व्यापमी और बाजारू पाटों में पिसता देश का गौरव!

डॉ भुवनेश्वर गर्ग

ज्यादा नहीं, सिर्फ बीस पच्चीस साल पहले तक, आरक्षण रूपी नासूर के बावजूद, सारे बड़े सरकारी अस्पताल और मेडिकल कालेज अपने सटीक उपचार और समर्पित ज्ञानी चिकित्स्कों के लिए मशहूर थे।

बढ़ती जनसँख्या, हेल्थ बजट चबाते नेताई मगरमच्छों और भ्रष्ट तंत्र ने इस अद्भुत ज्ञान सागर को निगलना शुरू किया। इसके बाद समय आया, निजी अस्पतालों और मेडिकल कालेजों का।

दान की जमीन और चंदे के दावानल ने जगह जगह कागजों पर कंक्रीट के जंगल शुरू किये, साल में एक या दो बार मुंहदिखाई के नाम पर फेकल्टी खरीद कर खड़ी की जाती रही। भाड़े के पलंग और दिहाड़ी मरीज, साल में दो बार लगने वाले इन कुम्भ के मेलों में गोते लगाने लगे।

जो भी सामर्थ्यवान, सरकार के लिए रायचंद बना हुआ था और अपनी मैनेजराई स्किल्स में घाघ था, वो चिकित्सा के सर्वोच्च मठ का मदा’ढीठ बन बैठा। बिना लागत, साल में सौ पचास करोड़ कमाते इन सियारों की कारगुजारी देख, सत्ता में बैठे लोमड़ और उसके अनुयायी भी जाग्रत हो गए और फिर व्यापमी खेल शुरू हुआ, सरकारी सीटों को बेचने का, जिसने देश के बचे खुचे ज्ञान को भी नालंदाई ज्वाला में भस्म कर दिया।

लेकिन इन सबसे भी इतर, अब एक और गंभीर खेल चल पड़ा है, दान और चंदे से खड़े हुए इन बड़े बड़े ट्रस्ट अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों को बैकडोर से खरीदने का और यह खेल कर रहे हैं विदेशों में बैठे भारत विरोधी धनपशु। इन्हें बनाने वाले महान व्यक्तियों के ऐय्याश वंशज, इन संस्थानों को बेशुमार दौलत में विधर्मियों, विदेशियों को बेच रहे हैं, भोपाल के सरकारी जमीनों पर बने अस्पताल मेडिकल कालेज भी सबकी जुबान पर हैं, दिल्ली के फोर्टिस, मेक्स, एस्कॉर्ट्स, मेदांता भी विदेशी समूहों को पिछवाड़े से बेचे जा चुके हैं, ताजा उदाहरण है, मुंबई के सत्तर साल पुराने ट्रस्ट अस्पताल नानावटी का।

KKR समूह ने भारत के अपने मुखौटे “रेडिएंट” द्वारा इस पर कब्ज़ा कर लिया है, दिल्ली का BLK सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, फ़ोर्टिस अस्पताल निगल चुका ये समूह, ६००० करोड़ में *मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट लिमिटेड* में भी 49.7% हिस्सेदारी ले चुका है, और अब ये समूह 16 अस्पतालों सहित, 3400 बेड के साथ भारत भर में दूसरी सबसे बड़ी अस्पताल श्रृंखला (राजस्व के मामले में) का संचालन करेगा।
पिछले साल मुंबई में अपने पैर पसारने, इस समूह ने नानावटी हॉस्पिटल पर कब्जा किया और *करोना काल* में इस अस्पताल में जाने वाले सामान्य सर्दी जुखाम के ढेरों मरीज *कोरोना पॉजिटिव* बताए जाने लगे, उन धनाढ्य मरीजों से अस्पताल ने लाखों रुपये वसूले, लेकिन ६६ बिस्तर (२०%) गरीब मरीजों के उपचार के लिए रिजर्व रखे जाने की अनिवार्यता को धता बताते हुए उसने संकटकाल में इन्हे भर्ती करना तो दूर, जरुरी आकस्मिक इलाज तक उपलब्ध नहीं करवाया। मुंबई के चैरिटी कमिश्नर श्री डिगे की जांच और लूट की पोल खुलने से इन अस्पतालों की खूब किरकिरी हुई थी और इन्हीं वजहों से महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री श्री राजेश टोपे को सख्ती के साथ इन अस्पतालों को चेतावनियाँ देनी पड़ी थीं साथ ही करोना के बिना लक्षण वाले मरीजों को भर्ती ना करने का सख्त आदेश भी महाराष्ट्र सरकार ने एक महीने पहले पारित किया था। इनके कारनामों और बिलों की वजह से देश भर के कर्मठ चिकित्सकों और सेवाभावी अस्पतालों पर उंगलिया उठती रही हैं।

बदनामी का दाग झेल रहे नानावटी अस्पताल की इमेज सुधारने, KKR समूह ने इस आपदा काल में एक स्क्रिप्ट लिखवाई, इस समूह में अमिताभ का भी आर्थिक योगदान चर्चा में है, और फिर अचानक ही, हमेशा लीलावती अस्पताल में भर्ती होते आए धनपुरुष अमिताभ, खुद से ही अपने और अभिषेक के करोना पॉज़िटिव होने की खबर देते हुए नानावटी में जमा हो गए, जबकि दोनों को ही करोना के कोई लक्षण नहीं थे, फिर सरकारिया आदेश की खुल्लमखुल्ला अवहेलना करने की हिम्मत इनकी कैसे हुई? फिर बात बात में ट्वीट, हर ट्वीट में नानावटी अस्पताल का महिमामंडन, मीडिया की जबरदस्त कवरेज और नानावटी को एक कर्मवीर योद्धा, सफल अस्पताल सिद्ध किया जाने लगा, जो इसी फ़िल्मी कथा का स्क्रिप्टेड कथानक था, जिसकी सारी परतें अब उधड़ चुकी हैं!

लेकिन सिर्फ अस्पताल ही नहीं, यह समूह अब, सस्ती और विश्वसनीय दवाइयां बनाने के लिए मशहूर भारतीय कंपनियों पर भी अपनी गिद्धदृष्टी गड़ा रहा है और इसी क्रम में इसने भारतीय दवा निर्माण कम्पनी “जेबी केमिकल्स” में ३१०० करोड़ लगाकर, ५४% हिस्सा खरीद लिया है, अस्पतालों के बिलों को सैकड़ों गुना बढाकर वसूल रहे, गलत को सही और सही को गलत करते, यह बाजारू समूह, मालिकाना हक़ पाते ही, दवाइयों की कीमतों और विश्वसनीयता से खिलवाड़ नहीं करेंगे, इसकी क्या गारंटी है और चांदी के चंद टुकड़ों के लिए शुतुरमुर्ग बनता तंत्र, इन पर किस तरह कोई अंकुश लगा पायेगा?

जैसे भोपाल में ठीक को ठीक करने का धंधा चल रहा है, उसी तरह अब कुछ दिन रुक कर.. अमिताभ और अभिषेक भी नेगेटिव घोषित कर दिए जाएंगे, अस्पताल को अपना प्रचार मिल गया, अमिताभ और न्यूज़ चैनलॊं को उनका हिस्सा, पर लुटा कौन, क्या अब भी सोचने का वक्त नहीं है ? दुनिया की सबसे सटीक और सस्ती, चिकित्सा पद्धति और फ़ेमिली डॉक्टर व्यवस्था को बचाने और फिर से क़ायम रख पाने का समय अब रीतता प्रतीत हो रहा है।

वक्त का तकाजा है, सरकार, समाज, तंत्र और कारपोरेट अस्पताल अपना रवैया ठीक करें, डॉक्टरों, नर्सों को समुचित सम्मान, मानधन और समयानुसार आराम दें और सेवाभावी संस्थाओ को सभी जरुरी संसाधन उपलब्ध करवाए जाएँ तो अभी भी छोटी मछलियों को मगरमच्छों का शिकार होने से बचाया और सारे तालाब को साफ़ रखा जा सकता है, साथ ही सभी लोग पूर्ण ईमानदारी से फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए आपस में एक दूसरेकी मदद करें, तो निःसंदेह इस बीमारी को काबू कर, मृत्यु दर को 1% से भी कम किया जा सकता है।
तो चलिए, करते है, एक नई शुरुआत, अफवाहों पर ध्यान नहीं देंगे, और करोना वारियर्स का सहयोग सम्मान करेंगे, जयहिंद !

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