लज्जित करने वाली लापरवाही - Naya India
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लज्जित करने वाली लापरवाही

विश्वव्यापी कोरोनावायरस के चलते जहां चिकित्सा विभाग के डॉक्टर नर्स देव दूत के रूप में सामने आए हैं वही सागर मेडिकल कॉलेज की घटना ना केवल अमानवीय है वरन लज्जित करने वाली है और कोरोना संक्रमित ही नहीं अन्य रोगों से पीड़ित मरीजों का विश्वास उठाने वाली है जिसमें हार्ट का इलाज कराने के लिए रहली के ओम प्रकाश श्रीवास्तव तिली अस्पताल में भर्ती हुए थे और बाद में दर्द बढ़ने पर कोरोना मरीज मानकर मेडिकल कॉलेज में भर्ती करा दिया गया और वहां उन की कब मृत्यु हुई और कब अंतिम संस्कार कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज के गेट पर बैठे परिजनों को बताया ही नहीं गया और बाद में पता चला श्रीवास्तव की कोरोना रिपोर्ट भी नेगेटिव आई है।

दरअसल कोरोनावायरस को लेकर वैसे ही आम आदमी भय ग्रस्त है और लॉक डाउन का पालन कर रहा है छोटी मोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी वह अस्पताल नहीं जा रहा है लेकिन जब बहुत मजबूरी होती है जान पर बन आती है तब ही वह अस्पताल की ओर जाता है और ऐसे में यदि अस्पताल प्रबंधन की ओर से घोर लापरवाही हो तो फिर आखिर आदमी जाए तो जाए कहां।

जब किसी परिवार में कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है तब उसके परिजन उसका अच्छे से अच्छा इलाज कराने के लिए प्रयास करते हैं और यदि किसी की मृत्यु हो जाए तो फिर परिजनों के साथ साथ मित्र और रिश्तेदार भी अंतिम दर्शन और शव यात्रा में शामिल होने के लिए दूर-दूर से आते हैं। यहां तक कि शव को मशीन में सुरक्षित रखा जाता है जिससे चाहने वाले अंतिम बार दर्शन कर सकें कोरोना काल में ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है लेकिन निकट के भाई-बहन माता-पिता को दर्शन करने मिल जाता है। यहां तक कि जब इंदौर में एक डॉक्टर की कोरोनावायरस के कारण मृत्यु हुई तब ऑस्ट्रेलिया में बैठे उसके पुत्रों को ऑनलाइन मृत शरीर के दर्शन कराए गए लेकिन सागर में जिस मरीज को कोरोना पॉजिटिव थी ही नहीं। उसके परिजन मेडिकल कॉलेज के गेट पर बैठे रहे और उन्हें अंतिम समय दर्शन करने को भी नहीं मिले इस घटना को जिसने भी सुना उसे झकझोर दिया लेकिन मेडिकल कॉलेज के डीन पटेल अभी भी कह रहे हैं कि हम पूरी घटना का पता लगा रहे हैं कि आखिर कहां किससे कैसे चूक हुई पूरी घटना पर जिला प्रशासन की चुप्पी भी रहस्यमई नजर आ रही है।

बहरहाल विगत दिनों रहली के ओम प्रकाश श्रीवास्तव को हृदय में दर्द हुआ और परिजन पहले रहली के चिकित्सालय में और बाद में वहां से रिफर होने पर जिला चिकित्सालय तिली अस्पताल सागर मैं इलाज कराने के लिए ले गए जहां भर्ती कर दिया गया और उसके बाद रात में दर्द होने पर ओम प्रकाश श्रीवास्तव को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर में भर्ती करा दिया गया और परिजनों को यह कहकर मिलने से मना कर दिया गया कि उनका कोरोना का इलाज चल रहा है परिजन इधर-उधर भटकते रहे मेडिकल कॉलेज के गेट पर इंतजार करते रहे और कोई भी ओम प्रकाश श्रीवास्तव के बारे में कुछ भी बताने से बचता रहा और हद तो तब हो गई जब मेडिकल कॉलेज के गेट पर बैठे परिजनों को रहली से किसी ने फोन पर सूचना दी की नगर पालिका द्वारा ओम प्रकाश श्रीवास्तव के मृत शरीर को जला दिया गया यह सुनकर परिजन स्तब्ध रह गए उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा कि आखिर ऐसा क्यों किया गया क्यों नहीं हमें बताया गया

अब जबकि ओम प्रकाश श्रीवास्तव की कोरोना रिपोर्ट भी नेगेटिव आई है तब परिजनों के मन में अनेक प्रकार की आशंकाएं जन्म ले रही हैं जिनकी शिकायत में उच्च स्तर पर और मानव अधिकार आयोग में भी कर रहे हैं। परिजनों को आशंका है कि कहीं मानव शरीर के अंगों को निकाल कर बेचा तो नहीं गया है या फिर ऐसे कौन से कारण हैं जिसमें इतनी घोर लापरवाही हुई जितनी देश में कहीं भी नहीं हुई इस घटना को जिसने भी सुना उसका दिल दहल गया और अब अस्पताल जाने से भी डर लगने लगा पूरे मामले में प्रशासन भी संदेह के घेरे में हैं जब मृतक कोविड-19 पॉजिटिव था तो फिर मृतक के निवास क्षेत्र को कंटेंटमेंट क्षेत्र घोषित क्यों नहीं किया गया।

कुल मिलाकर विश्वव्यापी कोरोना महामारी के कारण आम आदमी वैसे ही भय ग्रस्त है और शासन के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए लगातार घर के अंदर रहकर लॉक डाउन का पालन कर रहा है लेकिन यदि इस प्रकार की लापरवाही होंगी तो फिर अन्य बीमारियों के इलाज के लिए भी अस्पताल जाने से बचने लगेगा सागर में नए कलेक्टर के रूप में दीपक सिंह ने मंगलवार को कार्यभार ग्रहण करने के बाद जिले के लोगों को भरोसा दिलाया है कि जिले के लोक सेवक होने के नाते मेरा लक्ष्य प्रयास रहेगा कि जिले की कुशल प्रशासकीय संचालन एवं नागरिक सेवाओं का उचित प्रबंधन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी कहा है कि हमारी प्राथमिकता इस वैश्विक महामारी कोविड-19 कोरमा से सागर जिले का बचाव करना है उन्होंने सागर वासियों जनप्रतिनिधि मीडिया प्रशासनिक कर्मचारियों व अधिकारियों के सहयोग और समन्वय से सागर को और अधिक स्वस्थ स्वच्छ और सुंदर बनाने का वादा किया है लेकिन सबसे पहले उन्हें सागर की चरमराई प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करना होगा और खासकर चिकित्सा के क्षेत्र में सुधार करना होगा क्योंकि पहले से ही लापरवाही ओं के लिए पहचाने जाने वाला बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज इस लापरवाही के बाद भयावह नजर आने लगा है वर्तमान के जिस संकटकाल काल में दीपक सिंह ने सागर कलेक्टर का चार्ज लिया है उसमें उनकी संवेदनशीलता और कर्मठता भी कसौटी पर है।

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