nayaindia हर्निया से गंभीर मुश्किलों का खतरा - Naya India
गेस्ट कॉलम| नया इंडिया|

हर्निया से गंभीर मुश्किलों का खतरा

हमारे शरीर में छाती से कमर तक के अंदरूनी अंगों को सही स्थान पर सुरक्षित रखने के लिये मांसपेशियों का कवर होता है। जब इस कवर के टिश्यू कमजोर होने से इसमें छेद बनता है और अंगरूनी अंग इस छेद से बाहर निकलने लगते हैं तो हर्निया की दशा बनती है। पेट कवर करने वाली मांसपेशी कमजोर होने पर छोटी आंत के बाहर उभरने से ऐस होता है। मेडिकल साइंस के अनुसार हर्निया के चार प्रकार हैं- इन्ग्यूनल हर्निया, हेइटल हर्निया, अमबिलिकल हर्निया और वेन्ट्रल हर्निया। हमारे देश में प्रतिवर्ष इसके एक करोड़ से ज्यादा मामले सामने आते हैं। ज्यादातर मामलों में तुरन्त मृत्यु का भय नहीं होता लेकिन लम्बे समय तक इलाज न कराने से जीवन को खतरा बनाने वाली जटिलताएं पैदा हो जाती हैं।

लक्षण

हर्निया वाले स्थान पर गांठ या उभार नजर आता है। उदाहरण के लिये इनग्यूनल (वंक्षण) हर्निया में कमर और जांघ के मिलने के स्थान पर पेल्विक बोन (जघन हड्डी) के दोनों ओर एक उभार (गांठ) दिखाई देता है। जब व्यक्ति लेटता है तो यह गांठ गायब हो जाती है लेकिन खड़े होने, झुकने और खांसने पर नजर आती है। पीड़ित इस गांठ को छूकर महसूस कर सकता है। बहुत से मामलों में गांठ के आसपास के क्षेत्र में बैचेनी और दर्द भी रहता है। ये लक्षण हर्निया के प्रकारों पर निर्भर हैं उदाहरण के लिये हेइटम हर्निया में सीने में जलन, खाना निगलने में परेशानी और सीने में दर्द जैसे लक्षण उभरते हैं। कुछ प्रकार के हर्निया में कोई भी लक्षण नहीं होता और व्यक्ति को तब तक पता भी नहीं चलता जब तक वह डाक्टर के पास जांच के लिये न जाये।

हर्निया-कारण

हर्निया, मांसपेशियों की कमजोरी और उस पर पड़े अतिरिक्त खिंचाव का परिणाम है, मांसपेशियों में कमजोरी और खिंचाव इन वजहों से होता है- जन्मजात स्थिति जो गर्भ में शिशु के विकास के दौरान पैदा हुई है, उम्र बढ़ने, चोट या सर्जरी, व्यायाम के दौरान भारी वजन उठाना, क्रोनिक (पुरानी) खांसी, सीओपीडी (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पलमोनरी डिस्आर्डर), मल्टीपल प्रेगनेन्सी, कब्ज के कारण मल त्याग के समय पड़ने वाला दबाव, जलोदर (पेट में तरल पदार्थ की अधिकता), मोटापा, सिस्टिक फाइब्रोसिस,  धूम्रपान और समय से पहले या कम वजन के साथ पैदा होना।

हर्निया कितनी तरह का?

इन्ग्यूनल (वंक्षण) हर्निया: यह कंडीशन तब बनती है जब छोटी आंत लोअर एब्डोमिन में सबसे कमजोर स्थान से गुजरती है तो वह इस कमजोर स्थान से बाहर की ओर उभर आती है। इसके अलावा इन्ग्यूनल कैनाल जहां पर मुड़ती है यदि वहां ऐब्डॉमिन वॉल कमजोर है तो इन्ग्यूनल कैनाल भी बाहर की ओर उभर आती है। इन्ग्यूनल कैनाल कमर क्षेत्र में होती है, पुरुषों में यह वह क्षेत्र है जहां शुक्राणु नलिका पेट से अंडकोश में जाती है। यह नाल अंडकोष को थामकर कर रखती है। महिलाओं में, इन्ग्यूनल कैनाल में एक लिगामेंट होता है जो गर्भाशय को थामने में मदद करता है। ये हर्निया पुरुषों में इसलिये आम हैं क्योंकि जन्म के तुरंत बाद अंडकोष (टेस्टीकल्स) इन्ग्यूनल कैनाल के माध्यम से अवतरित होते हैं। इन्ग्यूनल कैनाल पीछे की ओर से लगभग पूरी तरह से बंद होती है यदि यह पीछे से पूरी तरह बंद न हो तो उस क्षेत्र के कमजोर होने से इन्ग्यूनल हर्निया का रिस्क बढ़ जाता है।

हेइटल हर्निया: यह हमेशा गैस्ट्रोओसोफेगल रिफ्लक्स के कारण होता है, इसमें पेट की सामग्री के इसोफागस (भोजन नलिका) में पीछे की ओर लीक होने से जलन महसूस होती है। यह हर्निया उस अवस्था में विकसित होती है जब पेट का भाग डायाफ्राम पर दबाव बनाकर चेस्ट कैविटी में फैलता है। डायाफ्राम वास्तव में मांसपेशियों की एक चादर है जो पेट से छाती के अंगों तो अलग करती है। इसके सिकुड़ने और फैलने से फेफड़ों को सांस लेने में मदद मिलती है। हेइटल हर्निया घातक होता है और यह 50 वर्ष या इससे ज्यादा उम्र के पुरूषों में होता है। बच्चों में यह जन्मजात होता है।

अमबिलिकल (नाल) हर्निया: यह शिशुओं और बच्चों में होता है, इसे घेंघा हर्निया भी कहते हैं। इसमें छोटी आंत, नाभि के पास एब्डोमिन दीवार से टकरा कर उभर आती है। जब बच्चे रोते हैं तो यह उभार स्पष्ट दिखाई देता है। बच्चे के एक या दो साल का होने पर यह हर्निया अपने आप समाप्त हो जाता है क्योंकि उम्र बढ़ने पर पेट की मांसपेशियां मजबूत हो जाती हैं। यदि यह पांच वर्ष तक दूर न हो तो सर्जरी की जरूरत पड़ती है। वयस्कों में यह मोटापे, गर्भावस्था, जलोदर या पेट पर बार-बार खिंचाव पड़ने से विकसित होता है।

वेन्ट्रल हर्निया: इसे उदर हर्निया भी कहते हैं, इसमें पेट की मांसपेशियों के टिश्यू ही बाहर की ओर उभरने लगते हैं।   लेटने पर इसका आकार कम हो जाता है और खड़े होने पर ज्यादा। यह हर्निया जन्मजात भी होता है और मोटापे, गर्भावस्था या किसी असामान्य गतिविधि के कारण पेट की मांसपेशी के टिश्यू के फटने से भी। यदि कभी पेट की सर्जरी हुई है तो चीरे के स्थान की मांसपेशी कमजोर होने पर यह हर्निया विकसित होता है।

हर्निया से जटिलताएं

हर्निया का समय पर इलाज न कराने से अनेक समस्यायें पैदा होती हैं जैसेकि हर्निया के आसपास के क्षेत्र में सूजन और दर्द। इसके अलावा लम्बे समय तक उपचार न कराने पर छोटी आंत, एब्डोमिन वॉल में फंस जाती है और उसमें रक्त प्रवाह कम होने से उसके टिश्यू संक्रमित होकर नष्ट होने लगते हैं। इस कंडीशन में हर्निया के उभार का रंग लाल या बैंगनी हो जाता है तथा मतली, उल्टी और बुखार की शिकायत के अलावा गैस पास करने व मल त्याग करने में अहसनीय दर्द होता है। ऐसे में पीड़ित को इमरजेन्सी मेडिकल केयर उफलब्ध करानी चाहिये।

हर्निया को डायग्नोज करना

हर्निया कन्फर्म करने के लिये डॉक्टर शारीरिक जांच के अंतर्गत पेट और कमर क्षेत्र का मुआयना करते हैं जिससे उन्हें हर्निया का उभार महसूस हो जो पीड़ित को खड़े होने, खांसने या खिंचाव पड़ने पर महसूस होता है। हर्निया की वास्तविक पोजीशन जानने के लिये पेट का अल्ट्रासाउंड,  सीटी स्कैन और एमआरआई स्कैन जैसे इमेजिंग टेस्ट किये जाते हैं। हाइटल हर्निया का संदेह होने पर पेट की अंदरूनी स्थिति का गहन अवलोकन करने हेतु गैस्ट्रोग्राफिन या बेरियम एक्स-रे और इंडोस्कोपी टेस्ट भी किया जाता है।

इलाज

हर्निया का स्थायी इलाज सर्जरी है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि शुरूआती स्टेज में ही सर्जरी की जाये। इस सम्बन्ध में डाक्टर हर्निया के आकार और पीड़ित पर हर्निया के लक्षणों को देखने के बाद सर्जरी का निर्णय लेते हैं। हर्निया की शुरूआत में डाक्टर मरीज को ट्रस नामक एक विशेष अंडरगारमेन्ट पहनने की सलाह देते हैं, यह हर्निया का आकार बढ़ने से रोकने के साथ पेट के अंदरूनी अंगों को उनकी जगह पर बनाये रखता है। हेइटल हर्निया की स्थिति में ओवर-द-काउंटर दवायें (एंटासिड, एच-2 रिसेप्टर ब्लॉकर्स और प्रोटॉन पंप इन्हेबिटर्स) दी जाती हैं जिनसे पेट में एसिड का बनना रूकता है और परेशानी कम होती है।

हर्निया सर्जरी: हर्निया का आकार बढ़ने पर डाक्टर सर्जरी की सलाह देते हैं। सर्जरी में दौरान पेट की दीवार में छेद करके या चीरा लगाकर, सर्जिकल जाल (मेश) के पैच से हर्निया की रिपेयरिंग की जाती है। इसके लिये ओपन और लैप्रोस्कोपिक दोनों तरह की सर्जरी होती है। लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में प्रभावित स्थान के आसपास कुछ छोटे चीरे लगाकर एक छोटे कैमरे और लघु शल्य चिकित्सा उपकरणों से हर्निया रिपेयर करते हैं। यह सुरक्षित विधि है और इससे आसपास के टिश्यू कम डैमेज होते हैं। ओपन सर्जरी में सर्जन, हर्निया प्रभावित क्षेत्र के पास चीरा लगाकर उभरे टिश्यू को पेट में वापस धकेलकर उस क्षेत्र को बंद कर देता है। इसमें भी सर्जिकल जाल (मेश)  से कमजोर मांसपेशी या ऊतक को मजबूती दी जाती है। ओपन सर्जरी या लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में से कौन सी विधि हर्निया रिपेयरिंग के लिये सबसे ठीक होगी इसका फैसला सर्जन, हर्निया के प्रकार,  आकार और शरीर में हर्निया की पोजीशन के आधार पर करता है। सर्जरी के बाद हो रहे दर्द को कंट्रोल करने के लिये डॉक्टर पेन मैनेजमेंट मेडीकेशन और जख्म जल्दी भरने के लिये एंटीबॉयेटिक तथा एंटीसेप्टिक मेडीकेशन प्रयोग करते हैं। सर्जरी से रिकवर होने में एक से दो सप्ताह का समय लगता है,  इस दौरान 10 पाउंड से ज्यादा वजन का सामान न उठायें। ओपन सर्जरी के बाद सामान्य रूटीन में आने में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की तुलना में ज्य़ादा समय लगता है और इसमें अधिक एतियात बरतने की जरूरत होती है। इस सम्बन्ध में डाक्टर से एतियात सम्बन्धी जरूरी जानकारी लेना न भूलें।

घरेलू उपचार: इन उपचारों से हर्निया ठीक तो नहीं होता लेकिन इसके लक्षणों को कंट्रोल करके पीड़ित कुछ राहत पा सकता है। इसके अंतर्गत खाने में फाइबर, साबुत अनाज, फल और सब्जियों को बढ़ावा देने से कब्ज की समस्या दूर होती है और मल त्याग के समय पड़ने वाला तनान कम होने से हर्निया के दर्द से राहत मिलती है। ईसबगोल का सेवन भी इसमें लाभकारी है। बहुत ज्यादा खाने से बचें, यदि दो रोटी की भूख है तो आधी रोटी कम खायें। खाना खाने के तुरन्त  बाद लेटें और झुकें नहीं। अचार, मसालेदार भोजन और ऐसे पदार्थों के सेवन को कम करें जिनसे एसिड बनता हो। धूम्रपान और एल्कोहल का सेवन बंद कर दें।

हर्निया एक्सरसाइज:  व्यायाम से हर्निया के आसपास की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है और पीड़ित का वजन कम होता है जिससे हर्निया के कारण होने वाली परेशानी कम होती है। वेंट्रल हर्निया से पीड़ित मोटे लोगों पर हुए एक अध्ययन के अनुसार व्यायाम से वेन्ट्रल हर्निया की जटिलतायें कम हुई और सर्जरी के बाद ऐसे लोगों की रिकवरी दूसरों की अपेक्षा जल्द हुई। हर्निया पीड़ित कौन-कौन व्यायाम कर सकते हैं इस सम्बन्ध में डाक्टर से सलाह लें क्योंकि वजन उठाने और पेट को तनाव देने वाले व्यायाम से हर्निया क्षेत्र पर दबाव पड़ता है जिससे हर्निया और अधिक उभर जाता है।

रोकथाम: हर्निया को पनपने से पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता क्योंकि यह जन्मजात और पेट की सर्जरी से भी हो जाता है। लेकिन असावधानी और खराब लाइफस्टाइल से होने वाले हर्निया को कुछ हद तक रोक सकते हैं। इसके लिये इन बातों पर दें- धूम्रपान छोड़ना, लगातार खांसी होने पर प्रभावी उपचार,  स्वस्थ वजन मेन्टेन करना मल त्याग करते समय या पेशाब के दौरान ज्यादा जोर न लगाना, कब्ज हटाने के लिये फाइबर युक्त खाद्य-पदार्थों का सेवन,  पेट की मांसपेशियां मजबूत करने वाले व्यायाम करना, वजन उठाने से बचना और यदि वजन उठाना जरूरी है तो कमर या पीठ पर झुकने के बजाय घुटनों पर झुकें।

नजरिया

यदि व्यक्ति हर्निया से पीड़ित है तो समय से इलाज जरूरी है। ऐसा न करने पर कभी भी लाइफ थ्रेटनिंग लक्षण उभर सकते हैं। हर्निया होने पर डाक्टर से मिलें और उपचार के सम्बन्ध में सलाह लें क्योंकि डाक्टर ही यह बता सकता है कि इसका इलाज कैसे होगा और अभी यह किस कंडीशन में है। शुरूआती स्टेज में मेडिकल केयर और लाइफ स्टाइल में परिवर्तन करके हर्निया के लक्षण कंट्रोल करते हैं लेकिन इसका स्थायी हल सर्जरी ही है और इसके सफल होने की दर 99 प्रतिशत है। आमतौर पर हर्निया की सर्जरी शत-प्रतिशत सफल होती है लेकिन ऐसा भी देखा गया है कि कुछ मामलों में सर्जरी के बाद फिर से हर्निया हो गया।

Leave a comment

Your email address will not be published.

5 × three =

ट्रेंडिंग खबरें arrow
x
न्यूज़ फ़्लैश
दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश, स्कूलों में  छुट्टी
दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश, स्कूलों में छुट्टी