं किया जा सकता।

विपक्ष की भूमिका में इतनी सतर्क और आक्रमक मोदी सरकार पार्ट 2 में वह पहली बार नजर आ रही.. कांग्रेस की रणनीति साफ है कि गरीब, बेसहारा, मजदूर वर्ग को भाजपा और मोदी सरकार के खिलाफ खड़ा हुआ देखना चाहती है.. यदि कोई पैकेज इन्हें मिलता है तो उसका श्रेय भी वह लेना चाहेगी.. इन दिनों राहुल गांधी लगातार मीडिया के मार्फत यदि देश को संदेश दे रहे तो विशेषज्ञों के इंटरव्यू के जरिए केंद्र सरकार को सही समय पर सही फैसला लेने की ओर भी इशारा कर रहे हैं.. राष्ट्रीय महासचिव की हैसियत से प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश पर पूरा फोकस बनाकर योगी सरकार की घेराबंदी में जुटी है। चाहे फिर वह प्रवासी मजदूरों के लिए बस मुहैया कराए जाने का विकल्प पेश करना ही क्यों न हो ।तो राष्ट्रीय अध्यक्ष कांग्रेस सोनिया गांधी मोदी विरोधी राजनीतिक दलों से संवाद और संपर्क स्थापित कर देश की खातिर इस लड़ाई को संयुक्त तौर पर लड़ने की आवश्यकता जता चुकी है।

यह सच है कि अभी मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का 1 साल पूरा होने वाला है। उनके पास अभी 4 साल का समय है इस दूसरे कार्यकाल में कश्मीर से लेकर राम मंदिर के मुद्दे का बिना विवाद के निराकरण को पहले ही मोदी सरकार अपनी उपलब्धियों से जोड़कर प्रचारित करती रही है.. अलबत्ता इस दूसरे कार्यकाल में आर्थिक मोर्चे पर सरकार की चुनौतियों अभी खत्म नहीं हुई थी कि कोरोना से बनते बिगड़ते माहौल ने देश के सामने नई समस्या खड़ी कर दी। कांग्रेस मोदी सरकार पर सीधा कोई बड़ा हमला करने के बजाय सुझाव मशवरा की आड़ में नसीहत देने में ज्यादा दिलचस्पी ले रही है.. वह मोदी के सीधे विरोध से तो बाख रही लेकिन उसके फैसलों को देश के लिए घातक जरूर साबित करना चाहती। शायद यही वजह है कि स्पीक अप इंडिया लांच करके इसे वह जनता की आवाज में तब्दील करता हुआ देखना चाहती है ।

समझा जा सकता है कि कांग्रेस को कमजोर विपक्ष का एहसास अच्छी तरह से है.. और वह यह भी जानती है कि मोदी से अभी देश की जनता का मोह भंग ब नहीं हुआ है.. कोई बड़ा चुनाव भी दूर.. इसलिए कोरोना समस्या के समाधान के लिए वह जनता की मांग को वक्त की आवश्यकता बता रही.. इसीलिए वह मानवीय आधार पर जरूरतमंदों को मदद दिए जाने की गुजारिश कर रही ..कांग्रेस की इस योजना को पार्टी के दूसरे वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली से लेकर राज्यों में आगे बढ़ाया.. जब कि रणनीति जनता के नुमाइंदों की इस आवाज को बढ़ाने में भागीदारी सुनिश्चित करना है.. यह सब उस वक्त शुरू हुआ है जब भाजपा ने मोदी सरकार पार्ट टू के जश्न को सरकार की उपलब्धियों के आधार पर प्रचार प्रसार करने की योजना बना ली है.. तो सवाल क्या कांग्रेस ने लॉक डाउन के चौथे चरण खत्म होने का ही इंतजार नहीं किया.. बल्कि मोदी सरकार कार्यकाल का 1 साल पूरा कर देश में अपनी ओर से कोई नया माहौल बनाएं.. उससे पहले कई सवाल एक साथ खड़े कर उसने मोदी सरकार और उसकी नेतृत्व पर प्रश्नचिन्ह लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

देश मे ज्यादातर राज्यों में या तो भाजपा की अपनी सरकार है या फिर वह गठबंधन का हिस्सा है.. ऐसे में जब बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दूसरी पारी का 1 साल पूरा कर रहे .. हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के समर्थकों का भरोसा कायम रखने के लिए इस सरकार के खाते में कश्मीर समस्या का समाधान और राम मंदिर का विवाद खत्म करने जैसी बड़ी उपलब्धियां उसके पास है.. जिसका वह प्रचार-प्रसार भी मोदी के नेतृत्व में करना चाहती.. लेकिन कोरोना से बने हालात ने जब देश की राजनीति का एजेंडा बदलने में कोई कसर नहीं छोड़ी.. तब भी भाजपा मोदी के नेतृत्व में अपनी सरकार की उपलब्धियों को लेकर गंभीर है।

पिछले दो माह में जब देशवासियों को घर के अंदर रहने की हिदायत दी गई..अचानक मजदूर श्रमिक सड़क पर नजर आया ..तो उसने इस सरकार की चिंता में इजाफा किया ..फिर भी भाजपा नेतृत्व को अपने नेता नेतृत्व और सरकार की नीति और नियत पर पूरा भरोसा है.. पार्टी नेतृत्व यह साबित करने में जुट गया है कि इस कोरोना की समस्या से भी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत जल्द बाहर निकल जाएगा.. जबकि दूसरी ओर आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ती जा रही है.. समय के साथ बदलती और बढ़ती चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने डिजिटल इंडिया के अपने नारे अपने संकल्प को दोहराते हुए कार्यकर्ता और उसके मार्फत जनता के बीच जाने का फैसला कर लिया..मोदी सरकार पार्ट टू की पहली सालगिरह पर भाजपा ने सोशल डिस्टेंस की जरूरत को ध्यान में रखते हुए ।

जो नई योजना बनाई उसके तहत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा फेसबुक और सोशल मीडिया के दूसरे माध्यम के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। तो पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कार्यकर्ताओं को लिखे गए पत्र को करीब 10 करोड़ घरों तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है ..इसके साथ ही वर्चुअल संवाद के माध्यम से देश भर के हर जिले में कम से कम एक वर्चुअल रैली आयोजित की जाएगी.. कोरोनावायरस के चलते सभी राजनीतिक दल सीधे जनता और कार्यकर्ताओं के बीच में जाकर वीडियो कॉन्फ्रेंस और दूसरी तकलीफ का सहारा लेकर सामाजिक और राजनीतिक मोर्चे पर अपनी मौजूदगी लगातार दर्ज करा रहे।

भाजपा ने रणनीति के तहत सहयोगी संगठनों को ऐसी ही वर्चुअल रैली आयोजित करने को निर्देशित दिया.. कोरोना से बिगड़े हालात के दौरान नई चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भाजपा पहले ही जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए एक अभियान शुरू कर चुकी है। यही नहीं कोरोना योद्धाओं को बूथ स्तर पर पार्टी द्वारा धन्यवाद देकर एक नया नेटवर्क जनता के बीच में तैयार किया जा रहा है..जिसमे सांसद, मंत्री, विधयक शिरकत करने लगे। भाजपा का दावा है कि 11 लाख से अधिक कार्यकर्ताओं द्वारा 588 जिलों में 9 हजार से अधिक मंडलों में 1.18हजार से अधिक गरीब बस्तियों में 10 लाख 30 हजार फूड पैकेट्स घर-घर भाजपा कार्यकर्ता वितरित कर चुका है।

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