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Sunday, April 18, 2021
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शिवराज ने हीरे गिनाए कमलनाथ ने मांगी साइकिल

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दरअसल, कितना भी गंभीर मामला हो लेकिन सदन में हास – परिहास के दौर हो ही जाते हैं शेरो-शायरी कहने में भी कभी-कभी होड़ सी लग जाती है। ऐसा ही कुछ नजारा शुक्रवार को विधानसभा का था जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के बाद जवाब देने के लिए बोलना शुरू किया तो टोका-टोकी ना करने की अध्यक्षीय व्यवस्था के बावजूद खूब टोका-टोकी भी हुई।

जनप्रतिनिधियों की परख भी बताई गई और शेरो -शायरी भी हुई मुख्यमंत्री चौहान ने उन सब सदस्यों के नाम लिए जिन्होंने राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में भाग लिया था और कोरोना काल का दर्द व्यक्त करते हुए कहा कि सदन का कार्यकाल ऐसा रहा कि जिसमें साल सवा साल हम लोग चर्चा में भाग नहीं ले पाए।

आज मैं आश्वस्त करना चाहता हूं कि चाहे वह पक्ष के हमारे साथी हो या हमारे प्रतिपक्ष के साथी हो “सब काहू का लीजिए, सांचा असद निहार। पक्षपात ना कीजिए कहे कबीर विचार।।” उन्होंने कहा कि प्रस्तावित को नेता प्रतिपक्ष ने बड़े जोर देकर कहा है मैंने भी पिछली सरकार का राज्यपाल का अभिभाषण पढ़ा है। आपने भी दो बार प्रस्तावित किया था तीन बार करना है और 6 बार किया जाएगा तो आपने प्रस्तावित किया। हमने भी प्रस्तावित कर दिया इसमें क्या आपत्ति है। इस पर नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने कहा कि आपको हमारा समय बहुत याद आ रहा है कोई चिंता की बात नहीं है।

मैं जानता हूं कि प्रस्तावित का क्या मतलब होता है। थोड़ा बहुत ज्ञान मुझे भी है आपके जितना नहीं होगा परंतु यह शैली का ज्ञान मुझे नहीं है जो आप की शैली है। किसानों की कर्ज माफी पर मुख्यमंत्री चौहान ने बिना नाम लिए सम्मानित नेता कह कर राहुल गांधी की मंदसौर की सभा में जो गिनती कही थी उसको याद दिलाया और कहा कि यदि 10 दिन में कर्जा माफ नहीं किया तो 11 वें दिन मुख्यमंत्री बदल देंगे और शायद इस घोषणा के कारण इनको इतने वोट मिले। मुझसे भी लोगों ने कर्ज माफी घोषणा करने को कहा था लेकिन मैंने नहीं किया। इस पर विधायक सुखदेव पांसे ने कहा कि आपने 50,000 तक का कर्जा माफ करने की घोषणा 2008 में की थी जो पूरी नहीं की।

नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने कहा कि लगभग 27 लाख किसानों का कर्जा माफ हुआ है और आपने जो सदन में आंकड़े पेश किए हैं। 3 महीने पहले उसमें आपने स्वीकार भी कर लिया है इस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि जब पूरा कर्जा माफ नहीं हो सकता था तो कहा क्यों? नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने कहा हमारी दूसरी किस्त चल रही थी। मुख्यमंत्री ने कहा कितना हुआ 60 हजार करोड़ का होना था इस पर विधायक कुणाल चौधरी ने कहा 15 लाख का तो कुछ पता नहीं पड़ा।

2 करोड़ रोजगार का पता नहीं पड़ा। पेट्रोल-डीजल पर आप साइकिल चलाते थे साहब। अध्यक्ष ने सदस्यों से बैठ जाने को कहा विश्वास सारंग भी बोले तभी संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा खड़े हुए और उन्होंने कहा मेरा प्वाइंट आफ ऑर्डर है। मेरा व्यवस्था का प्रश्न है जब सम्मानित नेता प्रतिपक्ष बोल रहे थे हमारे पक्ष का एक भी व्यक्ति नहीं बोला लेकिन अब सम्मानित सदस्य न उठें क्योंकि सदन के नेता मुख्यमंत्री बोल रहे हैं। अध्यक्ष जी यदि ऐसा करेंगे तो बहुत दिक्कत आएगी। इस पर आप की व्यवस्था आनी चाहिए और इसके बाद अध्यक्ष ने व्यवस्था दी। इसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जब डीजल-पेट्रोल के बारे में बोलते हुए कहा कि तब विपक्ष को साइकिल याद नहीं आई। अब साइकिल याद आ जाती है।

इस पर नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने कहा कि एक निवेदन है कि जो आपकी साइकिल थी कम से कम वह मुझे तो भिजवा दीजिए। इस पर नरोत्तम मिश्रा ने कहा जिन्होंने चलाई थी वह हॉफ गए थे और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मैं आपको साइकिल किसी भी कीमत पर नहीं भेज पाऊंगा। उम्र का भी लिहाज करना ह।ै मुझे जीतू पटवारी तब तपाक से बोले मैं चला लूंगा, भेज दो। आप तो टोका टाकी के बीच मुख्यमंत्री बोलते हुए जब कहने लगे कि मैं कभी नहीं रोया कि खजाना खाली है, पैसा ही नहीं है। अरे, नहीं है तो मुख्यमंत्री काहे के और हो तो पैसे की जुगाड़ करो लेकर आओ और जनता के काम करो। इस पर कमलनाथ ने कहा आप जरूर जुगाड़ कीजिएगा। यह आंकड़ों का खेल आप भी समझते हैं मैं भी समझता हूं।

आप जो कहना चाह रहे हैं कि मैंने किया यह तो चल ही रहा था आपसे आंकड़ों के खेल में जीतना बड़ा मुश्किल है। इस पर नरोत्तम मिश्रा ने कहा दूसरे खेल में भी जीतना मुश्किल है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जब राजनीतिक प्रतिद्वंदिता की बात समझा रहे थे और कह रहे थे कि ऐसा प्रचारित किया गया कि मुख्यमंत्री मैनेजमेंट गुरु है वह विधायक ले गए आप करो तो पुण्य है इस पर गोपाल भार्गव ने कहा कि अध्यक्ष महोदय मैं नेता प्रतिपक्ष था मैंने उस समय कोई डिवीजन नहीं मांगा था। आपने यही बताने के लिए कि मैं मैनेजमेंट गुरु हूं। मेरे दो साथियों को प्रभावित करने की कोशिश की क्या यह नैतिक रूप से उचित था। मैं बार-बार कह रहा था कि मैं डिवीजन नहीं मांग रहा हूं लेकिन आपने इस बात की कोशिश की और तब यह बात आई कि खेल आपने शुरु किया है, खत्म हम करेंगे और वह खेल खत्म हुआ। इस पर नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने कहा कि गोपाल भार्गव जी आपसे यह बात सुन ली।

इससे बड़ा कष्ट होता है परंतु कोई बात नहीं यह शुरुआत हमने नहीं की थी। शुरुआत आप ने की थी जब आपने अध्यक्ष के चुनाव में कैंडिडेट खड़ा किया। शिवराज जी मैं तो कहता हूं कि अध्यक्ष के चुनाव में जो परंपरा थी यह परंपरा आपने ही तोड़ी। हम साबित करना चाहते थे इसलिए डिवीजन हुआ आपको क्यों परेशानी थी। आप अपना कैंडिडेट वापस कर लेते। मैंने बहुत निवेदन किया था यह परंपरा मत तोड़िए कि अध्यक्ष सरकार का हो और उपाध्यक्ष आपके पक्ष का होना चाहिए, लेकिन आपने परंपरा तोड़ी। यह बात आपने पहले दिन से ही शुरू की थी। इस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हम तो सत्ता छोड़ कर चले गए थे। हम तो 5 साल विरोध की राजनीति करना चाहते थे लेकिन आज मुझे आपसे कहना है कि आप आगे के लिए भी समझ लें।

आपने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को कुचलना शुरू कर दिया एक जगह नहीं कई जगह हमारे वर्षों पुराने कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई हुई। उन्होंने संजय पाठक का रिसोर्ट तोड़ने और भूपेंद्र सिंह की होटल नपवाने का भी उदाहरण दिया। चारों तरफ त्राहि-त्राहि मची हुई थी। यहां तक हुआ कि अधिकारी स्तर पर उच्च पदों की भी बोलियां लगी और कई जगह चारों तरफ दलाल घूमने लगे यह परिस्थितियां बनी इस पर नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने कहा कि मुख्यमंत्री जी आप जो कह रहे हैं बड़ी गंभीर बात कह रहे हैं। उच्च अधिकारियों की बोली लगती थी मैं पूछना चाहता हूं कि भले ही आप सदन में ना बताएं मुझे अलग से बता दें कौन सा ऐसा उच्च अधिकारी था जिसकी पोस्टिंग…..

जहां तक कुचलने वाली राजनीति की बात है मेरे अनजाने में ऐसा हुआ हो तो मैं तुरंत रुकवा देता, क्योंकि ऐसी राजनीति का साथ मैंने कभी नहीं दिया। आप जो ऐसे ही चलते फिरते इस प्रकार के आरोप लगा रहे हैं। यह बात आपको शोभा नहीं देती। विश्वास सारंग कहने लगे मुझ पर भी केस लगाया गया। नरोत्तम मिश्रा भी बोले मेरा पूरा स्टाफ गिरफ्तार हो गया। 18 लोग जेल में चले गए और यह कह रहे हैं किसी को कुछ नहीं किया। इस पर अध्यक्ष ने कहा यह प्रश्नकाल नहीं है। प्रश्न करके उत्तर नहीं लेना है। मुख्यमंत्री जी बोल रहे हैं, थोड़ा सुनिए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जो साथी आपको छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में आए उन पर आरोप लगाए गए। आखिर वे अपना कैरियर दांव पर लगा कर आए थे। इस्तीफा देकर आए थे और फिर चुनाव के मैदान में गए।

मुझे तो इन पर गर्व होता है कि तुलसी सिलावट कभी सांवेर में दो ढाई हजार वोटों से अधिक नहीं जीते, वह 57000 वोटों से जीते। सारे रिकॉर्ड उन्होंने ध्वस्त कर दिए। प्रभुराम चौधरी 63,800 वोटों से जीत कर आए हैं। प्रद्युम्न सिंह तोमर, बिसाहूलाल, गोविंद सिंह राजपूत, महेंद्र सिंह सिसोदिया 53,000 मतों से जीत कर आए। यह डंग साहब सवा लाख से एक लड़ाऊं सरदार डंटा रहा। बेंगलुरु में भी डंटा रहा कि चाहे कुछ हो जाए। इस पर डॉक्टर गोविंद सिंह ने कहा कि यह सब मशीनों का खेल है जो आप यहां गिना रहे हो। शिवराज सिंह चौहान ने कहा यह तो बिल्कुल फेयर नहीं है। नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने कहा कि मुझे पता नहीं कि किस मजबूरी में आपको यह सब बोलना पड़ रहा है। यह भी तो एक मजबूरी होती है क्योंकि आपको भी आगे सरकार चलानी है परंतु सावधान रहियेगा। इन्होंने तो पहले दिन से ही खेल शुरू कर दिया था। इसलिए मैं आपको सावधान कर रहा हूं। मैं आपका हितैषी हूं।

नरोत्तम मिश्रा खड़े हुए और कहा कि “नफरतों के तीर खाकर दोस्तों के शहर में तुम को किस किसने मारा है ये कहानी फिर कभी” मुख्यमंत्री चौहान ने कहा मैं दिल से सचमुच में कह रहा हूं कि आपने इन हीरों की पहचान नहीं की। मैं इनके साथ काम कर रहा हूं। इस पर कमलनाथ ने कहा कि आपने 8 महीनों में ही हीरा की पहचान कर ली। बहुत खुशी हुई। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मैं तो काम के आधार पर कह रहा हूं दिन-रात हमारी टीम मिलकर काम में लगी हुई है। कमलनाथ ने कहा कि हम तो 30 साल से पहचान रहे हैं। बृजेंद्र सिंह राठौर ने कहा कि नीलम का हीरा आपके बगल में है। नीलम से जरा संभल कर रहिएगा। यह बहुत जल्दी असर करता है। फायदा भी करता है और एक ही झटके में नुकसान भी करता है।

खर्चा किसी का हुआ और फायदा किसी और ने ले लिय। राठौर का इशारा नरोत्तम मिश्रा की ओर था जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हीरा भी बड़ा अनमोल है। यह हीरा मेरे साथ 1990 से है और हर कदम पर है हम लोग साथ मिलकर चले हैं। आप गलतफहमी मत रहिएगा क्योंकि यह गलतफहमी में डालने में भी माहिर है। कमलनाथ ने कहा चलिए हमें खुशी हुई कि आपने सर्टिफिकेट तो दे दिया। पीसी शर्मा ने कहा हीरो का कोई भरोसा नहीं होता। इस पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा यह हीरा भी है और हीरो भी है। दिखने में भी हीरो से कोई कम है क्या? तभी गोपाल भार्गव ने कहा कि “यह नए मिज़ाज का शहर है जरा फासले से मिला करो कोई हाथ भी न मिलाएगा जो मिलोगे तपाक से” जिस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा यह भी जबरदस्त हीरा है। इशारा गोपाल भार्गव की तरफ था। उन्होंने कहा हमारे पास हीरो की कमी है क्या?

कुल मिलाकर टोका – टोकी ना करने की अध्यक्षीय व्यवस्था के बावजूद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की शुरुआती जवाब में टोका – टोकी तो हुई लेकिन इतनी सहज और शेरो शायरी से सराबोर थी कि इस पर आपत्तियां न के बराबर थी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का जवाब सुनने के लिए नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने अपना दिल्ली का दौरा निरस्त किया और दोनों ही नेताओं के बीच एक समय सवाल-जवाब ऐसे हुए जैसे प्रश्नकाल चल रहा हो लेकिन एक घंटा 50 मिनट के मुख्यमंत्री के जवाब में आखिरी के 25 मिनट धाराप्रवाह बोलने के लिए मुख्यमंत्री को मिल ही गए जिसमें टोका-टोकी नहीं हुई। शायद सदस्यों को भी लंच पर जाने की जल्दी थी क्योंकि विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने मुख्यमंत्री के जवाब के पूरा होने तक सदन के समय में वृद्धि की थी।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकार की योजनाओं उपलब्धियों का जहां जमकर बखान किया वहीं माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने का संकल्प भी बार-बार दोहराया। चाहे वह माफिया के रूप में कोई अधिकारी हो, कोई नेता हो या कोई बड़ा उद्योगपति हो। प्रायः कम बोलने के लिए जाने जाते रहे नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ शुरू से ही बोलते नजर आए और मुख्यमंत्री को बार-बार अपना जवाब रोकना पड़ा। कांग्रेसी सदस्यों के बार बार बोलने पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री बोल रहे हैं इसलिए कोई बीच में न बोलें। जब जरूरी होगा तब मैं टिप्पणी करूंगा। जाहिर है दोस्ताना अंदाज में हुए सवाल – जवाब यह जरूर संदेश दे गए। यदि सरकार सदन चलाना चाहेगी तो पूरे समय तक सदन चल सकेगा।

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