द्वंद, दुविधा और दंभ के राज्यसभा चुनाव

दरअसल आजादी के बाद देश में जितने भी प्रकार के चुनाव हुए हैं उनमें धीरे-धीरे परिवर्तन होते रहे चुने जाने वाले जनप्रतिनिधियों के स्वरूप भी बदलते रहे। पहले राज्यसभा समाजसेवी या की विभिन्न क्षेत्रों में विशेष योग्यता दक्षता रखने वाले व्यक्तियों को भेजा जाता था लेकिन बाद में खिलाड़ी, फिल्मी कलाकार, उद्योगपति यहां तक कि शराब माफिया भी भेजे जाने लगे और यह चुनाव कब जोड़-तोड़ का हिस्सा बन गया किसी को समझ ही नहीं आया।

अब राजनीतिक दल विधायकों की जरूरत से कम संख्या होने के बावजूद भी प्रत्याशी को मैदान में उतारते हैं और चुनाव जीतने का दम भरते हैं।

मतलब साफ होता है कि वे विधायकों की क्रास वोटिंग कराने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त कराएंगे। दल बदल करायेंगे। पिछले चुनाव में प्रदेश में विधायकों की कम संख्या होने के बावजूद भी कांग्रेस प्रत्याशी विवेक तंखा के खिलाफ भाजपा ने विनोद गोटिया को चुनाव मैदान में उतार दिया था। हालांकि गोटिया की हार हुई लेकिन भाजपा की मंशा उजागर हो गई। इस बार के चुनाव में दो प्रत्याशी को जिताने की संख्या भाजपा के पास है लेकिन कांग्रेसी भी दो प्रत्याशियों को जिताने की बात कर रहे हैं। कांग्रेस भले ही दो प्रत्याशी ना जिता पाए लेकिन उसने अपनी मंशा जाहिर कर दी है।

बहरहाल, प्रदेश में राज्यसभा की 3 सीटों के लिए 19 जून को मतदान होना है। यह सीटें दिग्विजय सिंह, प्रभात झा और सत्यनारायण जटिया के कार्यकाल के पूरा हो जाने के बाद रिक्त हुई हैं। इन 3 सीटों के लिए 4 उम्मीदवार मैदान में है। भाजपा से पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिराज सिंधिया और डॉक्टर सुमेर सिंह सोलंकी जबकि कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एवं फूल सिंह बरैया प्रत्याशी हैं। यह चुनाव शुरू से ही द्वंद और दुविधा के साए में हो रहे हैं। जब फॉर्म भरा जा रहे थे तब प्रदेश की सरकार अस्थिर थी विधायकों के इधर से उधर जाने की चर्चाएं थी और दोनों ही दलों ने दो-दो प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतार दिया जबकि वर्तमान परिस्थितियों में एक प्रत्याशी को जीतने के लिए 52 वोटों की जरूरत है।

इस लिहाज से भाजपा के पास 107 विधायक हैं और वह दोनों प्रत्याशियों को चुनाव जिता सकती है जबकि कांग्रेस के पास 92 विधायक हैं और यदि सपा बसपा एवं निर्दलीय कांग्रेस के पाले में आ जाएं तब भी वह दूसरा प्रत्याशी राज्यसभा में नहीं भेज सकती। कांग्रेस दोनों प्रत्याशियों को जिताने की बात कर रही है। कांग्रेस की एक दुविधा यह भी है कि वह नहीं कर पा रही कि प्रथम वरीयता दिग्विजय सिंह को दे या फूल सिंह बरैया को कांग्रेस को उम्मीद थी कि भाजपा सरकार का मंत्रिमंडल विस्तारित होता है और उसमें होने वाले असंतोष का फायदा वह राज्यसभा के चुनाव में ले।

लेकिन भाजपा ने मंत्रिमंडल का विस्तार चुनाव तक टाल कर कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अब कांग्रेस के अंदर वरीयता को लेकर बहस चल रही है। एक वर्ग का मानना है पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को प्रथम वरीयता दी जाए जबकि कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि फूल सिंह बरैया को प्रथम वरीयता दिया जाए। जिससे चंबल इलाके की 16 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के दौरान दलित वोटों का फायदा पार्टी को मिल सके। यहां बताते चलें कि फूल सिंह बरैया ने बसपा के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए दलितों के बीच लंबे अरसे तक काम किया है। यहां तक कि वह माधवराव सिंधिया को लोकसभा चुनाव के दौरान कड़ी चुनौती दे चुके हैं। कांग्रेस पार्टी के लिए 24 विधानसभा सीटों के उपचुनाव बेहद अहम हो गए हैं। इसलिए संभावना जताई जा रही है कि पार्टी हाईकमान से चर्चा करने के बाद फूल सिंह बरैया को प्रथम वरीयता दी जाएगी क्योंकि बसपा ने उपचुनाव के दौरान सभी 24 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की घोषणा कर दी है। ऐसे में दलित वोटों को पार्टी की तरफ रोकने के लिए कांग्रेस फूल सिंह बरैया को राज्यसभा में भेज सकती है।

हो सकता है दिग्विजय स्वयं फूल सिंह बरैया को पहली वरीयता के लिए नाम प्रस्तावित करें क्योंकि दिग्विजय सिंह की पहली प्राथमिकता कांग्रेस और खासकर ज्योतिरादित्य सिंधिया को मात देने की है। कांग्रेस विधायक दल की बैठक 17 जून को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के निवास पर होगी जिसमें यह तय कर लिया जाएगा कि प्रथम वरीयता की वोट किसे देना है।

उधर भारतीय जनता पार्टी पूरे विश्वास में है कि राज्यसभा के लिए उसके दोनों प्रत्याशियों की जीत होगी पार्टी के स्वयं 107 विधायक है और इस समय सपा बसपा एवं निर्दलीय का झुकाव भी सत्ताधारी दल भाजपा के साथ है। कुल मिलाकर बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में साफ-सुथरे माने जाने वाले राज्यसभा के चुनाव भी द्वंद दुविधा और दंभ मैं सराबोर है। गुजरात में कांग्रेस के 2 विधायकों के इस्तीफे के बाद प्रदेश में राजनैतिक हलचल बढ़ गई है और दोनों ही दल अपने अपने विधायकों को निगरानी में लिए हुए हैं।

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