punjab assembly elections Kejriwal
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केजरीवाल से नहीं, विचारधारा से डरते विरोधी

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99 फीसदी आम लोगों के सपने बहुत छोटे छोटे होते हैं| एक आम आदमी सोचता है कि वो जितना कमाता है उसमें उसका परिवार सम्मान से अपनी जिंदगी जी सके, बच्चे अच्छी पढाई कर सकें, बिजली पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं हो और बुरा समय आए तो अच्छी मेडिकल सहायता मिल जाए| इतना कुछ अगर हो जाए तो एक आम आदमी की जिंदगी की 90 फीसदी दिक्कतें और मुश्किलें खत्म हो जाती हैं|…यही सपना आम आदमी पार्टी 99 फीसदी भारतीयों के लिए लेकर आयी है| इसी सपने को वो अपनी विचारधारा बताते हैं

पंजाब में चुनाव से ठीक पहले राजनैतिक उठापटक उफान पर है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री बदल दिया, तो कैप्टन अमरिंदर पार्टी बनाकर बीजेपी के साथ गठबंधन की तैयारी कर रहे हैं। इस सबके बीच अकाली नेता सुखबीर बादल के हवाले से दावा किया गया कि 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपना वोट डायवर्ट कर कैप्टन अमरिंदर को जीतने में मदद की थी ताकि आम आदमी पार्टी न जीत सके। राजनैतिक हलकों में 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर ये चर्चा पहले भी होती रही है लेकिन अकाली नेता का ऐसा बयान इस दावे को पुख्ता करता है क्योंकि उस वक्त अकाली बीजेपी के सबसे करीबी सहयोगी हुआ करते थे। तो आखिर आम आदमी पार्टी की विचारधारा में ऐसा क्या है जिससे डर कर धुर विरोधी भी एक दूसरे की मदद कर रहे हैं?

दरअसल देश के एक फीसदी लोग जो पैसा कमाने की आपाधापी में लगे हैं उनको अगर छोड दिया जाए तो 99 फीसदी आम लोगों के सपने बहुत छोटे छोटे होते हैं| एक आम आदमी सोचता है कि वो जितना कमाता है उसमें उसका परिवार सम्मान से अपनी जिंदगी जी सके, बच्चे अच्छी पढाई कर सकें, बिजली पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं हो और बुरा समय आए तो अच्छी मेडिकल सहायता मिल जाए| इतना कुछ अगर हो जाए तो एक आम आदमी की जिंदगी की 90 फीसदी दिक्कतें और मुश्किलें खत्म हो जाती हैं| यानि वो मानसिक तनाव जिसमें आज के दिन लगभग हर मध्यम वर्गीय और निम्न वर्गीय परिवार जी रहा है, वो लगभग खत्म हो जाएगा| जिंदगी ज्यादा खुशहाल और सुखदायक हो जाएगी| यही सपना आम आदमी पार्टी 99 फीसदी भारतीयों के लिए लेकर आयी है| इसी सपने को वो अपनी विचारधारा बताते हैं और इसी सपने को कार्यान्वित करने के लिए उनके हर मेनिफेस्टो में वादे किये जाते हैं| दिल्ली के उदाहरण से इस बात को समझा जा सकता है कि जिसने एक बार इस विचारधारा का स्वाद चख लिया उसे राजनीति का कोई और पकवान फिर पसंद नहीं आता| शायद यही वजह है कि अंदरखाने तमाम राजनैतिक दल इस बात से खौफ़ खाते हैं कि कहीं किसी दिन आम आदमी पार्टी की ये विचारधारा दिल्ली के दायरे से बाहर निकल गयी तो उनका क्या होगा?

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 दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने कई ऐसे काम किये जिनकी देश की राजनीति में लंबे समय से कमी महसूस की जा रही थी| ऐसे कई मामलों में तो आम आदमी पार्टी ने लोगों की उम्मीदों के मुताबिक ही फैसले नहीं किये, बल्कि लोगों को उम्मीद की नयी परिभाषा ही थमा दी| मसलन लोग बिजली के दाम मत बढाओ या कम करो की लडाई लड़ रहे थे, आम आदमी पार्टी ने उन्हें बताया कि ये एक मूलभूत सुविधा है इसे हम फ्री में देंगे| 200 यूनिट फ्री बिजली उम्मीद की एक नयी परिभाषा थी और अब दूसरे राज्यों में ये उम्मीद 300 यूनिट फ्री बिजली के साथ बढ रही है| वर्दी का सम्मान करो तो हर सरकार कहती थी लेकिन आम आदमी पार्टी ने इस सम्मान में एक करोड़ रुपये की सम्मान राशि जोडकर इसे नयी परिभाषा दे दी| भारत में कुछ साल पहले तक लोग सपने में भी सरकारी स्कूलों के प्राइवेट स्कूलों से बेहतर होने के बारे में नहीं सोच सकते थे| अच्छे स्कूल के बारे में सपने देखने का हक केवल एक फीसदी अमीरों को था और वो भी ये सपना कि चकाचौंध वाले नये प्राइवेट स्कूल खुलें जिसमें वो महंगी फीस देकर अपने बच्चों को पढा सकें| आम आदमी पार्टी ने ये सपना हर गरीब की झोली में डाल दिया और उसे अपने बच्चों के भविष्य के लिए सपने देखने की भी नयी परिभाषा दे डाली| ऐसी बहुत सी बातें हैं जो उम्मीदों के दायरे से कहीं ऊपर थी लेकिन दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने करके दिखाई|

 आम आदमी पार्टी की विचारधारा आम लोगों की उम्मीद का पौधा है। लेकिन इस पौधे को बड़ा पेड़ बनने के लिए जो खाद और मिट्टी चाहिए वो दिल्ली में नहीं है| अगर इस पौधे को किसी पूर्ण राज्य की खाद और मिट्टी नसीब हो गयी तो इसके फलने फूलने की रफ्तार बेजोड़ हो जाएगी| आम आदमी पार्टी इसी दिशा में अपनी हर मुमकिन कोशिश कर रही है| पंजाब इस मामले में सबसे सटीक और सबसे नजदीक राज्य नज़र आता है| हालांकि पार्टी उत्तराखण्ड, गोवा, उत्तरप्रदेश और गुजरात में भी विस्तार के लिए पूरा जोर लगा रही है|  अलग अलग राजनैतिक दल दिल्ली में किए आम आदमी पार्टी के कामों को कम करके दिखाने की कोशिश लगातार करते हैं। केजरीवाल सरकार ने पराली के लिए समाधान निकाला तो कहा गया कि दिल्ली में किसान ही कितने हैं? दिल्ली सरकार ने फसल खराब होने पर किसानों को 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का मुआवजा दिया तो फिर सवाल किया गया कि दिल्ली में खेती की जमीन ही कितनी है? लेकिन किसी भी पूर्ण राज्य में अगर यही सब आम आदमी पार्टी की सरकार ने कर दिखाया तो ऐसे सवालों का असर ही खत्म हो जाएगा।

 इसे इस तरह समझिये कि किसी भी विचारधारा को पनपने के लिए अच्छे संदेश और संदेशवाहक की जरुरत होती है। आम आदमी पार्टी का संदेश किसी भी मामले में बीजेपी और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियों की विचारधारा से कम नहीं है और संदेशवाहक यानि लोगों को यकीन दिला सकने वाली आवाज़ और शख्सियत के मामले में केजरीवाल कम नहीं हैं। गाहे बगाहे आपको सुनने को मिलता है कि दूसरी पार्टियां भी सस्ती बिजली, मुहल्ला क्लिनिक, अच्छे स्कूलों की बात अपने राज्यों में करने लगी हैं क्योंकि उन पर लोगों की उम्मीदों का दबाव बढने लगा है। ये सब सरकारें ऐसे काम करके आम आदमी पार्टी की विचारधारा के असर को कमजोर करने की कोशिश में लगी हैं ताकि लोगों को दिल्ली के बाहर आम आदमी पार्टी की कमी महसूस न होने लगे।  लेकिन कहा जाता है कि जिस विचार का समय आ गया हो उसे रोका नहीं जा सकता। आम आदमी पार्टी की विचारधारा का समय उस दिन से शुरु हो जाएगा जिस दिन एक पूर्ण राज्य में इनकी सरकार आ गई।

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