‘एक्चुअल’ में देगी ‘नाथ की सेना’ ‘वर्चुअल’ का जवाब..!

प्रदेश कांग्रेस प्रभारी मुकुल वासनिक उप चुनावों के रोड मैप को अपने भोपाल दौरे के दौरान लगभग अंतिम रूप दे चुके हैं.. एकजुटता के साथ जो ताकत कांग्रेस ने कभी विधानसभा चुनाव में नहीं दिखाई.. अब वही कांग्रेश उपचुनाव में अपने सभी दिग्गज नेताओं को एक साथ एक जगह उतार कर दिखाने जा रही है ..अब इसका अखाड़ा ग्वालियर चंबल क्षेत्र वह बनाने जा रहा है .. इससे पहले स्वर्गीय माधवराव से लेकर ज्योतिरादित्य के डबरा सम्मेलन कांग्रेस की एकजुटता को रेखांकित करते रहे ..पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ के नेतृत्व में पार्टी यदि सर्वे रिपोर्ट और जमीनी हकीकत को आधार बनाकर जिताऊ उम्मीदवार को तलाश रही है.. तो उसकी नजर भाजपा के नाराज पर वादियों पर भी टिकी हुई है।

राष्ट्रीय नेतृत्व के नुमाइंदे भी उपचुनाव वाले क्षेत्रों में पहले ही सक्रिय हो चुके हैं.. लंबी एक्सरसाइज के बाद कमलनाथ बदनावर से एक्चुअल रैली में शामिल होकर चुनाव प्रचार का आगाज कर चुके हैं.. इसी तर्ज पर कांग्रेस ने ग्वालियर चंबल क्षेत्र की सीटों पर प्रचार के आगाज का कार्यक्रम बनाया है.. कोरोना और बारिश के चलते नाथ सेना के इस दौरे में अंतिम समय में फेरबदल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.. फिलहाल ग्वालियर, भिंड मुरैना के अधीन आने वाली सीट की तुलना में कांग्रेस दतिया, गुना ,शिवपुरी ,अशोकनगर को अपनी प्राथमिकता में शामिल कर रही है ..बदनावर की तर्ज में पब्लिक रैली से लेकर बंद कमरे और सभागृह में कार्यकर्ताओं से बैठक और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए टीम कमलनाथ क्षेत्र के मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रही है ..मां पीतांबरा के दर्शन करने के बाद कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के साथ इस टीम में एनपी प्रजापति, सज्जन सिंह वर्मा, अजय सिंह, सुरेश पचौरी ,उमंग सिंगार, फूल सिंह बरैया, जीतू पटवारी ,आरिफ अकील, गोविंद सिंह ,के पी सिंह ,रामनिवास रावत जैसे करीब एक दर्जन नेता एक साथ नजर आएंगे.. कांग्रेस प्रवक्ता के के मिश्रा, दुर्गेश शर्मा जो बहुत पहले से ही ग्वालियर क्षेत्र में डेरा डाल चुके हैं.. लगातार ज्योतिरादित्य पर निशाना साध रहे के के मिश्रा का कहना है कि कांग्रेस अब सिंधिया परिवार से आजाद हो चुकी है और कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस क्षेत्र में नया इतिहास लिखने जा रही है।

आजाद भारत के बाद इस परिवार का क्षेत्र की राजनीति में खासा दब दबा रहा है.. यह परिवार अब पूरी तरह से भाजपा से जुड़ चुका है .. दोनों के बीच में जुबानी जंग शुरू हो चुकी है.. कांग्रेस इसे उपचुनाव में एक बड़ा मुद्दा बनाने की फिराक में है ..कांग्रेस ने गद्दार तो भाजपा ने मध्य प्रदेश के हितों को ध्यान में रखते हुए इस्तीफा से गिरी सरकार को त्याग और कुर्बानी से जोड़ चुकी है .. बिना महाराज और सिंधिया परिवार के कांग्रेस अब तक की इस क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती का सामना करने जा रही है ..जब उसकी पार्टी के 22 विधायक इस्तीफा दे चुके हैं ..कांग्रेस 3 सीटों पर होने वाले उपचुनाव को अपने लिए एक अवसर मान रही है.. वह बात और है कि चुनाव जीतने वाले उम्मीदवार को लेकर उसने सारे विकल्प खोल रखे हैं.. कांग्रेस की नजर भाजपा से बगावत करने वाले और नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं पर टिकी है.. कांग्रेस अपनी इस कमजोरी को ताकत में तब्दील करके दिखाना चाहती है.. फिर भी सवाल क्या प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ इस सघन दौरे में पूरे समय अपनी टीम यानी सेना और सेनापति के साथ रहेंगे.. या फिर अपनी स्टाइल में भोपाल से पूर्व का क्षेत्र विशेष तक पहुंचना और लौटना जारी रहेगा.. क्या राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह भी कमलनाथ के साथ इन कार्यक्रमों का हिस्सा बनेंगे.. या फिर नाथ की सेना को वह इन क्षेत्र के दौरे के दौरान लीड करेंगे.. खुद कमलनाथ और उनके दिग्गज सहयोगी नेताओं के साथ नई पीढ़ी के नए नवेले नेताओं के लिए सिंधिया के गढ़ में जाकर उन्हें निशाने पर लेना आसान होगा..

सवाल तब खड़ा होगा जब उपचुनाव के परिणाम सामने आएंगे ..तब मूल्यांकन किया जाएगा कि नाथ की सेना अपनी उपयोगिता सिद्ध कर पाई या नहीं.. प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी मुकुल वासनिक उपचुनाव की इस लड़ाई को सोशल मीडिया के फोरम पर निर्णय बता चुके हैं ..जबकि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर ही वायरल हो रहा है जिसमें वह यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि मीडिया और फोटो की इस लड़ाई से सावधान रहना.. उनका इशारा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दौरे और इस दौरान घोषणाओं की ओर माना जा रहा.. जो शिवराज के किस क्षेत्र को सौगात देने के सिलसिले के साथ शुरू भी हो चुका है.. सवाल यह भी खड़ा होता है नाथ की सेना महाराज के गढ़ से आखिर क्या संदेश देना चाहती है.. क्या कमलनाथ रिटर्न के दावे को कांग्रेस सच साबित कर पाएगी.. वह भी तब जब 13 से 17 जुलाई के इस दौरे के दौरान सभी एक दर्जन प्रमुख नेताओं को कार्यकर्ता मीडिया और जनता से रूबरू एक साथ कराने की योजना है ।

जब कांग्रेस के यह नेता भोपाल लौटेंगे तो उसके बाद 20 जुलाई से विधानसभा का सत्र शुरू होने वाला है… जहां सदन में कांग्रेस को भाजपा सरकार की गलतियों का इंतजार रहेगा ..क्या कमलनाथ अकेले महाराज के गढ़ में अपनी साख दांव पर लगाने का मानस नहीं बना पाए.. या फिर एकजुटता को लेकर अभी भी कांग्रेस के अंदर सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है ..तो क्या उपचुनाव में चेहरा कमलनाथ का ही सामने रखकर कांग्रेस चुनाव लड़ेगी.. या फिर कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के चेहरे और संयुक्त नेतृत्व में उनकी टीम और दूसरे सेनापति मैदान में मोर्चा खोलेंगे …पहले ही कांग्रेस कई पूर्व मंत्रियों और जिम्मेदार नेताओं उपचुनाव वाले क्षेत्रों की जिम्मेदारी दे चुकी है ..देखना दिलचस्प होगा ज्योतिरादित्य की शिवराज और विष्णु दत्त शर्मा के साथ उपचुनाव वाले क्षेत्रों में शुरू हो चुकी वर्चुअल रैली का जवाब देकर कमलनाथ और उनकी सेना एक्चुअल रैली से मतदाताओं पर कितना असर छोड़ती है.. बड़ा सवाल क्या कांग्रेस के नाथ और उनकी सेना पार्टी छोड़कर गए विधायकों के घर में घुसकर उनके खिलाफ माहौल बनाने में सफल होंगे.. या फिर कमजोर संगठन और कार्यकर्ताओं की कमी के चलते उसे कहीं यह दांव उलटा तो नहीं पड़ जाएगा।

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