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Sunday, April 18, 2021
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अब आपातकाल पर बयानों की आफत

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दरअसल, राजनीति में कब क्या बोलना है इसका बहुत महत्व है। कांग्रेस के एक नेता के बयान ने रातों रात गुजरात विधानसभा का चुनाव परिणाम काफी प्रभावित कर दिया था और भी ऐसे अनेकों उदाहरण है जब चुनावी दौर में एक बयान भारी पड़ जाता है।

अभी जबकि पांच राज्यों के विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं तब 1977 के आपातकाल की यादें ताजा की जा रही है। कांग्रेसी नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को अपनी दादी इंदिरा गांधी द्वारा लगाई गई इमरजेंसी को गलत बताकर जिन्न को बाहर निकाल दिया।

हालांकि तुरंत ही उन्होंने अपनी बात को संभाला भी और साथ में यही भी जोड़ा कि जो अभी हो रहा है और जो उस समय हो रहा था, दोनों में काफी बड़ा अंतर ह।ै कांग्रेस पार्टी ने कभी भी भारत के संवैधानिक ढांचे को हथियाने की कोशिश नहीं की थी। पार्टी का डिजाइन इसकी अनुमति नहीं देता है।

अगर हम चाहे भी तो ऐसा नहीं कर सकते हैं। उन्होंने आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा की आरएसएस जो कर रहा है वह मौलिक रूप से कुछ अलग है। वह अपने लोगों से संस्थानों को भर रहा है। हम ऐसा कभी नहीं करेंगे। कार्यक्रम में उनके साथ सैम पत्रोदा प्रोफ़ेसर कौशिक बसु भी थे। इस कारण माना जा रहा है कि राहुल गांधी का यह बयान सोची-समझी रणनीति के तहत था।

जिसमें वे उस समय के आपातकाल को गलत ठहरा कर वर्तमान दौर को अघोषित आपातकाल बताना चाह रहे हो लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि उनका सामना भाजपा से है जो हर मुद्दे में कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करने का कोई मौका नहीं छोड़ती और अब इसी मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा जा रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि इमरजेंसी लगने के इतने वर्षों बाद राहुल गांधी जी को एहसास हुआ कि तब जो हुआ, वह गलत था। आज के समय में जब पीएम नरेन्द्र मोदी जी के बारे में जिस ढंग की बेहूदा टिप्पणियाँ राहुल जी करते हैं, कई वर्षों बाद उनकी ट्यूबलाइट जलेगी और तब उन्हें आज की गलती के लिए भी माफी मांगनी पड़ेगी।

बहरहाल, प्रदेश में राहुल गांधी द्वारा आपातकाल का जिक्र आने के बाद सियासत गर्म आ रही है इंदिरा गांधी और आपातकाल से भी आगे बढ़कर नेहरू और उनकी सिगरेट पीने के अंदाज़ तक पहुंच गई है। सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर इस मुद्दे पर बहस छिड़ी हुई है। भाजपा इस बहाने आपातकाल के जख्मों को उधेड़ रही है। जबकि कांग्रेस इस बहस में वर्तमान दौर को अघोषित आपातकाल से जोड़ने की कोशिश कर रही है लेकिन कांग्रेस और भाजपा की आपातकाल पर शुरू हुई बहस से बुनियादी मुद्दे पीछे छूट रहे हैं।

कुल मिलाकर सड़क पर जिस तरह से छेड़ गई है उससे यह मुद्दा सदन के अंदर भी बहस का मुद्दा बनेगा भाजपा नेता जहां पुराने मुद्दों को खंगालने में जुट गए हैं वही कांग्रेस नेता भी कांग्रेस सरकार और कांग्रेस नेताओं की उपलब्धियों का डाटा तैयार कर रहे हैं।

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