‘शिवराज’ की ‘यूएसपी’ पर चोट और ‘सवाल’?

मानवीयता और संवेदनशीलता को बनाए रखने वाली गुना पुलिस से जुड़ा मामला संगीन पर सवाल भी गम्भीर खड़े हो चुके।  गरीब बेवस दलित किसान पर पुलिस और प्रशासन की बर्बरता के इस वायरल वीडियो से सरकार चला रही भाजपा भी इत्तेफाक नहीं रखती होगी.. विपक्ष द्वारा सवाल खड़े कर सियासत करना भी उसकी जिम्मेदारी मानी जाएगी।

जहां तक बात शिवराज सिंह चौहान की है तो पहले भी 13 साल के मुख्यमंत्री रहते उन्होंने गरीब किसान दलित महिलाओं के लिए योजनाओं के जरिए अपनी संवेदनशीलता जवाबदेही के साथ मानवीय दृष्टिकोण को हमेशा प्राथमिकता दी।

कमलनाथ सरकार के जाने के बाद अपनी इस पुरानी लाइन को आगे बढ़ा कर शिवराज ने अपनी यूएसपी को धूमिल नहीं होने देने की कोशिश की। लेकिन गुना की इस घटना के साथ एक बड़ी चोट से इनकार भी नहीं किया जा सकता .., कोरोना काउंट जब किसान मजदूर गरीब हर वर्ग जिंदगी जीने के लिए संघर्ष करने को मजबूर है तब दलित समुदाय से जुड़े इस परिवार पर पुलिस का कहर सवाल जरूर खड़े करता है ।

पुलिस की बेरहमी का शिकार हुए किसान दंपति अब सियासतदारों के माइलेज प्रोडक्ट बनकर रह गए हैं…प्रथम दृष्ट्या पूरी घटना का वायरल वीडियो जिसने भी देखा उसके अंतर्मन से वेदना निकली की शिवराज की पुलिस इतनी बेरहम,क्या मानवता मर गई है.बस जनभावनाओं का यही हथियार विपक्ष ने लपका और भाजपा सरकार पर चढ़ाई कर दी.सरकार ने भी अनान फानन में कलेक्टर,एसपी पर कार्यवाई कर डाली …पर अब यहां बड़ा सवाल ये उठता है कि क्या ये वास्तव में गुना कांड जैसे वीडियो में दिख रहा ठीक वैसा ही है या फिर ये उस शिवराज सिंह चौहान की साख जिसकी गिनती संवेदनशील मुख्यमंत्री के तौर पर होती पर सवालिया निशान लगाने वाला यह कोई प्रायोजित षणयंत्र का हिस्सा तो नहीं है।  आखिर यह स्थिति क्यों निर्मित हुई क्या वरिष्ठ जिम्मेदार अधिकारियों को भरोसे में लेकर पुलिसकर्मी इस परिवार पर टूट पड़े.. या फिर क्या स्थिति अचानक निर्मित हुई क्या इससे पहले भी कई बार इस विवाद को संवाद समझा इसके जरिए सुलझाने की कोशिश नहीं की गई।

जिसने पिछले 15 साल मुख्यमंत्री रहते हुए सिर्फ गरीब,लाचार,बेवस,किसानों, असहाय,बालिकाओं सहित अंत्योदय वाली लाइन पर चलकर अपनी अलग साख और पहचान बनाई?क्या ये उन्हीं शिवराज की पुलिस है जिसने थाने में पहुंचने वाले हर व्यक्ति के साथ यथासंभव शालीन व्यवहार कर उसकी फरियाद सुनने पुलिस महकमे को आदेशित किया था?क्या ये उसी शिवराज की पुलिस है जिसके लिए अन्नदाता ही ईश्वर का रूप है?यहां चिंतन की जरूरत है तो घटना के कारणों,हालातों और बर्बरता करने वालों की मानसिकता और उद्देश्य जानने की भी…क्योंकि सवाल ये भी है कि जो सबको दिखाई दे रहा कहीं उसके पीछे शिवराज की साख पर सवाल खड़ा करने का कोई प्रायोजित घिनौना खेल तो नहीँ छुपा? ये मामला जिस तरह सामने है इससे इतर कई ऐसे सवाल भी खड़ा करने वाला है कि जब पुलिस किसान परिवार के साथ ऐसी बर्बरता कर रही थी तो वीडियो बनाने वालों के साथ पुलिस ने कोई रोक-टोक नहीं की? मामला जितना संगीन है सो जांच का विषय गंभीर तो है ही।

जांच किन बिंदुओं पर कराना है ये तो सरकार का तय करेगी पर यहां फिर एक सवाल खड़ा होता है कि मामला उस गुना जिले का है जहां महाराज और राजा की सियासी टकरा हट अब किसी से छुपी नहीं है ..मुख्यमंत्री शिवराज तो जांच में इस बात का भी जिक्र होना लाजमी हो कि 15 महीनों की कांग्रेस सरकार में किन किन अधिकारियों,कर्मचारियों को वहां किसकी सिफारिश पर पदस्थ किया गया … सरकार बदलने के बाद क्या यह वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी शिवराज सरकार की प्राथमिकताओं से अवगत नहीं थे.. इस मुद्दे की गंभीरता से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि यह परिवार किसान वह भी गरीब और दलित वर्ग का प्रतिनिधित्व कर रहा था जिसके पूरे परिवार पर पुलिस ने कहर ढाया।

दलित किसान मुद्दा और उपचुनाव
राजा महाराजा की राजनीति का केंद्र बनते रहे.. गुना जो ज्योतिरादित्य के पूर्व संसदीय क्षेत्र का हिस्सा रहा या फिर जहां दिग्विजय सिंह की हमेशा पैनी नजर रही है.. राज्यसभा चुनाव के बाद गुना एक बार फिर सुर्खियों में इससे पहले भाजपा विधायक गोपीलाल जाटव राज्यसभा चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग और रिजेक्ट वोट के मुद्दे पर भाजपा की किरकिरी करा चुके हैं…. .. कमलनाथ से लेकर राहुल गांधी का रिएक्शन भी सामने आ चुका है.. जिसकी वजह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वह वीडियो है.. जिसमें पुलिस की बर्बरता का शिकार किसान दंपत्ति हुए जो दलित समाज का प्रतिनिधित्व करते और जिनकी गरीबी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है.. जो तीसरे व्यक्ति पादरी के कहने पर वो वहां खेती कर रहे थे…जिस भूमि को लेकर पुलिस प्रशासन ने मानवीय संवेदना को बलाए ताक रखकर जरूरत से ज्यादा सख्ती दिखाई वह कॉलेज के लिए आवंटित भूमि का हिस्सा थी …इस वीडियो में जमीन पर बेसुध किसान के बिलखते चीखते बच्चों की दयनीय हालत खुद उस कहानी को बयां कर रही है… जिसने सारी इंतहा पार कर दी घटना के बाद मुख्यमंत्री शिवराज ने सख्त फैसले जरूर लिए लेकिन इसके साथ ही विपक्ष को राजनीति करने का मौका भी मिल गया जो गलत भी नहीं है।

विपक्ष की भूमिका निभा रही कांग्रेस ने रामनिवास रावत के नेतृत्व में अपने नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल जांच के लिए भेजने का फैसला लिया.. कांग्रेस के निशाने पर शिवराज और महाराज की जोड़ी आ चुकी… पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के जंगलराज के बयान पर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने प्रदेश में कानून का राज पुलिस कानून का पालन कर आएगी जो पालन नहीं करेगा उसे जेल भेज देगी..इससे पहले राहुल गांधी ने इस मामले का वीडियो शेयर करते हुए कहा है कि हमारी लड़ाई इसी सोच व अन्याय के खिलाफ है…बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी आत्महत्या करने को मजबूर कर देने के लिए इस घटना की निंदा की.. राज्यसभा सांसद क्षेत्र के पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य को भरोसे में लेकर मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने न्यायिक जांच के आदेश दे दिए ..तो उधर मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया.. लेकिन इस मुद्दे पर राजनीति भी जोरों पर है।

सवाल खड़ा होना लाजमी है ग्वालियर चंबल क्षेत्र की राजनीति में जब एक बार फिर उपचुनाव सबसे ज्यादा इसी क्षेत्र में होने जा रहे हैं.. तो क्या एक बार फिर दलित उत्पीड़न एक बड़ा मुद्दा बनेगा.. इससे पहले विधानसभा चुनाव में दलित मुद्दे पर ही ग्वालियर चंबल क्षेत्र में भाजपा को कई सीट गंवाना पड़ी थी.. जिसके कारण भाजपा के मुकाबले कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में ज्यादा सीट मिली थीं…परिस्थितियां बदली गुना शिवपुरी में एक बार फिर दलित उत्पीड़न के इस मुद्दे ने उस वक्त सरकार में रहते भाजपा की परेशानी बढ़ाई है …जब 15 महीने में ही सरकार गंवा चुकी कांग्रेस खास तौर से कमलनाथ के लिए यह उपचुनाव उनके राजनीतिक जीवन की निर्णायक और अंतिम लड़ाई मानी जा रही है… तो क्या यह मुद्दा कांग्रेस खासतौर से प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए उपचुनाव में संजीवनी साबित होगा.. विधानसभा चुनाव से पहले किसानों से जुड़ा मंदसौर गोलीकांड एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया था.. लेकिन विधानसभा चुनाव में उस मंदसौर में कांग्रेस को सिर्फ एक सीट पर जीत हासिल हुई थी और भाजपा के खाते में 7 विधानसभा क्षेत्र गए थे.. कोरोना काल में विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने जा रहा है.. अब देखना दिलचस्प होगा भ्रष्टाचार और मलाईदार विभाग को अभी तक बड़ा मुद्दा बनाने की फिराक में जुटी कांग्रेस को गुना की है घटना कितनी ताकत देती है.. जबकि इस विधानसभा सत्र की समय सीमा को लेकर शुक्रवार को षभ दिल्ली बैठक में महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की संभावना है।

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